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Meerut News: विदेह क्षेत्र में हमेशा विद्यमान रहते हैं बीस तीर्थंकर
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अमर उजाला....महावीर जयंती भवन जैन मंदिर में आयोजित पूजन एवं प्रक्षाल शिविर में शामिल श्रद्धालु।
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महावीर जयंती भवन में विश्व श्रमण श्रीसंघ द्वारा पूजन एवं प्रशाल शिविर का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। महावीर जयंती भवन में विश्व श्रमण श्रीसंघ द्वारा पूजन एवं प्रशाल शिविर लगाया गया। शिविर का संयोजन सौरभ जैन ने किया। शिविर में 65 बच्चे शामिल हुए। बच्चों को विद्यमान बीस तीर्थंकरों के विषय में बताया गया। इन्हें विद्यमान बीस तीर्थंकर इसलिए कहा जाता है क्योंकि ढाई दीप के पांचों विदेह क्षेत्र में इन नाम वाले 20 तीर्थंकर ही होते हैं।
सौरभ जैन ने बताया कि तथा कम से कम 20 तीर्थंकर हमेशा विद्यमान रहते हैं। किसी भी नाम वाले तीर्थंकर के मोक्ष जाने पर इस नाम से दूसरे तीर्थंकर का उद्भव हो जाता है। इस प्रकार एक नाम वाले तीर्थंकर का कभी अभाव नहीं होता है। विदेह क्षेत्र में हमेशा चतुर्थ काल रहता है। विदेह क्षेत्र पांच होते है। उनमें प्रत्येक में 32 कर्म भूमि होती है। इस प्रकार कुल 160 कर्म भूमि होती है। पांचो विदेह क्षेत्र में कम से कम 20 और अधिकतम 160 तीर्थंकर हो सकते हैं।
कार्यक्रम में देवेंद्र जैन, विनोद जैन, अतुल जैन ने बच्चों से प्रक्षाल की सभी आवश्यक क्रियाएं कराई। गौरव जैन, वैभव जैन, सम्यक जैन, राहुल जैन ने बच्चों को पूजन विधि बताई। प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य अमित जैन, अर्हम जैन परिवार को प्राप्त हुआ। ड्रा द्वारा निकाले गए भाग्यशाली पुरस्कार विजेताओं में आरव जैन रहे। सौरभ जैन ने बताया कि अलगा शिविर 11 जनवरी को होगा।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। महावीर जयंती भवन में विश्व श्रमण श्रीसंघ द्वारा पूजन एवं प्रशाल शिविर लगाया गया। शिविर का संयोजन सौरभ जैन ने किया। शिविर में 65 बच्चे शामिल हुए। बच्चों को विद्यमान बीस तीर्थंकरों के विषय में बताया गया। इन्हें विद्यमान बीस तीर्थंकर इसलिए कहा जाता है क्योंकि ढाई दीप के पांचों विदेह क्षेत्र में इन नाम वाले 20 तीर्थंकर ही होते हैं।
सौरभ जैन ने बताया कि तथा कम से कम 20 तीर्थंकर हमेशा विद्यमान रहते हैं। किसी भी नाम वाले तीर्थंकर के मोक्ष जाने पर इस नाम से दूसरे तीर्थंकर का उद्भव हो जाता है। इस प्रकार एक नाम वाले तीर्थंकर का कभी अभाव नहीं होता है। विदेह क्षेत्र में हमेशा चतुर्थ काल रहता है। विदेह क्षेत्र पांच होते है। उनमें प्रत्येक में 32 कर्म भूमि होती है। इस प्रकार कुल 160 कर्म भूमि होती है। पांचो विदेह क्षेत्र में कम से कम 20 और अधिकतम 160 तीर्थंकर हो सकते हैं।
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कार्यक्रम में देवेंद्र जैन, विनोद जैन, अतुल जैन ने बच्चों से प्रक्षाल की सभी आवश्यक क्रियाएं कराई। गौरव जैन, वैभव जैन, सम्यक जैन, राहुल जैन ने बच्चों को पूजन विधि बताई। प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य अमित जैन, अर्हम जैन परिवार को प्राप्त हुआ। ड्रा द्वारा निकाले गए भाग्यशाली पुरस्कार विजेताओं में आरव जैन रहे। सौरभ जैन ने बताया कि अलगा शिविर 11 जनवरी को होगा।
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