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राम भरोसे चल रहे पश्चिमी यूपी के 132 स्कूल, देश के 'भविष्य' से हो रहा खिलवाड़

Wed, 29 Aug 2018 04:54 PM IST
रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 29 Aug 2018 04:54 PM IST
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UP, there are only 196 teachers in 132 primary schools of Meerut division
सरकारी स्कूलों का हाल - फोटो : अमर उजाला

मेरठ महानगर के 132 स्कूलों में पंजीकृत 13102 छात्रों के भविष्य का जिम्मा 196 शिक्षक और 210 शिक्षामित्रों के ऊपर है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्राइमरी स्कूलों में 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए लेकिन शहर के स्कूलों में ये आंकड़ा प्रति शिक्षक 67 छात्र बैठ रहा है।

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बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार मेरठ शहरी क्षेत्र में कुल 132 प्राइमरी स्कूल हैं। जिनमें 13,102 छात्र नामांकित हैं। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत इन छात्रों को पढ़ाने के लिए 436 शिक्षकों की आवश्यकता है लेकिन स्कूलों में केवल 196 बेसिक नियमित है। 210 शिक्षामित्र को भी तैनाती दी गई, लेकिन इसके बावजूद भी शिक्षक कम हैं। कुछ स्कूलों में तो एक या दो शिक्षकों के भरोसे 100 से भी अधिक छात्रों के भविष्य की जिम्मदारी है। नगर शिक्षा अधिकारी एसके गिरी के अनुसार शहरी क्षेत्र के स्कूलों में कुल मिलाकर 240 शिक्षकों की कमी है। शिक्षा मित्रों के माध्यम से इस कमी को दूर करने का प्रयास किया गया है लेकिन इसके बाद भी शिक्षक कम है।
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472 छात्रों पर 4 शिक्षक
प्राइमरी कन्या विद्यालय प्रह्लादनगर के स्कूल में कुल 472 छात्र पंजीकृत हैं, जबकि विभाग की ओर से केवल चार सहायक अध्यापक और आठ शिक्षामित्रों को तैनाती दी गई है। नियम के अनुसार यहां 15 शिक्षकों की आवश्यकता है। इंचार्ज प्रधानाध्यापिका अदीबा ने बताया कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी है।

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एक साथ पढ़ाई जाती है दो-दो क्लास
प्राइमरी स्कूल बालक प्रह्लादनगर स्कूल में कुल 313 छात्र पंजीकृत हैं। इसमें दो शिक्षक और दो शिक्षामित्र भी तैनात है। जबकि नियम अनुसार स्कूल में कुल 10 शिक्षक होने चाहिए। सहायक इंचार्ज सैय्यद मौ.अकबर ने बताया कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी है। एक शिक्षक के भी आकस्मिक अवकाश पर चले जाने से समस्या और भी गहरा जाती है। शिक्षकों की कमी की वजह से एक साथ दो-दो क्लास भी पढ़ानी पड़ती हैं।

काफी समय से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो रही। शासन स्तर से ही इस समस्या का समाधान संभव है। बेहतर शिक्षा का प्रयास है।- सतेंद्र कुमार, बीएसए मेरठ

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