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वाहन चलाते समय हेलमेट हो साथ, घर से ही हो शुरुआत

Sun, 15 Mar 2020 02:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2020 02:00 AM IST
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With helmet while driving, start from home
अमर उजाला बेस कार्यक्रम में आए गणमान्य लोग।
वाहन चलाते समय हेलमेट हो साथ, घर से ही हो शुरुआत
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मेरठ। वाहन दुर्घटना से होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा मौतें हेलमेट न पहनने के कारण होती हैं। इसमें युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। अगर हम एक सुरक्षित और अनुशासित समाज चाहते हैं तो बिना हेलमेट के ड्राइविंग पर रोक लगानी होगी। हर घर के युवा हेलमेट लगाकर वाहन चलाएं इसके लिए जरूरी है कि शुरुआत घर से ही हो। अभिभावक हेलमेट पहनकर वाहन चलाएंगे तो बच्चे भी हेलमेट अवश्य पहनेंगे।
सुरक्षित यातायात सुरक्षित समाज के प्रति युवाओं ने अपने विचार रखे। शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में द बेस संवाद का आयोजन हुआ। ‘सुरक्षित ड्राइविंग के लिए हेलमेट जरूरी’ इस विषय पर शहर के युवाओं ने विचार रखे। विभिन्न वर्गों के युवा इस संवाद में पहुंचे। युवाओं ने कहा कि बिना हेलमेट के दुर्घटना में होने वाली मौत में मेडिक्लेम भी नहीं मिलता। सिर पर हेलमेट पहनना तभी पूरा माना जाएगा जब उसकी स्ट्रिप लॉक की जाए।
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युवाओं ने रखे विचार
सब्सडाईज रेट पर मिलें हेलमेट
सरकार को सब्सडाईज कीमतों पर हेलमेट देने चाहिए। उच्च वर्ग तो महंगा हेलमेट खरीद सकता है, लेकिन निमभन तबके के लोग भी हेलमेट खरीदें इसलिए इन पर छूट देनी चाहिए। - शांतनु, संचालक उद्गम फाउंडेशन
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रेग्युलर चेकिंग जरूरी
हेलमेट के लिए पुलिस को रेग्युलर चेकिंग करनी चाहिए। पुलिस थोड़ी सख्ती बरतेगी तो लोगों में डर आएगा और वो हेलमेट पहनेंगे। धीरज खन्ना, समाजसेवी
पब्लिक ट्रांसपोर्ट करें प्रयोग
जो लोग हेलमेट नहीं लगा सकते उन्हें पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का प्रयोग करना चाहिए। इससे वे स्वयं सुरक्षित रहेंगे और दूसरों को भी सुरक्षित रखेंगे। - सत्यम गर्ग, समाजसेवी
बिना हेलमेट चालू न हों वाहन
अगर हम चाहते हैं कि हर युवा हेलमेट पहनकर ही वाहन चलाए तो वाहनों में ऐसे डिवाइस या सेंसर लगे आने चाहिए कि बिना हेलमेट के वाहन चालू ही न हो। दो पहिया वाहन हेलमेट लगाने पर ही चालू हों, चार पहिया वाहन सीट बेल्ट लगाने के बाद ही चालू हो ऐसा सिस्टम वाहनों में आना चाहिए। - डॉ. मोहन चौधरी, शिक्षक
अधिकांश दुर्घटनाओं का कारण हेलमेट न होना
अस्पतालों की इमरजेंसी में दुर्घटना से मौत के जो मामले आते हैं उसमें 90 फीसद मामले बिना हेलमेट के वाहन चलाने के कारण होने वाली दुर्घटना के होते हैं। इसमें भी अधिकांश घायल, मृतक युवा ही होते हैं। - डॉ. ओसामा, चिकित्सक
छात्रों ने बनाई ऐसी बाइक
जब वाहनों में ही ऐसा सिस्टम हो कि बिना हेलमेट के वाहन स्टार्ट न हो तो मजबूरी में हेलमेट पहनना पड़ेगा। हमारे छात्रों ने ऐसी बाइक बनाई है कि हेलमेट उतरने के पांच मिनट बाद वो बंद हो जाएगी। - गीतांश गुप्ता, रोबोटिक्स विशेषज्ञ
