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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Triple murder case of Gudri Bazaar: The culprits got punishment, the victims got justice, eyes became moist.

गुदड़ी बाजार का तिहरा हत्याकांड : दोषियों को मिली सजा, पीड़ितों को इंसाफ, आंखें हुईं नम

Mon, 05 Aug 2024 11:49 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Mon, 05 Aug 2024 11:49 PM IST
सार

गुदड़ी बाजार में कत्ल किए गए सुनील ढाका, सुधीर उज्ज्वल और पुनीत गिरी के हत्यारों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई तो पीड़ित परिवार के लोगों की आंखें नम हो गईं।

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Triple murder case of Gudri Bazaar: The culprits got punishment, the victims got justice, eyes became moist.
फैसला आने के बाद कोर्ट से बाहर निकलते वादी पक्ष के लोग। - फोटो : Amar ujala

विस्तार

परिजन बोले कि 16 साल से दिल बहुत भारी था। आज हमारे बच्चों की आत्मा को शांति मिली। ऐसे हत्यारों को समाज में रहने का हक नहीं है। ऐसे लोग समाज से दूर आजीवन जेल में ही रहने चाहिए।
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सुनील ढाका के बड़े भाई अनिल ढाका ने कहा कि हम कोर्ट का आदेश पढ़ेंगे। इसके बाद आगे का निर्णय लेंगे। हमको कानून पर पूरा विश्वास था। पुनीत गिरि के चाचा एडवोकेट अजित गिरी ने कहा कि 16 साल से इस दिन का इंतजार था। हत्यारों को उम्रकैद मिलने से मृतकों की आत्मा को शांति मिलेगी।
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बागपत के ढिकौली गांव निवासी 27 साल के सुनील ढाका की जब हत्या हुई तो उनकी पत्नी की गोद में छह महीने का बेटा था। आरोपियों को उम्रकैद की सजा दिए जाने के बाद सुनील की मां जगवती देवी बेटे के फोटो को गोद में लेकर रोने लगीं। भाभी बबीता की आंखें भी नम हो गईं।
22 साल का पुनीत गिरी मेरठ कॉलेज में एमए का छात्र था। वह सीताराम हॉस्टल में रहता था। पुनीत के पिता राधे किशन गिरी और माता धर्मवती देवी ने कहा कि इतने सालों बाद आज इंसाफ मिल गया।

 

बागपत के सिरसलगढ़ गांव का रहने वाला 23 साल का सुधीर उज्ज्वल मेरठ कॉलेज में प्रोफेसर चाचा पूरन सिंह उज्ज्वल के पास रहकर बीबीए की पढ़ाई कर रहा था। पिता सुरेश और माता सुरेशी ने कहा कि उन्हें कानून पर भरोसा था। आज इंसाफ मिला है।
 
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सुधीर के भाई बोले, फांसी की सजा पर कलेजे को ठंडक मिलती
सिरसलगढ़ गांव के मृतक सुधीर उज्ज्वल के छोटे भाई सोनू उज्ज्वल ने कहा कि जिस तरह से आरोपियों ने बर्बरता से हत्याकांड को अंजाम दिया था, उसे देखते हुए उनको फांसी की सजा सुनानी चाहिए थी। फांसी की सजा मिलती तो कलेजे को ठंडक मिलती। उन्होंने बताया कि सुधीर की हत्या के बाद वर्ष 2013 में उसके पिता सुरेश उज्जवल की मौत हो गई। अब परिवार में उसके अलावा मां सुरेशवती रह गए। वहीं सिरसलगढ़ के ग्रामीणों ने कहा कि हत्याकांड के आरोपियों को आजीवन कारावास की जगह फांसी की सजा से मृतकों की आत्मा को शांति मिलती।

 
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