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मजबूत इरादों के साथ कांवड़ ला रही महिलाएं
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सुनील कैथवास....मोदीपुरम से आकर्षक झांकियां के साथ गुजरते शिवभक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सावन माह में कांवड़ यात्रा की धारा सिर्फ पुरुषाें तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में महिलाएं भी भोलेनाथ की भक्ति में गंगा जल लेने जाती हैं। महिलाएं अपने मजबूत इरादों और गहरी आस्था से यात्रा कर रहीं हैं। कई महिलाएं बच्चों को घर पर छोड़कर या परिवार संग बच्चों को साथ लेकर भी यह यात्रा पूरी कर रहीं हैं।
मलियाना निवासी अंजू ने बताया कि वह तीन साल से अपने पति और बेटे के साथ कांवड़ लेने जाती हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा में हर तरीके की सुविधा मिलती है। मलियाना निवासी जिया त्यागी ने बताया कि वह 12 साल की उम्र से ही कांवड़ लेने जाती हैं। तीन साल से अपने पापा के साथ कांवड़ ला रहीं हैं। 10 से 12 घंटे वह दिन में चलते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार की मेडिकल सुविधा बहुत अच्छी है। शास्त्रीनगर निवासी नीलम मिश्रा ने बताया कि वह आठ साल से अकेले ही कांवड़ ला रहीं हैं। उन्हाेंने कहा कि यह यात्रा एक आस्था है जो हमें भगवान से जोड़ती है। पैरों में छाले पड़ने के बावजूद भी वह हर साल कांवड़ यात्रा के लिए जाती हैं।
डिजिटल भक्ति बना कांवड़ यात्रा का नया अध्याय
मेरठ। सावन के महीने में शिवभक्तों का उत्साह और अधिक बढ़ जाता है। हर साल कांवड़िये हरिद्वार, गंगोत्री और दूसरे स्थानों से गंगाजल लाते हैं। वर्तमान समय में सोशल मीडिया भोले बाबा का नया दरबार बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूटयूब के जरिए हर रोज हजारों लाइव में भजन, भोलेनाथ की जयकार और कांवड़ यात्रा के दृश्य वायरल हो रहे हैं।
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इंस्टाग्राम चैनल इनक्रेडिबल मेरठ के दिव्यांशु वर्मा ने बताया कि वह अपने चैनल के जरिए लोगों को अपने धर्म व भक्ति भाव के प्रति अवगत करा सके व उनसे जुड़े लोगों की जिज्ञासा शांत कराएं। उन्होंने बताया कि वह सिर्फ कांवड़ ही नहीं बल्कि मेरठ से जुड़े और भी पौराणिक मंदिर व नई-नई खोज को उजागर करते हैं।
इंस्टाग्राम चैनल नमस्ते मेरठ के प्रशांत ने बताया कि कांवड़ यात्रा के समय माहौल, भाव और श्रद्धा को दिखाने का एक खास अंदाज है। जहां हर पोस्ट के साथ मेरठ के लोगों की आस्था जुड़ी है। भारत अधाना ने बताया कि हर व्यक्ति का कांवड़ लेने जाना तो संभव नहीं हो पाता, पर सोशल मीडिया के जरिए सभी लोग कांवड़ का माहौल महसूस कर सकते हैं।
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मेरठ। सावन माह में कांवड़ यात्रा की धारा सिर्फ पुरुषाें तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में महिलाएं भी भोलेनाथ की भक्ति में गंगा जल लेने जाती हैं। महिलाएं अपने मजबूत इरादों और गहरी आस्था से यात्रा कर रहीं हैं। कई महिलाएं बच्चों को घर पर छोड़कर या परिवार संग बच्चों को साथ लेकर भी यह यात्रा पूरी कर रहीं हैं।
मलियाना निवासी अंजू ने बताया कि वह तीन साल से अपने पति और बेटे के साथ कांवड़ लेने जाती हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा में हर तरीके की सुविधा मिलती है। मलियाना निवासी जिया त्यागी ने बताया कि वह 12 साल की उम्र से ही कांवड़ लेने जाती हैं। तीन साल से अपने पापा के साथ कांवड़ ला रहीं हैं। 10 से 12 घंटे वह दिन में चलते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार की मेडिकल सुविधा बहुत अच्छी है। शास्त्रीनगर निवासी नीलम मिश्रा ने बताया कि वह आठ साल से अकेले ही कांवड़ ला रहीं हैं। उन्हाेंने कहा कि यह यात्रा एक आस्था है जो हमें भगवान से जोड़ती है। पैरों में छाले पड़ने के बावजूद भी वह हर साल कांवड़ यात्रा के लिए जाती हैं।
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डिजिटल भक्ति बना कांवड़ यात्रा का नया अध्याय
मेरठ। सावन के महीने में शिवभक्तों का उत्साह और अधिक बढ़ जाता है। हर साल कांवड़िये हरिद्वार, गंगोत्री और दूसरे स्थानों से गंगाजल लाते हैं। वर्तमान समय में सोशल मीडिया भोले बाबा का नया दरबार बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूटयूब के जरिए हर रोज हजारों लाइव में भजन, भोलेनाथ की जयकार और कांवड़ यात्रा के दृश्य वायरल हो रहे हैं।
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इंस्टाग्राम चैनल इनक्रेडिबल मेरठ के दिव्यांशु वर्मा ने बताया कि वह अपने चैनल के जरिए लोगों को अपने धर्म व भक्ति भाव के प्रति अवगत करा सके व उनसे जुड़े लोगों की जिज्ञासा शांत कराएं। उन्होंने बताया कि वह सिर्फ कांवड़ ही नहीं बल्कि मेरठ से जुड़े और भी पौराणिक मंदिर व नई-नई खोज को उजागर करते हैं।
इंस्टाग्राम चैनल नमस्ते मेरठ के प्रशांत ने बताया कि कांवड़ यात्रा के समय माहौल, भाव और श्रद्धा को दिखाने का एक खास अंदाज है। जहां हर पोस्ट के साथ मेरठ के लोगों की आस्था जुड़ी है। भारत अधाना ने बताया कि हर व्यक्ति का कांवड़ लेने जाना तो संभव नहीं हो पाता, पर सोशल मीडिया के जरिए सभी लोग कांवड़ का माहौल महसूस कर सकते हैं।