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नाबालिग युगल के निकाह को राजी नहीं हुआ परिवार तो उठाया आत्मघाती कदम
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सरधना (मेरठ)। प्रेम-प्रसंग में खुदकुशी करने वाले किशोर और किशोरी एक ही समाज से थे। दोनों ही नाबालिग थे और निकाह करने की जिद पर अड़े थे। परिवार उनके निकाह को राजी नहीं हुआ। दोनों के परिवार नहीं माने। उन्होंने दोनों पर पाबंदी तो लगा दी, मगर उन्हें समझाने में नाकम रहे। इसके चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। इनकी मौत के बाद दोनों परिवार को पछतावा तो है, लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
कुछ ग्रामीणों के मुताबिक दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन जब परिवार और समाज ने इस रिश्ते को नकार दिया तो उन्होंने बिना किसी से बात किए मौत को गले लगाने का रास्ता चुन लिया। उनके जहर खाकर जान देने के बाद परिवार के लोगों को अहसास हुआ कि काश उनको समझा ही लेते, लेकिन अब काफी देर हो चुकी है। परिवार और रिश्तेदारों में दोनों की मौत को लेकर बातचीत होती रही। परिवार ने पुलिस के सामने कबूला भी कि वह उनको समझा नहीं पाए। दोनों नाबालिग थे, इसलिए भी निकाह की इजाजत नहीं दे सकते थे।
पुलिस के मुताबिक दोनों ने एक साथ रहने की बात परिजनों से कही थी, लेकिन वह एक-दूसरे के बिना जान दे सकते है, शायद इसका अहसास परिजनों का नहीं था। बताया जा रहा है कि युगल के परिवार आपस में रिश्तेदार हैं, लेकिन दोनों में कुछ दूरियां थीं। इसके चलते दोनों ने एक साथ बैठकर निकाह की बातचीत भी नहीं की। लोगों का कहना है कि दोनों परिवार एक साथ बैठकर बात कर लेते तो शायद प्रेमी युगल भी उनकी परेशानी समझा पाता और यह कदम न उठाता।
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किशोरावस्था में फैसले होते हैं भावनात्मक
मनोचिकित्सक डॉ. नईम का कहना है कि कम उम्र में लिए गए फैसले अक्सर भावनात्मक होते हैं। समाज व परिवार से टकराव की स्थिति में युवा गलत रास्ते की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चों से संवाद बनाए रखें, उनकी भावनाओं को समझें और प्रेम जैसे मुद्दों पर उन्हें सही मार्गदर्शन दें।
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कुछ ग्रामीणों के मुताबिक दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन जब परिवार और समाज ने इस रिश्ते को नकार दिया तो उन्होंने बिना किसी से बात किए मौत को गले लगाने का रास्ता चुन लिया। उनके जहर खाकर जान देने के बाद परिवार के लोगों को अहसास हुआ कि काश उनको समझा ही लेते, लेकिन अब काफी देर हो चुकी है। परिवार और रिश्तेदारों में दोनों की मौत को लेकर बातचीत होती रही। परिवार ने पुलिस के सामने कबूला भी कि वह उनको समझा नहीं पाए। दोनों नाबालिग थे, इसलिए भी निकाह की इजाजत नहीं दे सकते थे।
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पुलिस के मुताबिक दोनों ने एक साथ रहने की बात परिजनों से कही थी, लेकिन वह एक-दूसरे के बिना जान दे सकते है, शायद इसका अहसास परिजनों का नहीं था। बताया जा रहा है कि युगल के परिवार आपस में रिश्तेदार हैं, लेकिन दोनों में कुछ दूरियां थीं। इसके चलते दोनों ने एक साथ बैठकर निकाह की बातचीत भी नहीं की। लोगों का कहना है कि दोनों परिवार एक साथ बैठकर बात कर लेते तो शायद प्रेमी युगल भी उनकी परेशानी समझा पाता और यह कदम न उठाता।
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किशोरावस्था में फैसले होते हैं भावनात्मक
मनोचिकित्सक डॉ. नईम का कहना है कि कम उम्र में लिए गए फैसले अक्सर भावनात्मक होते हैं। समाज व परिवार से टकराव की स्थिति में युवा गलत रास्ते की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चों से संवाद बनाए रखें, उनकी भावनाओं को समझें और प्रेम जैसे मुद्दों पर उन्हें सही मार्गदर्शन दें।