यूपी: मेरठ के जवान का बहराइच में ह्दय गति रुकने से निधन, पैतृक आवास पहुंचा पार्थिव शरीर
लावड़ थानाक्षेत्र निवासी बीएसएफ में तैनात एक जवान का बहराइच में सोमवार रात हृदय गति रुकने से निधन हो गया। बताया गया कि जब जवान सुबह के समय नहीं जागा तो साथियों को जवान के निधन की जानकारी हुई।
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मेरठ के लावड़ थानाक्षेत्र निवासी बीएसएफ में तैनात एक जवान का सोमवार रात हृदय गति रुकने से निधन हो गया। मंगलवार को सैन्य सम्मान के साथ जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। ग्रामीणों ने जवान को सैन्य अधिकारियों के साथ अंतिम विदाई दी।
चरला गांव निवासी राजदीप 33 वर्ष पुत्र तेजवीर सिंह पांच बहन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। वह बीएसएफ में तैनात थे और उनकी पोस्टिंग बहराइच में चल रही थी। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक शनिवार देर रात राजदीप अपनी बटालियन के साथ सो गए। लेकिन, मंगलवार सुबह जब वह नहीं जागे, तो बटालियन में मौजूद जवानों ने उन्हें जागने का प्रयास किया। लेकिन, वह नहीं उठे। राजदीप का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। सैन्य अधिकारियसों ने मामले की जानकारी फोन पर जवान के परिजनों को दी। जिस, पर परिजनों में कोहराम मच गया।
सैन्य अधिकारी सम्मान के साथ राजदीप का पार्थिव शरीर लेकर 11 बजे चरला गांव लेकर पहुंचे। पार्थिव शरीर गांव में पहुंचने पर ग्रामीणों की भीड़ राजदीप को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़ी। सूचना मिलने पर सरधना विधायक संगीत सोम व सपा नेता अतुल प्रधान गांव पहुंचे और जवान की अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
सैन्य अधिकारियों ने पत्नी रीना को तिरंगा सौंपा। पति राजदीप का पार्थिव शरीर देख रीना बिलख कर रोने लगी। वहीं, पास में खड़ी 12 वर्षीय बेटी दीपाली व 10 वर्षीय बेटा दक्ष नागर भी मां को रोता हुआ देख फफक पड़े।
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परिवार के अन्य सदस्यों व ग्रामीणों ने तीनों को सांत्वना देेकर शांत कराया। तहेरे भाई पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुकेश चरला ने बताया कि राजदीप के बड़े भाई कुलदीप भी आर्मी से रिटायर्ड है और गांव में ही किराना की दुकान करता है। भाई को देखकर ही राजदीप ने देश सेवा करने के लिए सेना में जाने का निर्णय लिया। अंतिम विदाई के दौरान सेना के जवानों ने राजदीप को गार्ड ऑफ आनर दिया। बेटे दक्ष ने पिता राजदीप को मुखाग्नि दी। ग्रामीणों व परिजनों ने राजदीप को सेल्यूट कर अंतिम विदाई दी।
चार दिसंबर को लौटे थे बहराइच
राजदीप पिछले माह के अंत में छुट्टी लेकर अपने गांव लौटे थे। परिजनों के साथ उन्होंने कुछ दिन बिताएं और चार दिसंबर को वह बहराइच लौट गए। मुकेश ने बताया कि वापस लौटने के दौरान राजदीप लगातार अपनी पत्नी व बच्चों से फोन पर बातचीत करता था। वह बच्चों को भी देश सेवा का पाठ पढ़ाता था।
जनवरी में वापस आऊंगा
मुकेश ने बताया कि राजदीप ने रविवार को भी फोन पर बच्चों से बातचीत की। राजदीप से बच्चों ने पूछा कि पापा वापस कब आओगे तो राजदीप ने जनवरी में बच्चों से आने के लिए वादा किया था। पिता राजदीप का पार्थिव शरीर देखकर बच्चे रोते हुए बोले पापा आपने अपना वादा तोड़ दिया। आपने जनवरी में आकर हमारे साथ खेलने का वादा किया था।
ग्रामीणों की उमड़ी भीड़, नम आंखों से दी विदाई
राजदीप का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव में पहुंचा ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। राजदीप के घर के अंदर से लेकर छत तक ग्रामीणों की भीड़ अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी हुई थी। घर में पैर रखने की जगह तक नहीं थी। अंतिम यात्रा के दौरान राजदीप को कंधा देने के लिए ग्रामीणों में होड़ लगी रही। देशभक्ति के गीतों के बीच जवान राजदीप को अंतिम विदाई दी गई। अंतिम यात्रा के दौरान हर ग्रामीण की आंख नम थी।