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अब पशु खो जाने पर नहीं होगी टेंशन, यूनीक आईडी से होगी पहचान, किसकी है गाय-भैंस
Fri, 05 Jun 2020 12:25 AM IST
Dimple Sirohi
दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Fri, 05 Jun 2020 12:25 AM IST
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हाईवे पर पशु
- फोटो : अमर उजाला
सरकार के राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मेरठ जिले में गाय और भैंसों की टैगिंग का काम शुरू कराया है। इसमें पशुओं के कान के पास एक यूनिक नंबर का टैग लगाया जा रहा है। इससे उनकी पहचान भी हो सकेगी।
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अभी तक जिले में 75 हजार से ज्यादा पशुओं की टैगिंग का काम हो चुका है। पशुपालन विभाग की ओर से जिले के 12 ब्लॉकों में इस काम की जिम्मेदारी पशु चिकित्साधिकारी को सौंपी गई है। टैगिंग के बाद ही पशुपालकों को आगे आने वाली योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। ऐसे में पशुओं की टैगिंग कराना जरूरी है।
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पोर्टल पर डाटा हो रहा अपलोड
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीयकृत करते हुए इनाफ पोर्टल लांच किया गया है। इसमें पशुओं के टैग नंबर के साथ पशुपालकों के नाम, घर का पता डाला जा रहा है। इसके माध्यम से देश के किसी भी हिस्से में पशुओं के पहुंचने पर उसके मालिक की पहचान की जा सके।
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अभी तक जिले में 75585 गाय और भैंस की टैगिंग की जा चुकी है। गायों को 44319 और भैंसों को 31266 टैग लगाए जा चुके हैं। इनाफ पोर्टल पर 20741 पशुओं का डाटा अपलोड हो चुका है।
सभी पशुपालकों से निवेदन है कि गाय और भैंस की टैगिंग जरूर कराएं। इससे काफी फायदा है। आगे आने वाली योजनाओं का लाभ भी इसी आधार पर मिलेगा। - डॉ. अनिल कंसल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी