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चिलचिलाती गर्मी में नहीं मिले डॉक्टर साहब, भटकते रहे मरीज   

अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 07 Jun 2017 11:55 AM IST
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 इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर मंगलवार को शहर के अधिकांश निजी अस्पताल बंद रहे। इससे चिलचिलाती गर्मी में मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी, वे इधर-उधर भटकते रहे या मायूस होकर घर लौट गए। 
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इंडियन मेडिकल एक्ट में संशोधन समेत छह सूत्री मांगों को लेकर शहर के प्राइवेट डॉक्टरों ने सुबह आठ से रात के आठ बजे तक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दीं। शहर के 250 से ज्यादा डॉक्टर सुबह ही दिल्ली में राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह में शामिल होने चले गए, जबकि बाकी ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर डीएम को ज्ञापन देने के बाद देर शाम तक आईएमए भवन में गोष्ठी की। मेरठ में करीब दो हजार प्राइवेट डॉक्टर प्रैक्टिस करते हैं। इनकी रोजाना की ओपीडी 40 हजार से ज्यादा रहती है। रात 8 बजे के बाद ही उन्होंने मरीज देखे। 

पुरकाजी से पहुंची वृद्धा
ईव्ज चौराहे के पास एक अस्पताल में पुरकाजी से अपने दामाद सईद के साथ आंख दिखाने आईं बुजुर्ग महिला रशीदा को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। सईद ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि डॉक्टर साहब आज हड़ताल पर हैं, नहीं तो इतनी दूर से नहीं आते। 24 अप्रैल को रशीदा की आंख बनी थी।

डॉक्टर ने बुलाया, पर नहीं मिले
मवाना बस स्टैंड के पास एक अस्पताल में बिजनौर के राजा का ताजपुर से आईं शीतल को भी मायूस लौटना पड़ा। वह पति कुंवरपाल के साथ आई थीं। शीतल ने बताया कि उन्हें पथरी की समस्या है। सोमवार को फोन पर बात हुई थी तो डॉक्टर साहब ने कहा था कि वे 12 बजे तक मिल जाएंगे, मगर यहां आए तो नहीं मिले। डॉक्टर साहब से फिर समय लेकर आएंगे। 

डर है कहीं और बीमार न हो जाएं
एक निजी डॉक्टर को सरधना के आजादनगर से दिखाने आईं वसीमा नाज ने बताया कि गर्मी में पति के साथ जैसे-तैसे यहां तक आईं थीं। डॉक्टर साहब नहीं मिले हैं। अब फिर वापस जाना है। डर लग रहा है कि गर्मी में और बीमार न हो जाएं। सुबह फोन पर डॉक्टर से बात कर ली होती तो ये परेशानी नहीं होती।  

ये हैं मांगे
क्लीनिकल एस्टेबल्शिमेंट एक्ट 2010 पर पुनर्विचार हो, ताकि कम खर्च में इलाज मिल सके। 
चिकित्सकों व उनके प्रतिष्ठानों पर तोड़फोड़ व हिंसा के लिए देशव्यापी सख्त कानून बने। 
चिकित्सकों की चिकित्सा परामर्श की स्वतंत्रता बनी रहे।
नेशनल मेडिकल कांउसिल का विरोध तथा एमसीआई के पुनर्गठन मेें चिकित्सकों  की शत प्रतिशत भागीदारी हो।
एमबीबीएस के बाद होने वाले एग्जिट एग्जाम पर रोक लगे, जिससे चिकित्सकों का मानसिक शोषण न हो सके।
पीसीपीएनडीटी एक्ट पर पुनर्विचार हो, रेडियोलोजिस्ट चिकित्सकों की कागजी त्रुटियों पर शोषण बंद हो। 

सरकारी अस्पतालों में रही भीड़
निजी डॉक्टरों की हड़ताल के बाद मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भीड़ रही। जहां हर रोज अमूमन 30 से 40 इमरजेंसी केस आते थे। मंगलवार को इनकी तादाद 84 तक पहुंच गई। यहां ओपीडी में भी मरीज की तादाद ज्यादा रही। दूसरी तरफ, जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या रोज के मुकाबले कम रही। यहां ओपीडी 1500 से 1800 के आसपास चल रही थी, वहीं मंगलवार को यहां 1400 ही रही। प्रमुख अधीक्षक पीके बंसल ने बताया कि मरीज पहले ही एक-दो दिन की दवा ज्यादा ले गए थे, इसलिए तादाद कम रही। हालांकि निजी अस्पतालों में इलाज न मिलने वाले कई मरीज यहां आए।

18 अगस्त से होगा आंदोलन
आईएमए मेरठ कोऑर्डिनेटर डॉ. संदीप जैन ने बताया कि मेरठ से चार बसों और दो दर्जन से ज्यादा कारों में डॉक्टर दिल्ली गए। मांगों को लेकर छह सप्ताह का समय दिया गया है। अगर मांगे पूरी नहीं की गई तो 18 अगस्त से देशव्यापी आंदोलन और हड़ताल होगी।


आईएमए की मांगों को समर्थन दिया
नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन की मंगलवार को नीमा भवन में सभा हुई। इसमें बीएएमएस व बीयूएमएस चिकित्सकों ने भी आईएमए की मांगों का समर्थन किया। नीमा चिकित्सकों ने समर्थन पत्र की कॉपी जिलाधिकारी और आईएमए पदाधिकारियों को सौंपी। इस दौरान नीमा अध्यक्ष डॉ. अश्वनी शर्मा, सचिव डॉ. आईपीएस पंवार, पूर्व अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र, पूर्व सचिव डॉ. राकेश शर्मा, उपाध्यक्ष डॉ. यशपाल सिंह, डॉ. अखिलेश शर्मा, डॉ. पीयूष शर्मा, डॉ. मिस्बाह उर रहमान आदि उपस्थित रहे।

सफल रहा बंद : आईएमए अध्यक्ष
आईएमए अध्यक्ष डॉ. वीरोत्तम तोमर ने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का देशव्यापारी सत्याग्रह पूर्ण रूप से सफल रहा। मेरठ से डॉक्टर दिल्ली राजघाट पहुंचे, जहां देशभर से आए चिकित्सक एकत्रित थे। यहां से जुलूस के रूप में इंदिरागांधी इंडोर स्टेडियम पहुंचे, जहां विशाल सभा का आयोजन किया गया।

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