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आंखों की रोशनी पर भारी दो भाइयों का हौसला

Mon, 20 May 2019 04:19 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Mon, 20 May 2019 04:19 AM IST
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Two brothers' courage on eyesight
अभ्यास करता दृष्टिबाधित खिलाडी - फोटो : अमर उजाला
मेरठ। हौसला जब मजबूत हो तो दिव्यांगता भी घुटने टेक देती है और सफलता आपके कदम चूमती है। कुछ ऐसे ही हैं मेरठ के दो दृष्टिबाधित भाई। मूल रूप से सिसौली गांव निवासी नितिन और गौरव सैनी की आंखें दुनिया तो नहीं देख सकती है, लेकिन वह हमेशा लक्ष्य पर केेंद्रित रहती हैं। दोनों भाई पैरा एथलेक्सि दौड़ प्रतियोगिता में जिला और राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। अभ्यास करने के लिए वह प्रतिदिन करीब 20 किमी का सफर तय कर कैलाश प्रकाश स्टेडियम आते हैं।
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स्टेडियम में रोज एथलेटिक्स के पांच सौ से ज्यादा खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। लेकिन सभी खिलाड़ियों की निगाह नितिन व गौरव पर ठहर जाती है। 21 वर्षीय नितिन छह भाई-बहनों में सबसे बड़े और 20 वर्षीय गौरव दूसरे नंबर पर आते हैं। पिता रामभरोसे सैनी गांव में सब्जी बेचकर परिवार का पालन पोषण करते हैं।  अलग-अलग हादसों में नितिन की 11 वर्ष और गौरव की 9 साल की उम्र में आंखों की रोशनी चली गई। काफी इलाज के बाद भी उनकी रौशनी नहीं लौटी।
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शुरू की नई जिंदगी
दोनों भाइयों ने निराश होने की जगह जिंदगी को अपने तरीके से जीने का फैसला किया। पिछले आठ माह से लगातार वह स्टेडियम में प्रैक्टिस के लिए आते हैं। नितिन 100, 200 मीटर और गौरव 400, 800 मीटर दौड़ में जिला व राज्य स्तरीय पैरा प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। कोच गौरव त्यागी उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं। कोच ने बताया कि दोनों राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं, जो अक्तूबर में होगी। दोनों को अभ्यास के दौरान गाइड रनर की जरूरत होती है।
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नितिन ने 12वीं पास किया तो गौरव बीए में
नितिन ने बताया उन्होंने इस साल सीबीएसई से 12वीं की परीक्षा में 70 प्रतिशत पाए हैं। जबकि गौरव दिल्ली से बीए की पढ़ाई कर रहा है। दोनों रिकार्डिंग से पढ़ाई करते हैं। राइटर द्वारा परीक्षा आयोजित होती हैं। पिता रामभरोसे ने बताया बच्चों के हौसले को वो सलाम करते हैं।


दोनों को देखकर ड्राइवर नहीं रोकते बस
प्रतिदिन दोनों भाई सिसौली के बस स्टॉप पर बस का इंतजार करते हैं। दृष्टिबाधित होने के कारण उनकी यात्रा निशुल्क होती है। ऐसे में बस ड्राइवर उन्हें देखकर बस नहीं रोकते। कई बार बस स्टैंड पर घंटों खडे़ रहना पड़ता है। गौरव त्यागी का कहना है कि ड्राइवर या आम लोगों को उनका ध्यान रखना चाहिये। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण दोनों को खेलों में आगे बढ़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में उनका हौसला ही उनको आगे लेकर जाएगा।
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