नोएडा से ज्यादा खराब हुई यूपी के इस जिले की हवा, बढ़ेगी सांस रोगियों की परेशानी
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के जिलों में हवा की गुणवत्ता सुधरती नजर नहीं आ रही है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर से भी ज्यादा बागपत की हवा की सेहत खराब है। पिछले 24 घंटे का एक्यूआई 434 के खतरनाक स्तर पर है। वायु प्रदूषण का यही हाल रहा तो लोगों की सेहत पर विपरीत असर पड़ना शुरू हो जाएगा। डॉक्टर कहते हैं कि फेफड़ों, दिल और दिमाग पर भी हवा की खराब गुणवत्ता का विपरीत असर पड़ सकता है।
सुबह के समय कोहरा छाए रहने और न्यूनतम तापमान में गिरावट के साथ हवा की गुणवत्ता सुधरती नजर नहीं आ रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जिला अस्पताल के गेट पर लगाए सर्वर पर गुणवत्ता सूचकांक जारी किया जाता है। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण विभाग 24 घंटे का विभिन्न शहरों का औसत एक्यूआई दर्शाता है। बागपत का पीएम 2.5 का एक्यूआई 434 तक दर्शाया गया है। यहां वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की हवा में सांस लेने से बीमारियां बढ़ सकती है।
अगर हवा की गुणवत्ता खराब है तो सांस संबंधी बीमारियां बढ़ सकती है। इसके अलावा फेफड़ों के रोग भी हो सकते हैं। जब तक हवा की सेहत में सुधार हो, तब तक अल सुबह घर से निकलने से बचना चाहिए। -डॉ. यशवीर सिंह, अधीक्षक, पिलाना सीएचसी।
सांस रोगियों की बढ़ेगी परेशानी
वायु सूचकांक का स्तर 434 के स्तर पर पहुंच जाने से सांस की बीमारी वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अस्थमा, टीबी और सांस के रोगी परेशान हैं। डॉक्टर कहते हैं कि सुबह-शाम के वक्त इस तरह की हवा इन रोगियों के लिए बीमारी को बढ़ा सकती है।
ईंट भट्ठे भी डाल रहे असर
जिलेभर में करीब 550 ईंट भट्ठे हैं। इनमें तीन सौ से अधिक ईंट भट्ठे ऐसे हैं, जिनका संचालन अवैध तरीके से किया जाता है। इसके अलावा निर्माण कार्य, जिले में चल रही टायर गलाने की फैक्ट्रियों से भी पर्यावरण की हालत बिगड़ जाती है।
जनपद एक्यूआई
बागपत 434
मुजफ्फरनगर 432
नोएडा 429
ग्रेटर नोएडा 420
बुलंदशहर 410
हापुड़ 400
मुरादाबाद 348
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