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यूपी के छात्र ने बनाई दुनिया की सबसे ऊंची साइकिल, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराया नाम

Thu, 04 Apr 2019 05:37 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 04 Apr 2019 05:37 PM IST
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UP student made worlds Highest bicycle in saharanpur, recorded name in Limca Book of Records
दीपांश तोमर अपनी बनाई दुनिया की सबसे ऊंची साइकिल के साथ - फोटो : अमर उजाला
यूपी के सहारनपुर में दीपांश तोमर ने दुनिया की सबसे ऊंची (26 फुट) साइकिल बनाकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया है। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से भेजा गया सर्टिफिकेट दीपांश को बुधवार को ही प्राप्त हुआ है। इसके अलावा दीपांश ने 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में भी आवेदन किया हुआ है। 
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शहर के जनता रोड स्थित गोविंद विहार निवासी दीपांश तोमर उत्तराखंड विश्वविद्यालय देहरादून में बीएससी कृषि के द्वितीय वर्ष का छात्र है। दीपांश ने बताया कि मार्च 2018 में मैं अपने लैपटॉप पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स देख रहा था, जिसमें पता चला कि दुनिया की सबसे ऊंची साइकिल बनाने का रिकॉर्ड कैलीफोर्निया के व्यक्ति के नाम है, जिसने 22 फुट ऊंची साइकिल बनाई थी। 
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इसके बाद उसे लगा कि वह 22 फुट से अधिक ऊंची साइकिल बनाई जा सकती है। दीपांश ने दोस्तों और परिजनों से गिनीज और लिम्का बुक में नाम दर्ज कराने के लिए 26 फुट ऊंची साइकिल बनाने की बात रखी। दोस्तों और परिजनों ने दीपांश की सोच का समर्थन किया। 
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इसके बाद दीपांश साइकिल बनाने में जुट गया। दीपांश ने ढाई माह के प्रयास से सफलता पाई। इतना ही नहीं, दीपांश ने साइकिल को अपने विश्वविद्यालय परिसर में चलाकर भी दिखाया। विश्वविद्यालय के कृषि विभाग ने उन्हें सम्मानित किया। 

इसके बाद दीपांश ने साइकिल चलाने की सीडी और फोटो गिनीज बुक, लिम्का बुक और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के लिए भेजे। सबसे पहले इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सर्टिफिकेट मिला। 

अब तीन अप्रैल 2019 को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से भी सर्टिफिकेट दीपांश के पास पहुंचा है। अभी गिनीज बुक से सर्टिफिकेट आना बाकी है। दीपांश की सफलता से पिता उपेंद्र तोमर और मां रीना तोमर बेहद खुश हैं। 

दूसरी बार में मिली सफलता 
दीपांश ने गिनीज और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की शर्तों के अनुरूप मार्च में ही साइकिल बनाने का काम शुरू किया। पहली बार जो साइकिल बनी उसका वजन डेढ़ क्विंटल से अधिक था। 

जब दीपांश ने साइकिल को चलाने का प्रयास किया तो अधिक वजन होने की वजह से साइकिल के पहिए मुड़ गए। इसके बाद दीपांश ने साइकिल का फ्रेम लोहे की जगह एल्यूमीनियम का बनाया। साइकिल का वजन 90 किलोग्राम है। साइकिल की सीट 22 फुट ऊंची है, जिस पर बैठने के लिए सीढ़ी का सहारा लेना पड़ता है।

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