West UP Weather: राहत भी, आफत भी, प्री-मानसून बारिश ने बदला मौसम, आंधी से फसलों को नुकसान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्री-मानसून बारिश और तेज आंधी ने लोगों को गर्मी से राहत दी, लेकिन आम और लीची की फसलों को नुकसान पहुंचाया। कई क्षेत्रों में पेड़ गिरे और बिजली आपूर्ति भी प्रभावित रही।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्री-मानसून की बारिश और तेज आंधी ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। जहां एक ओर लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं और बारिश ने कई क्षेत्रों में नुकसान भी पहुंचाया। गुरुवार देर रात तक हुई झमाझम बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण सुहावना हो गया।
आंधी और बारिश से बढ़ी परेशानी
तेज हवाओं के चलते कई स्थानों पर पेड़ और उनकी शाखाएं टूटकर सड़कों पर गिर गईं। कुछ क्षेत्रों में बिजली के खंभों को भी नुकसान पहुंचा, जिससे विद्युत आपूर्ति बाधित रही। बारिश के कारण कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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देर रात चली तेज आंधी का सबसे अधिक असर फलदार बागों पर देखने को मिला। आम के बागों में बड़ी मात्रा में फल टूटकर जमीन पर गिर गए। वहीं लीची की फसल पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि तुड़ाई के करीब पहुंच चुकी फसलों के लिए इस प्रकार की तेज हवाएं और बारिश नुकसानदायक साबित हो सकती हैं।
खरीफ फसलों के लिए लाभकारी साबित होगी बारिश
हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों में बढ़ी नमी आगामी खरीफ फसलों की तैयारी के लिए लाभदायक होगी। इससे किसानों को बुवाई की तैयारियों में मदद मिलेगी और भूमि में पर्याप्त नमी बनी रहेगी।
बारिश के बाद अधिकतम तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और लू से परेशान लोगों ने राहत की सांस ली। मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार अगले एक-दो दिनों तक बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना भी है।
बारिश से हुए फायदे
भीषण गर्मी और लू से राहत मिली।
तापमान में गिरावट दर्ज हुई।
वातावरण में धूल और प्रदूषण का स्तर कम हुआ।
खेतों में नमी बढ़ी, जिससे खरीफ फसलों की तैयारी को लाभ मिलेगा।
पशु-पक्षियों और आमजन को राहत मिली।
बारिश से हुए नुकसान
तेज आंधी से कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए।
आम की फसल में फल झड़ने से किसानों को नुकसान हुआ।
लीची के बागों में भी नुकसान की आशंका बढ़ी।
जलभराव से कुछ क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ।
बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।