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हेपेटाइटिस सी के 4000 मरीजों का इलाज अटका
Wed, 01 May 2019 03:28 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Wed, 01 May 2019 03:28 AM IST
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हेपेटाइटिस
- फोटो : अमर उजाला
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हेपेटाइटिस-सी के 4000 मरीजों का इलाज अटक गया है। इन्हें अगर जिला अस्पताल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एकमात्र हेपेटाइटिस सी क्लीनिक में इलाज कराना है, तो करीब तीन माह इंतजार करना पड़ेगा। दरअसल, इस क्लीनिक को उत्तर प्रदेश सरकार टेकओवर कर रही है। लिहाजा तय किया गया है कि अब उन्हीं मरीजों का इलाज होगा, जिनका पहले से चल रहा है या जो गंभीर हैं। बाकी मरीज जिन्हें स्क्रीनिंग के दौरान हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुई है, उनका इलाज तब शुरू किया जाएगा, जब यूपी सरकार इसे टेकओवर कर लेगी। ऐसे करीब चार हजार मरीज हैं।
अभी तक यहां इंटरनेशनल एनजीओ ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर’ की टीम मरीजों का निशुल्क इलाज कर रही है। यह टीम यहां से चली जाएगी। उनका अनुबंध जून-जुलाई 2019 तक का है, जिसे जारी नहीं रखा जाएगा। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी क्लीनिक की शुरुआत 25 जनवरी 2017 को हुई थी। तब से अब तक यहां करीब 2200 मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। करीब 800 मरीजों का इलाज चल रहा है। चार हजार मरीजों की वेटिंग चल रही है। इस क्लीनिक में तीन डॉक्टर, तीन नर्स, तीन काउंसलर, दो लैब टेक्नीशियन समेत 25 लोगों का स्टाफ है। जिला अस्पताल के कमरा नंबर 17 में चल रहे इस क्लीनिक के इंचार्ज डॉ. हेमंत ने बताया कि जून या जुलाई माह से यूपी सरकार इस क्लीनिक को टेकओवर कर लेगी। यह तय किया गया है कि वेटिंग में चल रहे मरीजों का इलाज टेकओवर करने के बाद ही शुरू किया जाएगा।
मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में तैयार हो रहा बड़ा सेटअप
उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में हेपेटाइटिस सी का बड़ा केंद्र बनाया जा रहा है। इसमें हेपेटाइटिस सी के मरीजों का इलाज किया जाएगा। मेरठ के अलावा बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर आदि जिलों के मरीज यहां इलाज करा सकेंगे।
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यह है हेपेटाइटिस-सी
हेपेटाइटिस-सी (यकृतशोथ ग) को काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस-सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है। यह वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है। हेपेटाइटिस सी के मरीज दो प्रकार के होते हैं। जिनमें पूरी तरह वायरस फैल चुका है, उन्हें हेपेटाइटिस का मरीज माना जाता है। दूसरे ऐसे होते हैं जिनकेब्लड में हेपेटाइटिस के वायरस होते हैं, लेकिन आसानी से लक्षण का पता नहीं चल पाता है। इन्हें हेपेटाइटिस कैरियर कहा जाता है। इन्हें हेपेटाइटिस की दिक्कत तो नहीं होती, लेकिन इनका ब्लड दूसरे व्यक्ति को चढ़ाने पर यह वायरस तेजी से इंफेक्शन फैलाता है।
ऐसे फैलता है
- दूषित सिरिंज का उपयोग करना
- दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल
- पीड़ित गर्भवती महिला से बच्चे को होना
- दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस पर रहना
- दूषित सुई से टैटू बनवाना या एक्युपंक्चर करवाना
- इंजेक्शन से नशीली दवाओं का प्रयोग करना
- कोई भी ऐसा कार्य जिसमें खून से खून का संपर्क हो
लक्षण
भूख कम लगना, थकान, पेट दर्द, पीलिया, अवसाद, खुजली और फ्लू आदि।
सावधानी
- शराब बिल्कुल न पीएं
- लिवर में वसा के इकट्ठे होने को नियंत्रित करें
- पानी अधिक मात्रा में लें
- जांचें नियमित कराते रहें
- आराम करें और नींद पूरी लें
- कच्चा या अधपका भोजन न करें
- शक्कर और नमक की उच्च मात्रा वाले आहार न लें
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अभी तक यहां इंटरनेशनल एनजीओ ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर’ की टीम मरीजों का निशुल्क इलाज कर रही है। यह टीम यहां से चली जाएगी। उनका अनुबंध जून-जुलाई 2019 तक का है, जिसे जारी नहीं रखा जाएगा। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी क्लीनिक की शुरुआत 25 जनवरी 2017 को हुई थी। तब से अब तक यहां करीब 2200 मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। करीब 800 मरीजों का इलाज चल रहा है। चार हजार मरीजों की वेटिंग चल रही है। इस क्लीनिक में तीन डॉक्टर, तीन नर्स, तीन काउंसलर, दो लैब टेक्नीशियन समेत 25 लोगों का स्टाफ है। जिला अस्पताल के कमरा नंबर 17 में चल रहे इस क्लीनिक के इंचार्ज डॉ. हेमंत ने बताया कि जून या जुलाई माह से यूपी सरकार इस क्लीनिक को टेकओवर कर लेगी। यह तय किया गया है कि वेटिंग में चल रहे मरीजों का इलाज टेकओवर करने के बाद ही शुरू किया जाएगा।
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मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में तैयार हो रहा बड़ा सेटअप
उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में हेपेटाइटिस सी का बड़ा केंद्र बनाया जा रहा है। इसमें हेपेटाइटिस सी के मरीजों का इलाज किया जाएगा। मेरठ के अलावा बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और गौतमबुद्धनगर आदि जिलों के मरीज यहां इलाज करा सकेंगे।
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यह है हेपेटाइटिस-सी
हेपेटाइटिस-सी (यकृतशोथ ग) को काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस-सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है। यह वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है। हेपेटाइटिस सी के मरीज दो प्रकार के होते हैं। जिनमें पूरी तरह वायरस फैल चुका है, उन्हें हेपेटाइटिस का मरीज माना जाता है। दूसरे ऐसे होते हैं जिनकेब्लड में हेपेटाइटिस के वायरस होते हैं, लेकिन आसानी से लक्षण का पता नहीं चल पाता है। इन्हें हेपेटाइटिस कैरियर कहा जाता है। इन्हें हेपेटाइटिस की दिक्कत तो नहीं होती, लेकिन इनका ब्लड दूसरे व्यक्ति को चढ़ाने पर यह वायरस तेजी से इंफेक्शन फैलाता है।
ऐसे फैलता है
- दूषित सिरिंज का उपयोग करना
- दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल
- पीड़ित गर्भवती महिला से बच्चे को होना
- दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस पर रहना
- दूषित सुई से टैटू बनवाना या एक्युपंक्चर करवाना
- इंजेक्शन से नशीली दवाओं का प्रयोग करना
- कोई भी ऐसा कार्य जिसमें खून से खून का संपर्क हो
लक्षण
भूख कम लगना, थकान, पेट दर्द, पीलिया, अवसाद, खुजली और फ्लू आदि।
सावधानी
- शराब बिल्कुल न पीएं
- लिवर में वसा के इकट्ठे होने को नियंत्रित करें
- पानी अधिक मात्रा में लें
- जांचें नियमित कराते रहें
- आराम करें और नींद पूरी लें
- कच्चा या अधपका भोजन न करें
- शक्कर और नमक की उच्च मात्रा वाले आहार न लें