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यूपी: मेरठ के तीरंदाज नीरज चौहान ने एशियन गेम्स में जीते दो पदक, पिता के त्याग का मिला फल, मां की आंखें नम

Sun, 04 Oct 2026 10:52 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Mohd Mustakim Updated Sun, 04 Oct 2026 10:52 AM IST
सार

मेरठ में स्टेडियम के पास रहने वाले नीरज ने टीम इवेंट में रजत और व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। शिवम के पिता अक्षय चौहान कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में मेस चलाते थे। बेटे को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने सब्जी तक बेची। मां परमशिला की आंखें बेटे के पदक जीतने पर खुशी से नम हो गईं। 

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UP: Meerut archer Neeraj Chauhan wins two medals at the Asian Games
नीरज की फाइल फोटो और खुशी मनाते परिजन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एशियन गेम्स में एथलीट पारुल चौधरी के बाद मेरठ के नीरज चौहान ने भी तीरंदाजी में दो पदक जीतकर मेरठ का नाम रोशन कर दिया है। नीरज ने शुक्रवार को टीम इवेंट में रजत और शनिवार को व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। यहां स्टेडियम के पीछे स्थित पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में भी रह रहे उनके परिवार ने खुशी मनाई। नीरज की मां परमशिला की आंखें खुशी से नम हो गईं। नीरज के पिता अक्षय यहां कैलाश प्रकाश स्टेडियम में मेस चलाकर खिलाड़ियों के लिए भोजन तैयार करते थे। यहां उन्होंने करीब 20 साल तक सेवाएं दीं। मेस चलाकर ही बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाया।
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नीरज चौहान ने पुरुष रिकर्व टीम इवेंट में साथी खिलाड़ी धीरज और यशदीप के साथ प्रतिभाग किया। उन्हें दक्षिण कोरिया से 1-5 से हार का सामना करना पड़ा और रजत पदक मिला। इसके बाद व्यक्तिगत स्पर्धा रिकर्व में कांस्य पदक जीता। उन्होंने धीरज बोम्मादेवरा को 6-4 से हराया। एशियन गेम्स के इतिहास में व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी में पदक जीतने वाले नीरज चौहान दूसरे भारतीय पुरुष बने। उनसे पहले साल 2010 में तरुणदीप राय ने इस स्पर्धा में रजत पदक जीता था।
 
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मेरठ से की शुरुआत, इसके बाद सोनभद्र हॉस्टल में रहे
नीरज का परिवार मूलरूप से गोरखपुर का रहने वाला है। पिता अक्षय 1990 में मेरठ आए थे और इसके बाद से परिवार भी यहीं रह रहा है। पिता ने चार साल की उम्र में ही नीरज को खेलों में प्रशिक्षण के लिए उतार दिया था। यहीं स्पोर्ट्स स्टेडियम में ही नीरज ने कई खेलों में हाथ आजमाया। कुछ वर्ष बाद नीरज को तीरंदाजी के लिए सोनभद्र हॉस्टल में प्रवेश मिल गया। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 
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वर्ष 2018 में जूनियर और 2021 में सीनियर नेशनल में रजत पदक जीते। खेल कोटे से ही आईटीबीपी में नौकरी पाई और अब एशियन गेम्स में कमाल का प्रदर्शन किया। वर्तमान में नीरज आईटीबीपी में हैं और दिल्ली में तैनात हैं। वहीं नीरज के दूसरे भाई सुनील भी बॉक्सर हैं। वह खेल कोटे से ही पीएसी में तैनात हैं।
 

पहले मेस का काम, फिर सब्जी तक बेची
मां परमशिला ने बताया कि स्टेडियम में मेस चलाते समय ही उनके पति को खेलों में बच्चों का कॅरिअर बनाने का विचार आया। कोरोना काल के दौरान पति को मेस का काम छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सब्जी तक बेची। इसके बावजूद उन्होंने बेटों को खेलों में आगे बढ़ाया।

रंग लाई मेहनत, खेल अधिकारियों ने दी बधाई
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी जितेंद्र यादव ने बताया कि पिता ने कड़ी मेहनत कर नीरज को खेलों में आगे बढ़ाया और नीरज ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपनी प्रतिभा से पूरे देश का नाम रोशन किया है। एथलेटिक्स कोच गौरव त्यागी, तीरंदाजी कोच पूजा, ललित पंत, किशोर, नेहा कश्यप, ओमकार सिंह आदि ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।

 
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