अनाथ बच्चों संग कलक्ट्रेट में धरने पर बैठी महिला, डीएम से मांगा न्याय, 26 साल से कर रही सेवा
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मुजफ्फरनगर में अनाथ और दिव्यांग बच्चों की मां बनकर उनकी देखभाल करने वाली बीना राणा व्यवस्था से व्यथित हैं। उन्हें शुक्रताल पुलिस ने आदेश जारी कर दिया है कि आश्रम को बच्चों से खाली करो। अनाथों को किसके सहारे छोड़े यह सोचकर पीड़ित बीना राणा बच्चों संग कलक्ट्रेट में धरने पर बैठ गईं। डीएम के सामने अपना दुखड़ा रोया।
अखिल भारतीय विकलांग एवं अनाथ सेवा समिति शुक्रताल की बीना राणा और उनके पति विरेंद्र राणा 1993 से अनाथ और दिव्यांग बच्चों का सहारा बने हैं। ये इनका पालन पोषण ही नहीं करते इन्हें शिक्षित भी करते हैं। आठवीं तक की शिक्षा स्वयं देते हैं, इससे आगे मोरना पढ़ाई के लिए भेजते हैं। यह निसंतान दंपती अनाथ और दिव्यांगों में ही अपने ही बच्चों का रूप देखते हैं। इनकी संस्था 1998 से रजिस्टर्ड भी है। आम जनता बच्चों के लिए खाद्य सामग्री और कपड़े आदि उपलब्ध करा देती है, उसी से यह अपना आश्रम चलाते हैं। सरकार से इन्हें कोई सहायता उपलब्ध नहीं होती है।
वहीं जिला प्रोबेशन विभाग ने कुछ दिन पहले इनसे बच्चों का डाटा मांगा था, जिसे इन्होंने विभाग को सौंप दिया था। विभाग ने कागजों में कमी बताते हुए एक नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद जानसठ के तहसीलदार और शुक्रताल पुलिस ने आश्रम पर पहुंचकर बच्चों को यहां से भगाने के लिए कहा। नि:स्वार्थ भाव से बच्चों की सेवा कर रही दंपती के लिए यह बड़ा झटका है। मंगलवार को बीना राणा सभी 42 बच्चों के साथ डीएम ऑफिस के सामने आकर धरने पर बैठ गईं। कचहरी में जिसने भी प्रकरण जाना वही दुखी हुआ। अपनी पूरी पीड़ा डीएम सेल्वा कुमारी जे के सामने रखी। डीएम ने पीड़िता को आश्वासन दिया कि उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन वह कागजों की पूर्ति करा लें।
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बीना राणा का कहना है कि प्रशासन सबके वारिस मांग रहा है। ऐसे में जिनके मां-बाप नहीं है, उनके वारिस कहां से लाएं और इन्हें किसके पास छोडे़ं। वहलना के पांच भाई-बहन है, सबकी उम्र 14 साल से कम है। मां-बाप झगडे़ में घर से भाग गए पता नहीं कहां है, दादी पालन कर रही थी, उसकी मौत हो गई। नानी बची है, उसके पास अपने गुजारे की स्थिति नहीं है, हमारे यहां छोड़ गई, अब बताओ इन्हें आश्रम से कैसे निकाल दें। जितने बच्चे यहां है, सबकी ऐसी ही कहानी है। अपने जीते जी हम बच्चों को अनाथ नहीं कर सकते।
बिना राणा समाज के लिए प्रेरणा: बालियान
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि अनाथों और दिव्यांगों को अपने बच्चे मानकर उनका पालन पोषण और शिक्षा देने वाली बीना राणा हमारे समाज के लिए उदाहरण हैं। ऐसे लोगों को प्रोत्साहित और सम्मानित किया जाना चाहिए। किसी भी कीमत पर इनका उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। इस संबंध में वे खुद इस मामले में संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे।
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