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Weather Update West UP: सितंबर में दूसरा बार हुई सबसे ज्यादा बारिश, टूटा 15 वर्ष का रिकॉर्ड, ये है वजह
Thu, 19 Sep 2024 11:49 AM IST
डिंपल सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: डिंपल सिरोही
Updated Thu, 19 Sep 2024 11:49 AM IST
सार
भादों के अंतिम दिन लगी बारिश की झड़ी ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। धान की फसल खेतों में गिर गई है और पानी भर गया है।
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बारिश
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लौटते मानसून की बारिश राहत के साथ आफत लेकर बरस रही है। बुधवार को भी सुबह से लेकर शाम तक बूंदाबांदी होती रही। बारिश से मौसम तो खुशनुमा हो गया, लेकिन फसलों के उत्पादन पर इसका प्रभाव पड़ेगा। सबसे अधिक धान की फसल को नुकसान पहुंचेगा। सितंबर माह में बारिश ने 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। सितंबर माह में दूसरी बार सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई है। इस बार 18 दिन में ही 261 मिमि बारिश दर्ज की जा चुकी है।
सितंबर माह में लौटता हुए मानसून की बारिश अब किसानों के लिए आफत की बारिश बन रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस समय किसानों के खेतों में धान की फसल में फूल आ रहे है। बारिश ओर हवा के चलते फूल झड़ रहे है और फसल भारी होने के कारण गिर रही है। बारिश होने के चलते धान की फसल का उत्पादन घटने की संभावना है। सामान्य से अधिक सितंबर माह में बारिश हो चुकी है।
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सितंबर माह में लौटता हुए मानसून की बारिश अब किसानों के लिए आफत की बारिश बन रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस समय किसानों के खेतों में धान की फसल में फूल आ रहे है। बारिश ओर हवा के चलते फूल झड़ रहे है और फसल भारी होने के कारण गिर रही है। बारिश होने के चलते धान की फसल का उत्पादन घटने की संभावना है। सामान्य से अधिक सितंबर माह में बारिश हो चुकी है।
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मंगलवार देर रात मौसम ने करवट बदली और बुधवार सुबह से लेकर शाम तक दिनभर बूदाबांदी होती रही। मौसम खराब होने के चलते सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी रही। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर व अरुण ने बताया कि सामान्य से अधिक बारिश किसानों के लिए संकट लेकर आई है। यह बरसात गर्मी में बोई गई खड़ी फसलों जैसे धान, कपास, सोयाबीन, मक्का और दलहन पर बुरा असर डाल सकती है। यह फसल सितंबर के मध्य तक कटने लगती हैं।
फसल खराब होने से खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि, इससे मिट्टी में नमी अधिक रहेगी और जाड़े के सीजन में बोई जाने वाली फसलों में भी प्रणाम स्वरूप देरी देखने को मिलेगी, जिस आगामी फसलों के उत्पादन में भी कमी देखने को मिलेगी। बताया कि अत्यधिक नमी के कारण फलों और सब्जियों की फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
फसल खराब होने से खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि, इससे मिट्टी में नमी अधिक रहेगी और जाड़े के सीजन में बोई जाने वाली फसलों में भी प्रणाम स्वरूप देरी देखने को मिलेगी, जिस आगामी फसलों के उत्पादन में भी कमी देखने को मिलेगी। बताया कि अत्यधिक नमी के कारण फलों और सब्जियों की फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
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15.8 मिमि दर्ज की गई बारिश
बुधवार सुबह से लेकर शाम तक बारिश होती रही। दिनभर में 15.8 मिमि बारिश दर्ज की गई। कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि अभी 25 सितंबर तक मानसून सक्रिय बना रहेगा। इस बार देरी से मानसून वापस लौट रहा है। संभावना जताई जा रही है कि अक्तूबर के पहले सप्ताह तक मानसून का असर बना रहेगा। मौसम कार्यालय पर दिन का अधिकतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बारिश होने से दिन के तापमान में 8.7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को भी मौसम ऐसा ही बना रहने की संभावना बनी हुई है।
वर्ष बारिश
2009 181
2010 121.9
2011 70.2
2012 141
2013 189.7
2014 101.7
2015 27.6
2016 57.6
2017 212.2
2018 265
2019 116.1
2020 बारिश नही हुई
2021 274.7
2022 208.6
2023 62.6
2024 261
बुधवार सुबह से लेकर शाम तक बारिश होती रही। दिनभर में 15.8 मिमि बारिश दर्ज की गई। कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि अभी 25 सितंबर तक मानसून सक्रिय बना रहेगा। इस बार देरी से मानसून वापस लौट रहा है। संभावना जताई जा रही है कि अक्तूबर के पहले सप्ताह तक मानसून का असर बना रहेगा। मौसम कार्यालय पर दिन का अधिकतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बारिश होने से दिन के तापमान में 8.7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को भी मौसम ऐसा ही बना रहने की संभावना बनी हुई है।
वर्ष बारिश
2009 181
2010 121.9
2011 70.2
2012 141
2013 189.7
2014 101.7
2015 27.6
2016 57.6
2017 212.2
2018 265
2019 116.1
2020 बारिश नही हुई
2021 274.7
2022 208.6
2023 62.6
2024 261