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Meerut News: नवरात्र पूजा के लिए हस्तिनापुर आने वाला था विशु
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर के पुजारी मोहित शर्मा के बेटे विशु की मथुरा-वृंदावन के एक गुरुकुल में पानी के टैंक में डूबने से मौत हो गई। बुधवार देर रात उसका शव हस्तिनापुर पहुंचा। बृहस्पतिवार सुबह गमगीन माहौल में विशु का अंतिम संस्कार किया गया।
परिजनों के अनुसार, विशु गुरुकुल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। मंगलवार रात को गुरुकुल प्रबंधक के कहने पर पानी के टैंक में जाने के दौरान वह हादसे का शिकार हो गया। बुधवार देर रात शव हस्तिनापुर पहुंचने पर बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
विशु की मां ज्योति शर्मा ने बताया कि उनका बेटा नवरात्र के अवसर पर प्रतिवर्ष जयंती माता मंदिर में पूजा-अर्चना करता था। इस बार भी वह नवरात्र की पूजा के लिए बुधवार को हस्तिनापुर आने वाला था। इसके लिए उसने अपना बैग भी पूरी तरह तैयार कर लिया था, लेकिन मंगलवार रात हुए हादसे ने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं।
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बृहस्पतिवार सुबह अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों की आंखें नम रहीं। कस्बे के लोगों ने प्राचीन जयंती माता मंदिर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और दुख की इस घड़ी में उन्हें ढाढ़स बंधाया। मंदिर परिसर में भी दिनभर शोक का माहौल रहा।
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हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर के पुजारी मोहित शर्मा के बेटे विशु की मथुरा-वृंदावन के एक गुरुकुल में पानी के टैंक में डूबने से मौत हो गई। बुधवार देर रात उसका शव हस्तिनापुर पहुंचा। बृहस्पतिवार सुबह गमगीन माहौल में विशु का अंतिम संस्कार किया गया।
परिजनों के अनुसार, विशु गुरुकुल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। मंगलवार रात को गुरुकुल प्रबंधक के कहने पर पानी के टैंक में जाने के दौरान वह हादसे का शिकार हो गया। बुधवार देर रात शव हस्तिनापुर पहुंचने पर बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
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विशु की मां ज्योति शर्मा ने बताया कि उनका बेटा नवरात्र के अवसर पर प्रतिवर्ष जयंती माता मंदिर में पूजा-अर्चना करता था। इस बार भी वह नवरात्र की पूजा के लिए बुधवार को हस्तिनापुर आने वाला था। इसके लिए उसने अपना बैग भी पूरी तरह तैयार कर लिया था, लेकिन मंगलवार रात हुए हादसे ने परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं।
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बृहस्पतिवार सुबह अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों की आंखें नम रहीं। कस्बे के लोगों ने प्राचीन जयंती माता मंदिर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और दुख की इस घड़ी में उन्हें ढाढ़स बंधाया। मंदिर परिसर में भी दिनभर शोक का माहौल रहा।