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अखिलेश-जयंत की बड़ी परीक्षा: मुजफ्फरनगर दंगे के बाद किसान आंदोलन से बदले समीकरण, पढ़िए खास रिपोर्ट
Sun, 09 Jan 2022 07:12 AM IST
कपिल kapil
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Sun, 09 Jan 2022 07:12 AM IST
सार
यूपी चुनाव में इस बार सपा ने रालोद के साथ गठबंधन का प्लान बना रखा है। लेकिन क्या अखिलेश और जयंत की जोड़ी कोई बड़ा कमाल कर दिखाएगी। माना जा रहा है चुनाव में अखिलेश और जयंत की बड़ी परीक्षा होगी।
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जयंत चौधरी व अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद की दोस्ती की भी परख होगी। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद रालोद से छिटका वोट बैंक किसान आंदोलन के बाद एकजुट दिखाई दे रहा है। दोनों पार्टियों के समर्थक मुजफ्फरनगर की खलिश भुलाकर साथ तो आए हैं पर बूथ पर यह कितना कारगर होंगे यह आने वाले समय में ही साफ होगा। पिछला चुनाव रालोद ने अकेले लड़ा था। जयंत के लिए भी यह पहला चुनाव है, जब वह बिना चौधरी अजित सिंह के मैदान में होंगे।
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पश्चिमी यूपी को जाटलैंड भी कहा जाता है। पिछली बार की तरह चुनाव आयोग ने इस बार भी यूपी विधानसभा चुनाव की शुरुआत पश्चिमी यूपी से ही शुरू की है। सपा और रालोद के बीच अभी गठबंधन में सीटों को बंटवारा भी सार्वजनिक नहीं हो सका है। माना जा रहा है कि रालोद को 36 से 40 सीट मिल सकती हैं। मेरठ की सिवाल और कैंट सीट रालोद के खाते में आ सकती हैं।
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बता दें कि सात दिसंबर को गांव दबथुआ में हुई सपा-रालोद की साझा जनसभा में भारी भीड़ उमड़ी थी। इसके बाद 23 दिसंबर को किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह की जयंती पर इगलास में हुई जनसभा में भी दोनों दल एक साथ थे।
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मेरठ जिले की सात सीटों के साथ शामली जिले की कैराना, थानाभवन, शामली, मुजफ्फरनगर जिले में बुढ़ाना, चरथावल, पुरकाजी, मुजफ्फरनगर, खतौली, मीरापुर, बागपत जिले की छपरौली, बड़ौत व बागपत विधानसभा सीटों पर पहले चरण में ही चुनाव होना है।