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पुलिस जांच में उलझे महिला उत्पीड़न के मामले
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मेरठ। उत्पीड़न की शिकार महिलाओं का न्याय पुलिस जांच में उलझकर रह गया है। पीड़ित महिलाएं थानों और पुलिस अफसरों के चक्कर काट-काटकर थक चुकी हैं, लेकिन निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही। आलम यह है कि मुख्यमंत्री और डीजीपी की सख्ती भी नाकाफी साबित हो रही है। बुधवार को सर्किट हाउस में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह की जन सुनवाई के वक्त से बातें सामने आईं। इससे नाराज उपाध्यक्ष ने जांच अधिकारियों को फटकार लगाई।
केस नंबर-1
सरधना निवासी महिला चार माह से न्याय को भटक रही है। महिला की नौ साल पहले शादी मुजफ्फरनगर निवासी दिनेश से हुई। पति ने उसे घर से निकाला और दूसरी शादी कर ली। नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत हुआ, लेकिन मामला जांच में उलझकर रह गया। पीड़िता ने रोते हुए आपबीती अध्यक्ष को बताया कि उन्होंने जांच अधिकारी को बुला लिया। अधिकारी ने ससुर को गिरफ्तार दिखाकर, शेष को फरार बता दिया। पीड़िता ने बताया कि खुलेआम होटल में जन्मदिन मना रहे आरोपी पुलिस को फरार दिखते हैं। यह सुन सुषमा सिंह भड़क गईं। उन्होंने जांच अधिकारी को फटकार लगाई और आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए।
केस नंबर-2
ब्रह्मपुरी निवासी युवती की शादी दिसंबर-2018 में मोदीनगर निवासी युवक से हुई। युवक सीए है। आरोप है कि ससुराल पक्ष दहेज को लेकर उसे प्रताड़ित करने लगे। कई बार मारपीट की गई और 10 लाख रुपये मांगे गए। विरोध करने पर युवती को मारने की कोशिश की गई तो परिजन घर ले आए। कई चक्कर काटने के बाद ससुराल पक्ष पर मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन तीन माह बाद भी जांच किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची। शुरू में ही गंभीर धाराएं हटाकर आरोपियों का बचाव कर दिया। पति अब सबक सिखाने की धमकी दे रहा है। अफसर भी निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाकर पीड़िता को लौटा देते हैं। उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
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वर्जन...
बर्दाश्त नहीं होगी लापरवाही
महिला उत्पीड़न के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कई जांच अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि वह निष्पक्ष होकर काम करें। इसके बाद भी मनमानी नहीं रुकी तो कार्रवाई कराई जाएगी। महिला उत्पीड़न के मामलों में मुख्यमंत्री का नजरिया स्पष्ट है। -सुषमा सिंह, उपाध्यक्ष, राज्य महिला आयोग
डरे नहीं, निडर होकर लड़ें
मेरठ। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह ने महिलाओं को निष्पक्ष न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि महिलाएं हर मुसीबत का मुकाबला निडरता करें। आयोग उनके साथ है। इस दौरान उनके समक्ष 21 शिकायत पहुंची। आयोग की ओर से जारी किए गए व्हाट्सएप नंबर 06306511708 की जानकारी भी दी। मुसीबत में महिला हेल्पलाइन 181 की मदद लें। पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह यह सुनिश्चित करें कि महिलाएं न्याय व मदद पाने के लिये दर दर की ठोकरें ना खाए। पीड़ित महिला अपनी आईडी सहित अपनी समस्या को किसी भी कार्यदिवस में व्हाट्सएप पर प्रात: 10 बजे से 5 बजे तक भेज सकती है। एसीएम सुनीता सिंह, सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला के अलावा संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
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केस नंबर-1
सरधना निवासी महिला चार माह से न्याय को भटक रही है। महिला की नौ साल पहले शादी मुजफ्फरनगर निवासी दिनेश से हुई। पति ने उसे घर से निकाला और दूसरी शादी कर ली। नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत हुआ, लेकिन मामला जांच में उलझकर रह गया। पीड़िता ने रोते हुए आपबीती अध्यक्ष को बताया कि उन्होंने जांच अधिकारी को बुला लिया। अधिकारी ने ससुर को गिरफ्तार दिखाकर, शेष को फरार बता दिया। पीड़िता ने बताया कि खुलेआम होटल में जन्मदिन मना रहे आरोपी पुलिस को फरार दिखते हैं। यह सुन सुषमा सिंह भड़क गईं। उन्होंने जांच अधिकारी को फटकार लगाई और आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए।
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केस नंबर-2
ब्रह्मपुरी निवासी युवती की शादी दिसंबर-2018 में मोदीनगर निवासी युवक से हुई। युवक सीए है। आरोप है कि ससुराल पक्ष दहेज को लेकर उसे प्रताड़ित करने लगे। कई बार मारपीट की गई और 10 लाख रुपये मांगे गए। विरोध करने पर युवती को मारने की कोशिश की गई तो परिजन घर ले आए। कई चक्कर काटने के बाद ससुराल पक्ष पर मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन तीन माह बाद भी जांच किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची। शुरू में ही गंभीर धाराएं हटाकर आरोपियों का बचाव कर दिया। पति अब सबक सिखाने की धमकी दे रहा है। अफसर भी निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाकर पीड़िता को लौटा देते हैं। उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
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बर्दाश्त नहीं होगी लापरवाही
महिला उत्पीड़न के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कई जांच अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि वह निष्पक्ष होकर काम करें। इसके बाद भी मनमानी नहीं रुकी तो कार्रवाई कराई जाएगी। महिला उत्पीड़न के मामलों में मुख्यमंत्री का नजरिया स्पष्ट है। -सुषमा सिंह, उपाध्यक्ष, राज्य महिला आयोग
डरे नहीं, निडर होकर लड़ें
मेरठ। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह ने महिलाओं को निष्पक्ष न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि महिलाएं हर मुसीबत का मुकाबला निडरता करें। आयोग उनके साथ है। इस दौरान उनके समक्ष 21 शिकायत पहुंची। आयोग की ओर से जारी किए गए व्हाट्सएप नंबर 06306511708 की जानकारी भी दी। मुसीबत में महिला हेल्पलाइन 181 की मदद लें। पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह यह सुनिश्चित करें कि महिलाएं न्याय व मदद पाने के लिये दर दर की ठोकरें ना खाए। पीड़ित महिला अपनी आईडी सहित अपनी समस्या को किसी भी कार्यदिवस में व्हाट्सएप पर प्रात: 10 बजे से 5 बजे तक भेज सकती है। एसीएम सुनीता सिंह, सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला के अलावा संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।