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बेकाबू हुआ वायरल, अस्पताल हुए फुल
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 05 Sep 2016 02:19 AM IST
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जिला अस्पताल में भर्ती बुखार के मरीज।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में वायरल बेकाबू हो चुका है। मौतों का सिलसिला रुक नहीं रहा है। सरधना में बुखार ने किशोरी और ढाई साल की बच्ची की जान ले ली। वहीं, ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल फुल हो चुके हैं। सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई है। हाल यह है कि एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज चल रहा है। इमरजेंसी से 24 घंटे की जगह दो से चार घंटे में ही मरीजों को वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है।
बुखार में मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है। दोनों अस्पतालों में बिल्डिंग तो बड़ी-बड़ी है लेकिन मरीजों को इलाज करने के लिए बेड नहीं है। सबसे ज्यादा लोड इमरजेंसी पर है। जहां पर 24 घंटे तक मरीज को रखने का नियम है, वहां से दो से चार घंटे में मरीजों को वार्ड भेजा जा रहा है। डॉक्टरों की अपनी मजबूरी है। इमरजेंसी में इतने केस आ रहे हैं कि जगह नहीं है। इलाज का दबाव अलग से है। दोनों अस्पताल के बाल रोग विभाग और महिला वार्ड में ज्यादा प्रेशर है। बाल रोग और महिला वार्ड में एक बेड पर दो-दो मरीज लिटाकर इलाज किया जा रहा है। जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में 17 बेड हैं और मरीज 30 से अधिक हो गए हैं। इमरजेंसी में 27 बेड हैं और 34 मरीजों का इलाज चल रहा है। अधिकारी बुखार के मरीज और व्यवस्था को लेकर नजर रखे हैं।
प्राइवेट अस्पतालों में जगह नहीं
बुखार की वजह से प्राइवेट अस्पताल भी फुल हो गए हैं। अस्पतालों में कमरा मिलना मुश्किल हो गया है। तेज बुखार नहीं उतरने और शरीर पर दाने होने की वजह से लोग भर्ती हो रहे हैं। तेज बुखार और जोड़ों में दर्द के लक्षण ने लोगों को परेशान कर दिया है। बुखार न उतरने पर डॉक्टर भी एक-दो दिन एडमिट होने की सलाह दे रहे हैं। हाल यह है कि शहर के प्राइवेट अस्पतालों में जगह नहीं है।
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संडे को अस्पताल में चली ओपीडी
रविवार को क्लिनिक की छुट्टी होने की वजह से डॉक्टरों ने अस्पतालों में ओपीडी चलाई। बुखार के मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। भर्ती होने की जगह उन्होंने परामर्श अस्पताल में लिया। विजिट पर डॉक्टरों ने अस्पताल में कई घंटे तक ओपीडी की। डॉक्टरों का कहना है तबियत बिगड़ने के लक्षण दिखते ही उपचार शुरू कर दें। आराम करें।
देहात में दो और मौत से कोहराम
मोहल्ला इस्लामाबाद निवासी तोहसीफ की पंद्रह वर्षीय पुत्री इरम को चार दिन पूर्व बुखार की शिकायत हुई थी। स्थानीय स्तर पर इलाज से फायदा न होने पर उसे मेरठ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसकी रविवार सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई। इससे परिजनों में कोहराम मच गया। कस्बे में बुखार के चलते अब तक सात मौत हो चुकी हैं। जिससे लोगों में दहशत है। इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डॉ. राजकुमार सागर ने जानकारी से इनकार किया है।
कहा कि सोमवार को टीम भेजकर जांच कराएंगे। वहीं, सरधना के ही मोहल्ला छावनी में एक सप्ताह के भीतर एक ही परिवार में दो बच्चों की मौत हो जाने से गमों का पहाड़ टूट पड़ा। एक सप्ताह पूर्व अहसान के छह वर्षीय पुत्र फैसल और ढाई वर्षीय पुत्री बुशरा को गले में सूजन और बुखार आने पर मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। पांच दिन पूर्व फैसल की मौत हो गई। इससे पूर्व बुशरा को सीएचसी में भर्ती कराया था। सीएचसी प्रभारी डॉ. राजकुमार ने बुशरा की हालत गंभीर देख शनिवार रात उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां से उसे हालत गंभीर होने पर दिल्ली रेफर किया गया। बुशरा ने रविवार सुबह दम तोड़ दिया। सीएचसी प्रभारी ने बताया कि जांच के बाद ही बीमारी के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
अभी और परेशान करेगा बुखार
जिस तरह बुखार के वायरस की चपेट में लोग आ रहे हैं। इसका असर नवंबर तक रहने की संभावना है। तापमान डाउन जाने पर इससे राहत मिलेगी। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही का कहना है नवंबर तक बुखार का असर रहेगा। जैसे-जैसे मौसम बदलेगा, राहत मिलेगी। तनाव में न आएं। इस साल बुखार के सामान्य केस अधिक हैं। पिछले सालों के मुकाबले बुखार का लेवल साधारण है। सामान्य दवाई और आराम से लोग ठीक हो रहे हैं। एहतियात से बचाव किया जा सकता है।\
