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यूपी पुलिस के 20 जांबाज घोड़ों को नहीं मिल रहे घुड़सवार, दो की कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

Sat, 20 Oct 2018 06:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 20 Oct 2018 06:29 PM IST
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UP Police Horses resting in stable due to Not Getting Horse riders in meerut
मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला

घोड़े को अगर दौड़ाना बंद कर दें तो वो किसी काम का नहीं रहता। जितना वो दौड़ता है उतनी ही उसकी क्षमता बढ़ती है, लेकिन इसे अनदेखी कहें या फिर घुड़सवारों की कमी। वजह जो भी हो, लाखों रुपये कीमत के 20 जांबाज घोड़े पुलिस लाइन में खड़े-खड़े सुस्ता रहे हैं। इन पर सवारी करने वाले पुलिस वाले ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। जिसकी वजह से इन घोड़ों का वजूद कम होता दिख रहा है। अब एसपी लाइन ने उच्च अधिकारियों और शासन को घुड़सवारों के लिए पत्र लिखा है।

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पुलिस लाइन स्थित अश्वशाला में इस समय 20 घोड़े हैं। स्टाफ में एक सब इंस्पेक्टर और छह कांस्टेबल हैं। इनमें कांस्टेबलों की दिन और रात के अनुसार ड्यूटी रहती है। इन 20 घोड़ों में से उज्जवल और कमांडो की गिनती शानदार घोड़ों में हैं। एक घोड़े की कीमत दो- दो लाख रुपये से भी अधिक है। पुलिस लाइन में 26 जनवरी की परेड में प्रथम, द्वितीय और तृतीय कमांडर घोड़े पर सवार होकर ही कमांड करते हैं।
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पुलिस लाइन में आरआई, सीओ, एडिशनल एसपी और आईपीएस अधिकारी भी त्यौहार, भीड़भाड़ और दंगा नियंत्रण जैसी स्थिति में घोड़ों पर गश्त करते हैं। पुलिस लाइन में दो ही घुड़सवार ऐसे हैं जो घोड़ों को ट्रेंड कर सकते हैं। ऐसे में अधिकांश घोड़े लंबे समय से सुस्ता रहे हैं। जिनके कारण उनके खुर बढ़ने से घोड़ा बेकार होने लगता है। घोड़े को लंबे समय आराम मिलने पर वह उसकी चाल कम हो जाती है और सुस्ताने लगता है।

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UP Police Horses resting in stable due to Not Getting Horse riders in meerut
मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला

यह कहते हैं एक्सपर्ट
पुलिस के एक अधिकारी का कहना है कि वह पिछले करीब 20 साल से पुलिस में घोड़ों से शहर और संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त कर चुके हैं। चाहे गणतंत्र दिवस की परेड हो या फिर पुलिस के भव्य कार्यक्रमों का आयोजन। उनमें घुड़सवार पुलिस की शान अलग ही होती है। प्रत्येक घोड़े को औसतन जितनी प्रैक्टिस कराई जाएगी उसकी चाल उतनी ही खुलेगी। यदि बिना चले घोड़े के पैर के खुर बढ़ जाते हैं तो फिर उसकी चलने की क्षमता भी कम होने लगती है।

प्रत्येक दिन में औसतन चार से छह किमी तक जरूर चलाया जाना चाहिए। घोड़े को खुराक जिस नियम से दी जाती है उसी के अनुसार घोड़े का पसीना निकलना भी जरूरी है। पूर्व में पुलिस लाइन से हरिद्वार और इलाहाबाद कुंभ मेले के अलावा गढ़ गंगा मेले में ड्यूटी के लिए घोड़े भेजे जाते थे, लेकिन घुड़सवारों की कमी से मुसीबत बन गई है।

काठियावाड़ी नस्ल के हैं घोड़े

एसपी लाइन संजीव बाजपेयी का कहना है कि पुलिस लाइन में जो घोड़े हैं वह काठियावाड़ी नस्ल के हैं। घोड़ों की यह नस्ल सबसे अच्छी मानी जाती है। इस नस्ल के घोड़ों की ऊंचाई करीब डेढ़ मीटर से लेकर 160 सेंटीमीटर तक होती है। 

खुराक :एक घोड़े को प्रत्येक दिन में एक किग्रा चना, दो किग्रा जौ, एक किग्रा गेहूं का चौकर, सीजन की घास दी जाती है। 18 किग्रा सूखी घास या फिर 25 किग्रा हरी घास दी जाती है।  

घोड़ों की संख्या की तुलना में घुड़सवारों की कमी है। इस मामले में उच्च अधिकारियों को अवगत कराते हुए शासन को भी पत्र लिखा गया है। घोड़ों की देखरेख में कोई कमी नहीं की जा रही है। - संजीव बाजपेयी, एसपी लाइन/ एसपी ट्रैफिक

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