यूपी: सहायक विकास अधिकारी के बेटे ने लाइसेंसी पिस्टल से गोली मारकर जान दी, फर्श पर खून से लथपथ मिली लाश
अधिकारी के बेटे ने लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर जान दे दी। युवक की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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उत्तर प्रदेश के मेरठ में सहायक विकास अधिकारी-सहकारिता (एडीओ को-आपरेटिव) के इकलौते बेटे वंश प्रताप सिंह (19) ने मंगलवार को पिता की लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर जान दे दी। आवाज सुनकर एडीओ और उनकी पत्नी दौड़कर पहुंची। बेटा खून से लथपथ फर्श पर पड़ा था। परिजन बेटे को कार में लेकर मेडिकल की इमरजेंसी में पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वंश प्रताप जेईई एडवांस की तैयारी कर रहा था। बताया गया है कि पढ़ाई को लेकर वह तनाव में था।
मेडिकल थाना क्षेत्र के जागृति विहार स्थित रजपुरा ब्लाक कैंपस में बने सरकारी आवास में एडीओ पवन कुमार राघव परिवार के साथ रहते हैं। वह मूलरूप से बुलंदशहर के खुर्जा क्षेत्र के चंद्र कॉलोनी के मूल निवासी हैं।
पवन कुमार सहायक विकास अधिकारी-सहकारिता (एडीओ को-आपरेटिव) परीक्षितगढ़ थे। पांच महीने पहले समिति को लेकर विवाद उन्हें निलंबित किया गया था। उनका बेटा वंश राजस्थान के कोटा से जेईई एडवांस की तैयारी कर रहा था। लॉकडाउन के चलते वंश माता-पिता के साथ रहकर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहा था। मंगलवार सुबह करीब दस बजे वंश ने पिता की लाइसेंसी पिस्टल माथे पर सटाकर खुद को गोली मार ली। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के समय आवास में पवन कुमार और उनकी पत्नी भी मौजूद थी। पवन बेटे को उठाकर मेडिकल इमरजेंसी में ले गए। वहां वंश को मृत घोषित कर दिया गया। बाद में मेडिकल पुलिस पहुंची। पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोगों ने गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर किया। पुलिस ने बताया कि पढ़ाई को लेकर वंश तनाव में था। उसने जेईई मेंस की परीक्षा पास कर ली थी। अब वह जेईई एडवांस की तैयारी कर रहा था। एसपी सिटी विनीत भटनागर का कहना है कि लाइसेंसी पिस्टल पुलिस ने कब्जे में ले ली है।
पढ़ाई या परीक्षा को लेकर अधिक दबाव न बनाएं अभिभावक
पढ़ाई हो या परीक्षा की तैयारी के लिए अभिभावक बच्चों पर अधिक दबाव न डालें, अन्यथा वे अवसाद के शिकार हो सकते हैं और खुद की जान तक खतरे में डाल सकते हैं। काउंसलर डॉ. कशिका जैन बताती हैं कि पढ़ाई के अत्यधिक दबाव में बच्चे अवसाद में आ जाते हैं। उनकी मनोस्थिति अलग हो जाती है। वे अकेला महसूस करने लगते हैं और कभी-कभी आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। अब कई परीक्षाओं का परिणाम आने वाला है। 12वीं के परिणाम का भी काफी दबाव है। कोरोना की वजह से शिक्षण संस्थान पहले से ही बंद हैं। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चे का मनोबल बनाए रखें। सकारात्मक बातों से उनका हौसला बनाए रखें।