UP: मनमोहन सिंह का मेरठ से था गहरा नाता... जब सादगी से बोले थे- क्या आप मुझे अपनी कार में छोड़ देंगे
मनमोहन सिंह कई बार मेरठ आए और अपने करीबियों से मुलाकात की। इसके अलावा वे मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे तो उनका मन बहुत दुखी हुआ था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मेरठ से गहरा नाता था। पूर्व शिक्षा मंत्री स्वर्गीय अजीत सिंह सेठी के वह रिश्तेदार थे। पद्मश्री हकीम सैफुद्दीन तथा फफूंडा के रहने वाले पब्लिक सर्विस कमीशन के अध्यक्ष रहे डॉक्टर विशंभर सिंह से भी उनकी काफी नजदीकियां थीं। वरिष्ठ कांग्रेसी बताते हैं कि वह कई बार मेरठ आए थे। पूर्व प्रधानमंत्री के निधन से कांग्रेसियों में शोक छा गया। उन्होंने संवेदनाएं जताईं।
अजीत सिंह सेठी के पुत्र देवेंद्र जीत सिंह सेठी बताते हैं कि मनमोहन सिंह उनकी माता भजिंदर सिंह सेठी की मौसी के बेटे थे। उन्होंने बताया कि वह बेहद सहज और सरल व्यक्ति थे। चेंबर ऑफ कॉमर्स के तहत उद्योगों की मांगों को लेकर वह 1991 में दिल्ली में मनमोहन सिंह से मिले। वह उनके प्रतिनिधिमंडल को न केवल रिसीव करने बल्कि वार्ता के बाद बाहर तक छोड़ने भी आए थे। उनके पारिवारिक समारोह में शिरकत न कर पाने के बाद वह बाद में शुभकामनाएं देने के लिए भी पहुंचे थे।
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद घाव पर मरहम लगाने आए थे मनमोहन सिंह
देश के 14वें प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद जिले में आए थे। उन्होंने सांझक में पीड़ितों से मुलाकात की। काफिले को रुकवाकर बड़ौत मार्ग पर खड़े किसानों से भी मिले थे। भाईचारा बनाए रखने और हर समस्या के समाधान का भरोसा दिया दिया था।
जिले में भड़के दंगे से मनमोहन सिंह बेहद आहत रहे। राहत शिविरों में रह रहे पीड़ितों से मिलने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ कार में सवार होकर पहुंचे थे। सांझक और तावली में पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्या को जानने का प्रयास किया। इस दौरान कई भावुक क्षण भी आए, जब पीड़ित उनके सामने ही रोने लगे थे।