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UP: मनमोहन सिंह का मेरठ से था गहरा नाता... जब सादगी से बोले थे- क्या आप मुझे अपनी कार में छोड़ देंगे

Fri, 27 Dec 2024 06:10 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Fri, 27 Dec 2024 06:10 PM IST
सार

मनमोहन सिंह कई बार मेरठ आए और अपने करीबियों से मुलाकात की। इसके अलावा वे मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे तो उनका मन बहुत दुखी हुआ था। 

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UP: Manmohan Singh had a deep connection with Meerut
मनमोहन सिंह - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मेरठ से गहरा नाता था। पूर्व शिक्षा मंत्री स्वर्गीय अजीत सिंह सेठी के वह रिश्तेदार थे। पद्मश्री हकीम सैफुद्दीन तथा फफूंडा के रहने वाले पब्लिक सर्विस कमीशन के अध्यक्ष रहे डॉक्टर विशंभर सिंह से भी उनकी काफी नजदीकियां थीं। वरिष्ठ कांग्रेसी बताते हैं कि वह कई बार मेरठ आए थे। पूर्व प्रधानमंत्री के निधन से कांग्रेसियों में शोक छा गया। उन्होंने संवेदनाएं जताईं।

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अजीत सिंह सेठी के पुत्र देवेंद्र जीत सिंह सेठी बताते हैं कि मनमोहन सिंह उनकी माता भजिंदर सिंह सेठी की मौसी के बेटे थे। उन्होंने बताया कि वह बेहद सहज और सरल व्यक्ति थे। चेंबर ऑफ कॉमर्स के तहत उद्योगों की मांगों को लेकर वह 1991 में दिल्ली में मनमोहन सिंह से मिले। वह उनके प्रतिनिधिमंडल को न केवल रिसीव करने बल्कि वार्ता के बाद बाहर तक छोड़ने भी आए थे। उनके पारिवारिक समारोह में शिरकत न कर पाने के बाद वह बाद में शुभकामनाएं देने के लिए भी पहुंचे थे।

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पूर्व मंत्री डॉ. मेहराजुद्दीन अहमद बताते हैं कि उनके पिता पद्मश्री हकीम सैफुद्दीन से स्वर्गीय मनमोहन सिंह का गहरा नाता था और वह उनसे मिलने भी आए थे। वह बताते हैं कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी प्रोफेसर एम. खुसरो के निधन पर दिल्ली में वह शोक जताने पहुंचे थे। इस बीच दफीना के बाद वहां मौजूद डॉक्टर मनमोहन सिंह ने उनसे पूछा कि आपके पास गाड़ी है क्या, मुझे घर तक छोड़ देंगे। इस पर डॉक्टर मैराजुद्दीन अवाक रह गए और मनमोहन सिंह को अपनी कार में उनके घर छोड़ने निकल पड़े। रास्ते में कौतूहल वश उन्होंने पूछा कि आपकी गाड़ी का क्या हुआ तब उन्होंने बताया कि वह सरकारी गाड़ी को अपने निजी कामों के लिए प्रयोग नहीं करते। उनके पास एक मारुति है, जिसे जरूरी काम से जा रही पत्नी लेकर गई है और उन्हें यहां छोड़ गई। उस समय वह राज्यसभा में नेता विपक्ष थे। वह बेहद सरल और सज्जन व्यक्ति थे।
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ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य नसीम कुरैशी ने बताया कि आर्थिक मामलों की उन्हें बहुत गहरी जानकारी थी। उनका खान-पान भी बेहद सादा था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपक शर्मा ने बताया कि दिल्ली में उनसे कई बार मुलाकात हुई। वह शानदार व्यक्तित्व के धनी थे। जो भी उनसे मिलने आता था बेहद सादगी से न केवल मिलते थे बल्कि उनकी समस्या का निस्तारण करने का भरपूर प्रयास करते थे। वरिष्ठ कांग्रेसी प्रदीप अरोड़ा, यूसुफ कुरैशी, कार्यवाह जिला अध्यक्ष अवनीश काजला, कार्यवाह महानगर अध्यक्ष जाहिद अंसारी, इमरान खान आदि ने संवेदना जताई।
 

मुजफ्फरनगर दंगे के बाद घाव पर मरहम लगाने आए थे मनमोहन सिंह

देश के 14वें प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद जिले में आए थे। उन्होंने सांझक में पीड़ितों से मुलाकात की। काफिले को रुकवाकर बड़ौत मार्ग पर खड़े किसानों से भी मिले थे। भाईचारा बनाए रखने और हर समस्या के समाधान का भरोसा दिया दिया था। 
जिले में भड़के दंगे से मनमोहन सिंह बेहद आहत रहे। राहत शिविरों में रह रहे पीड़ितों से मिलने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ कार में सवार होकर पहुंचे थे। सांझक और तावली में पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्या को जानने का प्रयास किया। इस दौरान कई भावुक क्षण भी आए, जब पीड़ित उनके सामने ही रोने लगे थे।

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