महंगाई की मार: मिर्च हुई और तीखी, खीरा व लाल टमाटर भी पहुंच से बाहर, थोक से लेकर फुटकर तक बढ़े सब्जियों के दाम
बारिश के बाद पश्चिमी यूपी में सब्जियों के दाम अचानक आसमान छू रहे हैं। बाजार में थोक से लेकर फुटकर तक सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं। खीरा जहां 60 रुपये किलो बिक रहा है तो वहीं टमाटर के दाम 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून की पहली बारिश का असर सीधा सब्जियों के दामों पर पड़ा है। मेरठ, मुजफ्फरनगर समेज ज्यादातर शहरों में सब्जियों के दामों ने अचानक आसमान छू लिया है। बारिश के बाद से टमाटर के दाम 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए तो लौकी 50 रुपये किलो बिक गई, भिंडी 80 रुपये किलो बिक रही है। 20 दिन पहले जो सब्जियों के दाम आधे से भी कम थे। वहीं बताया जा रहा है कि बारिश के बाद खेतों में सब्जी की फसल के खराब होने से अचानक दामों में वृद्धि हुई।
मानसून आते ही हरी सब्जियों ने महंगाई की तरफ रुख बदल दिया है। जहां हिमाचल में भारी बारिश के चलते टमाटर महंगाई में लाल हो गया है। वहीं मेरठ में हिमाचल का यह टमाटर धूप में 80 से 90 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि फुटकर में 120 से 125 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है। बता दें कि मार्च-अप्रैल और मई महीने में स्थानीय टमाटर का थोक भाव 2 से पांच रुपये किलो था। हरी सब्जियों में महंगाई टमाटर पर ही नहीं है, बल्कि लौकी, करेला, भिंडी, बैंगन, परिमल आदि सभी सब्जियां महंगाई की आग में जलनी शुरू हो गई हैं।
मेरठ की नवीन सब्जी मंडी एसोसिएशन के प्रधान पदम सिंह सैनी का कहना है कि मेरठ में टमाटर की आपूर्ति हिमाचल से हो रही है। एक सप्ताह से हिमाचल में अधिक बारिश होने के कारण मेरठ नवीन मंडी में टमाटर की आपूर्ति कम हो गई है। मेरठ में प्रतिदिन 25 किलो वजन की तीन से चार हजार कैरेट टमाटर की आपूर्ति होती थी। यह अब घटकर 800 करेट रह गई है। यही कारण है कि टमाटर के दाम पर भारी तेजी आई है।
इनका कहना है कि बरसात के समय हरी सब्जियों की उपज कम हो जाती है, खासकर बेल वाली सब्जियों के दाम भी बढ़ने शुरू हो जाते हैं। जो लौकी पिछले सप्ताह मंडी में 12 रुपये किलो थोक में बिक रही थी वह अब 20 से 40 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। इसी प्रकार करेला रुपये 8 से बढ़कर 15 रुपये प्रति किलो हो गया है। पत्ता गोभी जो 6 रुपये प्रति किलो थोक में बिक रही थी अब वह 10 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। तोरई ₹30 से बढ़कर ₹50 किलो थोक में बिक रही है।
इसी प्रकार भिंडी ₹20 किलो से बढ़कर 40 और ₹50 प्रति किलो थोक में हो गई है। मशरूम 50 से ₹60 प्रति किलो थोक में बिक रही थी वह मंगलवार को नवीन सब्जी मंडी में 80 से ₹90 किलो बिकी है। अदरक पिछले एक महीने से ₹300 किलो ही बिक रहा है। अगर इन सब्जियों के फुटकर रेट की बात करें तो प्रति किलो पर दोगुना मुनाफा लिया जा रहा है।
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बारिश का असर सब्जियों पर
सब्जी मंडी में चार दशक से सब्जी की बिक्री का कार्य करने वाले विक्रेताओं का कहना है कि बारिश से किसानों की सब्जियों की फसल पर असर हुआ है। बाजार में इस समय अधिकतम सब्जी बाहर की है।
लगातार बारिश से सब्जियों को बचाने में समस्या आती है, सब्जियां जल्दी खराब होने लगती हैं। बरसात के बाद सब्जी महंगी तो हर साल होती है, लेकिन लॉकल की लौकी, टमाटर तोरी, खीरा, धनिया, पुदिना इनमें महंगाई नहीं होती थी। इस बार खेत में खराब हो जाने से यह हालात बने हैं।
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मुजफ्फरनगर के साउथ सिविल लाईन की मनीषा सिंघल का कहना है कि 10 दिन पहले तक 50 रुपये की सब्जी में घर का पूरे दिन का काम चल जाता था, अब 200 रुपये में भी काम नहीं चल पा रहा है।
नईमंडी की आभा जैन का कहना है कि अचानक सब्जियों के दाम बढ गए हैं। सब्जी तो बाजार में बहुत आ रही है। लेकिन खरीदने में आम आदमी का दम ही निकल जाए। बरसात के बाद कुछ दाम बढ जाते थे पर इतनी महंगी पहली बार हुई है। 40 रुपये किलो से कम तो एक भी सब्जी नहीं है।