अभिभावक युवाओं को करें शिक्षित
युवा हेलमेट पहने इसमें अभिभावकों की भूमिका भी अहम है। अभिभावकों को जागरूक किया जाए ताकि अभिभावक बच्चों को हेलमेट लगाने के लिए बाधित करें। - रविंद्र कुमार गुप्ता, शिक्षक
बिना हेलमेट न मिले वाहन
वाहन लेते वक्त उसका पंजीयन, नंबर प्लेट अनिवार्य होती है ठीक उसी तरह वाहन लेते समय ही हेलमेट खरीदना भी अनिवार्य कर दिया। बिना हेलमेट के वाहन बिक्री प्रतिबंधित कर दी जाए तो सभी हेलमेट पहनेंगे। - राजेश शर्मा
लगातार की जाए चेकिंग
युवा हेलमेट लगाने के लिए सजग हों। वाहन चलाने से पहले उन्हें हेलमेट लगाने का ख्याल आए इसके लिए लगातार चेकिंग जरूरी है। पुलिस नियमित रूप से हेलमेट की चेकिंग करे और चालान काटे तभी लोगों में खौफ आएगा। डॉ. विनीत कौशिक
इलेक्ट्रिक साइकिल है विकल्प
सुरक्षित यातायात के लिए युवाओं को इलेक्ट्रिक साइकिल या इलेक्ट्रिक बाइक चलाना चाहिए। अभिभावक हैवी व्हीकल की बजाय बच्चों को इलेक्ट्रिक बाइक दिलाएं। हेलमेट जरूर लगाएं - मनीष कुमार
युवाओं की सोच बदलनी होगी
युवाओं क ो जागरुक करना होगा, उन्हें हेलमेट लगाने का महत्व बताना होगा। हेलमेट लगाने से बाल खराब नहीं होते, बल्कि यह सिर की सुरक्षा करता है। पैसे देकर छुड़ाने के बजाय अभिभावक अपने बच्चों की सोच बदलें। - अक्षत गोयल
फिल्मों के माध्यम से लाएं जागरुकता
समाज में किसी संदेश और जागरुकता के लिए फिल्म बेहतरीन माध्यम है। दहेज, भ्रष्टाचार, देशभक्ति, सफाई और टॉयलेट पर फिल्में बन सकती हैं तो हेलमेट का महत्व भी फिल्म से बताया जा सकता है। हेलमेट जिंदगी के लिए कितना जरूरी है इसकी जागरुकता के लिए फिल्म बननी चाहिए। - डॉ. आलोक गोयल
स्कूलों में चले अभियान
स्कूल, कॉलेजों में अभियान चलाकर युवाओं क ो हेलमेट पहनने का महत्व बताया जाए। युवाओं क ो डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाए, नुक्कड़ नाटकों के जरिए उन्हें हेलमेट पहनने का महत्व बताया जाए। - काजल गुप्ता
स्कूलों में एंट्री बैन
बिना हेलमेट के वाहन चलाने वालों में सबसे ज्यादा संख्या स्कूली-कॉलेज के छात्रों की है। नवमीं कक्षा से ही अभिभावक बच्चों को वाहन दे देते हैं और बच्चे बिना हेलमेट के स्कूल, कोचिंग जाते हैं। स्कूलों को इस पर सख्ती बरतते हुए बिना हेलमेट के एंट्री बंद कर देनी चाहिए। तभी युवा हेलमेट लगाएंगे। - अभिषेक सिंघल
सार्वजनिक स्थानों पर भी सख्ती
सिनेमाघर, होटल, रेस्टोरेंट, पार्क, मेले या जो भी सार्वजनिक स्थान हैं वहां बिना हेलमेट के एंट्री ही नहीं मिलना चाहिए। जिला प्रशासन व यातायात पुलिस के सहयोग से ऐसा नियम लागू किया जाए कि बिना हेलमेट आने वालों को इन स्थानों पर एंट्री न दी जाए। - चंचल मलिक, एडवोकेट
डांटकर, समझाकर लागू हो नियम
डांटकर और समझाकर इन दो तरीकों से ही किसी कानून का पालन हो सकता है। अभिभावक स्वयं हेलमेट पहनकर घर से बाहर निकलें तो बच्चे भी हेलमेट पहनना सीखेंगे। - नीतेश चौधरी

वाहन से पहले हेलमेट करें गिफ्ट
अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वो अपने बच्चे को हेलमेट पहनने के लिए मजबूर करें। घर के बड़े हमेशा हेलमेट पहनकर निकलें। साथ ही बच्चे क ो जन्मदिन पर वाहन देने के साथ हेलमेट उपहार में दें। फिर भी बच्चे न मानें तो उन्हें डांटकर हेलमेट लगवाएं। कोमल शर्मा, शिक्षिका
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