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यूपी: योगी सरकार ने दी अनुमति, संजय वन में फिर बनाया जा सकता है मिनी चिड़ियाघर, पढ़िए खास रिपोर्ट

Tue, 22 Jun 2021 05:45 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 22 Jun 2021 05:45 PM IST
सार

प्रदेश सरकार ने मेरठ में मिनी चिड़ियाघर बनाने की अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि संजय वन में ही फिर से मिनी चिड़ियाघर मनाया जा सकता है।

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Uttar Pradesh state government has given permission to build a mini zoo in Meerut
फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala

विस्तार

चिड़ियाघर का नाम लेते ही बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, लेकिन मेरठ और आसपास जिलों के अधिकतर बच्चे चिड़ियाघर में जानवरों को देख ही नहीं पाते हैं। ऐसे में मेरठ में चिड़ियाघर बनने से वन्य जीवों के बारे में न सिर्फ यहां के छात्र-छात्राओं को जानने को मिलेगा, बल्कि पर्यटन की स्थिति से मेरठ के लिए ये बड़ी सौगात होगी। शासन से मिनी चिड़ियाघर बनाए जाने की हरी झंडी मिलने के बाद वन विभाग ने रिठानी ब्लॉक में जगह तलाश ली है। संजय वन, गगोल और खेड़ा बलराम में वन विभाग के ब्लॉक को चिह्नित किया गया है। सबसे ज्यादा मुफीद जगह संजय वन है। यहां पर पहले भी मिनी चिड़ियाघर हुआ करता था। 

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उत्तर प्रदेश सरकार ने मेरठ में मिनी चिड़ियाघर खोलने की अनुमति दे दी है। हालांकि अभी इस संबंध में वन विभाग के पास लिखित आदेश नहीं आए हैं। डीएफओ ने बताया कि सबसे सही जगह इसके लिए संजय वन हो सकती है, क्योंकि यहां पर पहले भी मिनी चिड़ियाघर था। इसके बाद बाकी दो स्थान गगोल और खेड़ा बलराम में हैं। तीनों जगह रिठानी वन ब्लाक में ही हैं। 
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दिल्ली रोड स्थित 12 एकड़ में फैले संजय वन को 1982 में चेतना केंद्र के रूप में बसाया गया था। यहां पर 70 से अधिक प्रजाति के पक्षी हैं। पेड़-पौधों की सैकड़ों प्रजातियां हैं। जानवरों की बात करें तो यहां पर नीलगाय का बड़ा झुंड है। खरगोश, लोमड़ी एवं अजगर जैसे जीवों की बड़ी शृंखला है। नक्षत्र वाटिका बनाई गई है। पार्क में झूला लगा है। नर्सरी है। लगभग 65 फीट ऊंचा यह मेरठ दर्शन स्तंभ (वॉच टावर) कारगिल शहीद मनोज तलवार को समर्पित है। यहां पर 1992 तक मिनी चिड़ियाघर भी था। उसमें सैकड़ों प्रकार के पक्षी, हिरन, खरगोश, लोमड़ी और यहां तक की एक विशालकाय मगरमच्छ भी था।

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संजय वन में मिनी चिड़ियाघर बनाए जाने के लिए ज्यादा धनराशि खर्च करने की जरूरत नहीं है। गगोल और खेड़ा बलरामपुर में वन विभाग के पास जमीन तो है, लेकिन वहां बहुत कुछ संसाधन जुटाने पड़ेंगे। संजय वन के गेट पर रैपिड का स्टेशन भी बनने जा रहा है, ऐसे में पर्यटन के लिहाज से ये सबसे सही जगह रहेगी। मिनी चिड़ियाघर में कौन-कौन से जानवर रखे जाएंगे, इसका निर्धारण केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण करेगा। इसमें छोटे विभिन्न प्रजाति के जानवरों को रखने की अनुमति दी जाती है। 

आदेश मिलते ही काम होगा शुरू
अभी लिखित में हमारे पास शासन से पत्र नहीं आया है, लेकिन हमनें रिठानी ब्लाक में तीन जगहों पर चिड़ियाघर बनाने के लिए जगह चिह्नित की है। इसमें संजय वन, गगोल और खेड़ा बलरामपुर के जंगल में वन विभाग के ब्लाक हैं। संजय वन में पहले भी जानवर रहा करते थे, ऐसे में ये सबसे अच्छी जगह हो सकती है। - राजेश कुमार, डीएफओ

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