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कश्मीर में होने वाली पत्थरबाजी का यूपी से नहीं कनेक्शन, अब सामने आई ये बड़ी बात
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 24 Jun 2018 11:55 AM IST
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फाइल फोटो
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बागपत और सहारनपुर के युवकों की कश्मीर में सेना के सर्च आपरेशन के दौरान पत्थरबाजी के लिए उकसाने की कहानी झूठी थी। सिलाई फैक्ट्री से गुपचुप तरीके से भागने के बाद लगे 22 लाख का कपड़ा चोरी के आरोप से बचने को इन युवकों ने यह मनगढ़ंत कहानी बनाई। नकुड़ और ननौता के युवक पूछताछ में सब कुछ सच-सच बताते चले गए। सहारनपुर पुलिस ने दूसरे दौर की बातचीत के बाद शासन को भेजी रिपोर्ट में पत्थरबाजी की बात को सिरे से खारिज किया हैं।
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सिलाई का काम करने कश्मीर के पुलगामा जिले के लस्सीपुरा फैक्ट्री से भागकर आए बागपत और सहारनपुर के युवकों ने फैक्ट्री संचालक पर कश्मीर में सेना पर होने वाली पत्थरबाजी को उकसाने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी। पुलिस से लेकर खुफिया एजेंसी तक सक्रिय हो गई थी। पहले तो यह अपने बयान पर अडिग थे, मगर क्रास सवालों में दोनों जिलों में हुए बयानों में अंतर पाया गया। इसी आधार पर बृहस्पतिवार को सहारनपुर पुलिस ने नकुड़ और ननौता के युवक पंकज और बबलू ने दूसरे दौर की बातचीत की। देर रात तक पूछताछ का सिलसिला चलता रहा। बताया कि बागपत निवासी नसीम के बुलावे पर वह होली के दस दिन बाद ट्रेन से कश्मीर चले गए थे, जहां पर उन्होंने एक सिलाई फैक्ट्री में काम शुरू किया। डेढ़ माह तो सब कुछ सही रहा। बीच में नकुड़ और मुजफ्फरनगर के दो साथी भुगतान कर लौट आए।
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सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में बताया कि इसके बाद फैक्ट्री मालिक उनसे सफाई आदि कराने लगा। मानसिक रूप से प्रताड़ित होने के बाद वह सब चुपके से फैक्ट्री से भाग आए। उन्हें घर आकर पता चला कि फैक्ट्री मालिक ने उन पर 22 लाख रुपये का कपड़ा चोरी करने का आरोप लगा रहा है, जबकि वह कोई कपड़ा नहीं लाए थे। नसीम के बुलावे पर 18 जून को वह बड़ौत पहुंचे, जहां पर नसीम ने फैक्ट्री मालिक पर दबाव बनाने के लिए सेना पर पत्थरबाजी कराने की योजना बनाई। नसीम ने ही मीडिया के सामने पत्थरबाजी वाली कहानी बताई। नसीम लगातार उन पर इसी बयान पर अडिग रहने का दबाव बनाता रहा। हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ। वह तो चोरी के आरोप से डर गए थे, जिस कारण पत्थरबाजी के उकसाने संबंधी बयान दिया था।
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