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गजब है यूपी के जिलों का हाल, आठ सालों से 24 गांवों को शुद्ध पेयजल का इंतजार

Fri, 21 Feb 2020 12:33 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Fri, 21 Feb 2020 12:33 AM IST
सार

यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में ग्रामीणों को पीने के लिए शुद्ध जल उपलब्ध कराने को 24 गांवों में चल रही 91.13 करोड़ की योजनाएं आठ साल से अधर में लटकी है।

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Villagers of 24 villages have been waiting for pure drinking water for eight years in Muzaffarnagar
अधूरा पड़ा टंकी का निर्माण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में ग्रामीणों को पीने के लिए शुद्ध जल उपलब्ध कराने को 24 गांवों में चल रही 91.13 करोड़ की योजनाएं आठ साल से अधर में लटकी है। जल निगम के अधिकारी योजनाओं पर खर्च तो बढ़ाते जा रहे हैं, लेकिन योजनाओं को पूरा करने पर कोई ध्यान नहीं है। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना में नए गांव तो शामिल हो रहे हैं और बजट भी आ रहा है, लेकिन पुरानी योजनाओं को पूर्ण करने को लेकर विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। 

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प्रदूषण नियंत्रण विभाग की जांच में कई गांवों के पानी को जहरीला पाया गया था। इस पानी को पीने योग्य नहीं मानकर ऐसे सभी गांवों में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना में पानी की टंकी लगाने को मंजूरी मिली थी। वर्ष 2012 में योजना स्वीकृत हुई और टेंडर छोड़ दिए गए। विभाग के अफसरों के कारण नतीजा यह हुआ कि जिन परियोजनाओं को दो साल में पूरा हो जाना चाहिए था, ये आठ साल में भी पूरी नहीं हो पाई। जिन गांवों में योजना अधूरी पड़ी हैं, इनमें बुढ़ाना तहसील का रियावली नंगला, कसेरवा, रसूलपुर जाटान, बसधाडा सदर तहसील का बसेड़ा, पीनना, नूनाखेडा, बलवाखेडी, कुल्हेडी शामिल हैं। खतौली तहसील का हुसैनपुर बोपाडा, मंसूरपुर, चंदसीना और जानसठ तहसील का मोरना, भोपा, संभलहेडा, महलकी, जौली, तिसंग हैं। नागर इकाई के अंतर्गत जसोई, सरवट, खुड्डा, सांझक, दधेडूखुर्द, खाईखेडी में टंकी बनाई जा रही है। इन 24 परियोजनाओं की लागत 91 करोड़ 13 लाख है। केवल चार योजनाओं में ही 90 प्रतिशत काम पूरा बताया जा रहा है। बड़ी बात यह है कि टंकी से ग्रामीणों को एक बूंद भी पानी की नसीब नहीं हो रही है।
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एक्सईएन को पता ही नहीं, योजना अधूरी भी
जल निगम के अधिशासी अभियंता पीके अग्रवाल को यह मालूम हीं नही है कि 24 गांवों में परियोजना अधूरी पड़ी है। जब गांवों के नाम बताए गए तो बोले, जून माह तक सभी गांवों में काम पूरा करा देंगे। उन्होंने दावा किया कि पैसे की कमी नहीं है, जल्द ही काम पूरे कराएंगे।

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428 गांवों में टंकी लगाने के प्रस्ताव भेजे
केंद्र सरकार ने 2024 तक हर घर में टंकी का पानी देने की बात कही है, ऐसे में सभी गांवों का प्रस्ताव जल निगम ने बनाकर भेजा है। जिले से 428 गांवों में टंकी लगाने के लिए 650 करोड़ के प्रस्ताव भेजे गए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि सात साल में 24 टंकी का निर्माण नहीं करा पाने वाला जल निगम चार साल में 428 गांवों में कैसे कार्य पूरा कराएगा।

रखरखाव के नाम पर करोड़ों का खेल
जल निगम की जो योजनाएं संचालित हैं, उनके रखरखाव और संचालन को भारत सरकार योजना का 20 प्रतिशत प्रतिवर्ष देती है। इस पैसे को लेकर जल निगम में हर साल बड़ा खेल होता है। विभागीय अधिकारी पैसे में गोलमाल करते हैं। इसके चलते संचालित योजनाएं भी प्रभावित रहती हैं। विभाग इस पैसे को कभी भी सार्वजनिक नहीं करता है और न ही इसका ऑडिट हो रहा है। अफसर इसके सवाल पर चुप्पी साध जाते हैं।  

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