डाइट में लिक्विड ज्यादा लें। बारिश का मौसम है तो मच्छरों को आसपास न पनपने दें। पूरी आस्तीन की कमीज पहनें। बच्चों का खास ख्याल रखें। आजकल जो बुखार आ रहा है, उसमें तीन चार दिन बाद शरीर पर दाने भी निकल रहे हैं। यह सामान्य है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इलाज के लिए सब अस्पताल आएं, यह जरूरी नहीं है। बुखार न उतरने और तबियत बिगड़ने पर डॉक्टर भर्ती करने की सलाह देते हैं।
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बुखार में मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है। दोनों अस्पतालों में बिल्डिंग तो बड़ी-बड़ी है लेकिन मरीजों को इलाज करने के लिए बेड नहीं है। सबसे ज्यादा लोड इमरजेंसी पर है। जहां पर 24 घंटे तक मरीज को रखने का नियम है, वहां से दो से चार घंटे में मरीजों को वार्ड भेजा जा रहा है। डॉक्टरों की अपनी मजबूरी है। इमरजेंसी में इतने केस आ रहे हैं कि जगह नहीं है। इलाज का दबाव अलग से है। दोनों अस्पताल के बाल रोग विभाग और महिला वार्ड में ज्यादा प्रेशर है। बाल रोग और महिला वार्ड में एक बेड पर दो-दो मरीज लिटाकर इलाज किया जा रहा है। जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में 17 बेड हैं और मरीज 30 से अधिक हो गए हैं। इमरजेंसी में 27 बेड हैं और 34 मरीजों का इलाज चल रहा है। अधिकारी बुखार के मरीज और व्यवस्था को लेकर नजर रखे हैं।
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प्राइवेट अस्पतालों में जगह नहीं
बुखार की वजह से प्राइवेट अस्पताल भी फुल हो गए हैं। अस्पतालों में कमरा मिलना मुश्किल हो गया है। तेज बुखार नहीं उतरने और शरीर पर दाने होने की वजह से लोग भर्ती हो रहे हैं। तेज बुखार और जोड़ों में दर्द के लक्षण ने लोगों को परेशान कर दिया है। बुखार न उतरने पर डॉक्टर भी एक-दो दिन एडमिट होने की सलाह दे रहे हैं। हाल यह है कि शहर के प्राइवेट अस्पतालों में जगह नहीं है।
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संडे को अस्पताल में चली ओपीडी
रविवार को क्लिनिक की छुट्टी होने की वजह से डॉक्टरों ने अस्पतालों में ओपीडी चलाई। बुखार के मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। भर्ती होने की जगह उन्होंने परामर्श अस्पताल में लिया। विजिट पर डॉक्टरों ने अस्पताल में कई घंटे तक ओपीडी की। डॉक्टरों का कहना है तबियत बिगड़ने के लक्षण दिखते ही उपचार शुरू कर दें। आराम करें।
देहात में दो और मौत से कोहराम
मोहल्ला इस्लामाबाद निवासी तोहसीफ की पंद्रह वर्षीय पुत्री इरम को चार दिन पूर्व बुखार की शिकायत हुई थी। स्थानीय स्तर पर इलाज से फायदा न होने पर उसे मेरठ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसकी रविवार सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई। इससे परिजनों में कोहराम मच गया। कस्बे में बुखार के चलते अब तक सात मौत हो चुकी हैं। जिससे लोगों में दहशत है। इस संबंध में सीएचसी प्रभारी डॉ. राजकुमार सागर ने जानकारी से इनकार किया है।
कहा कि सोमवार को टीम भेजकर जांच कराएंगे। वहीं, सरधना के ही मोहल्ला छावनी में एक सप्ताह के भीतर एक ही परिवार में दो बच्चों की मौत हो जाने से गमों का पहाड़ टूट पड़ा। एक सप्ताह पूर्व अहसान के छह वर्षीय पुत्र फैसल और ढाई वर्षीय पुत्री बुशरा को गले में सूजन और बुखार आने पर मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। पांच दिन पूर्व फैसल की मौत हो गई। इससे पूर्व बुशरा को सीएचसी में भर्ती कराया था। सीएचसी प्रभारी डॉ. राजकुमार ने बुशरा की हालत गंभीर देख शनिवार रात उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां से उसे हालत गंभीर होने पर दिल्ली रेफर किया गया। बुशरा ने रविवार सुबह दम तोड़ दिया। सीएचसी प्रभारी ने बताया कि जांच के बाद ही बीमारी के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
अभी और परेशान करेगा बुखार
जिस तरह बुखार के वायरस की चपेट में लोग आ रहे हैं। इसका असर नवंबर तक रहने की संभावना है। तापमान डाउन जाने पर इससे राहत मिलेगी। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही का कहना है नवंबर तक बुखार का असर रहेगा। जैसे-जैसे मौसम बदलेगा, राहत मिलेगी। तनाव में न आएं। इस साल बुखार के सामान्य केस अधिक हैं। पिछले सालों के मुकाबले बुखार का लेवल साधारण है। सामान्य दवाई और आराम से लोग ठीक हो रहे हैं। एहतियात से बचाव किया जा सकता है।\
डाइट में लिक्विड ज्यादा लें। बारिश का मौसम है तो मच्छरों को आसपास न पनपने दें। पूरी आस्तीन की कमीज पहनें। बच्चों का खास ख्याल रखें। आजकल जो बुखार आ रहा है, उसमें तीन चार दिन बाद शरीर पर दाने भी निकल रहे हैं। यह सामान्य है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इलाज के लिए सब अस्पताल आएं, यह जरूरी नहीं है। बुखार न उतरने और तबियत बिगड़ने पर डॉक्टर भर्ती करने की सलाह देते हैं।