अब नए तरीके से अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, बीट कांस्टेबल को एप से मिलेगा टास्क
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पुलिस महकमे की मुख्य कड़ी माने जाने वाले बीट कांस्टेबल को अब आला अधिकारी मोबाइल एप के माध्यम से टास्क देंगे। एप से जहां कांस्टेबल की लोकेशन का पता चलता रहेगा तो कांस्टेबल अपने टास्क से अपडेट करता रहेगा। इस व्यवस्था से अपराधियों की सही तरह से निगरानी हो पाएगी जिससे अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी। साथ ही कांस्टेबल तेजी से काम भी कर पाएंगे।
ब्रिटिश काल से मजबूत व्यवस्था
ब्रिटिश काल में बीट कांस्टेबल की मजबूत व्यवस्था बनाई गई थी। उस समय खुफिया तंत्र इतना प्रभावी नहीं था इसलिए बीट कांस्टेबल पर ही पुलिसिंग का दारोमदार रहता था। बीट कांस्टेबल अपने कार्यक्षेत्र की हर हरकत पर नजर रखता था और समय-समय पर उसकी सूचना अफसरों को उपलब्ध कराता था।
यही नहीं, क्षेत्र में कितनी दुकानें हैं? दुकान का मालिक कौन है? कौन व्यक्ति क्षेत्र का दबंग है? किस घर में कितने लोग रहते हैं। इस तरह की छोटी-छोटी जानकारी भी वह रखता था। अधिकांश यह भी होता था कि किसी साजिश का पहले ही भंडाफोड़ हो जाता था। बीट कांस्टेबल पर अपने क्षेत्र की मजबूत जिम्मेदारी होती थी। लेकिन जैसे-जैसे बदलाव आते गए, बीट कांस्टेबल का काम मूल उद्देश्यों से भटकता चला गया।
चौकी क्षेत्र पर व्यवस्था
एक थाने के अंतर्गत जितनी चौकियां आती हैं, उनके आधार पर ही बीट कांस्टेबल की तैनाती होती है। एक समय था जब बीट कांस्टेबल घर-घर जाकर सूचना जुटाता था। बाकायदा इसका बीट रजिस्टर बनता था और पूरे क्षेत्र का विवरण उसमें दर्ज किया जाता था। लेकिन पिछले 10 से 15 वर्षों में काम का दबाव ऐसा बढ़ा कि बीट कांस्टेबल मुख्य जिम्मेदारी ही भूल गया। वहीं बीट कांस्टेबल के अपने उद्देश्यों से भटकने की एक बड़ी वजह स्टाफ की कमी भी रही है। लगातार थानों से स्टाफ कम होता रहा। लेकिन उनके अनुसार भर्ती नहीं हो सकी।
बीट एप से मिलेगी धार
हाईटेक पुलिसिंग की दिशा में शासन ने हर बीट कांस्टेबल को एप से लैस करने की योजना बनाई है। बीट नाम का यह एप हर बीट कांस्टेबल के मोबाइल फोन में होगा। इस एप में दिनचर्या के हिसाब से टास्क निर्धारित किए गए हैं, जिन पर रोजाना काम करना होगा। खास बात यह है कि इससे बीट कांस्टेबल लापरवाही नहीं बरत पाएगा। वह ड्यूटी प्वाइंट पर है या नहीं, अधिकारी कहीं से भी यह जान सकेंगे।
क्षेत्र में किसी तरह की गतिविधि अगर बीट कांस्टेबल को दिखाई देती है तो वह मौके से ही फोटो खींचकर उसकी सूचना अधिकारियों को देगा। उसकी एक सूचना थाना प्रभारी से लेकर एसएसपी तक पहुंचेगी। बीट क्षेत्र में कहीं जघन्य अपराध होता है तो इसकी सूचना एप के माध्यम से एडीजी जोन तक पहुंच जाएगा। पिछले दिनों इस एप का ट्रायल किया गया, जो सफल रहा। जल्द ही एप को लागू किया जा रहा है।
इसलिए जोड़ी गईं आधुनिक सुविधाएं
बीट कांस्टेबल पर काम का दबाव बढ़ा है, इसे नकारा नहीं जा सकता। लेकिन वह आज भी अपनी बीट बुक पर काम करते हैं। समय-समय पर यह बुक चेक की जाती हैं। हालांकि पहले जैसी परफेक्शन नहीं मिल पाती। इस कमी को पूरा करने के लिए आधुनिक सुविधाएं विभाग से जोड़ी गई हैं। -अखिलेश नारायण सिंह, एसपी सिटी
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