{"_id":"595e91544f1c1b40108b4626","slug":"toffiee-paking-and-nasha-dose-target-student","type":"story","status":"publish","title_hn":"टॉफी की पैकिंग में नशे की डोज, निशाने पर छात्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टॉफी की पैकिंग में नशे की डोज, निशाने पर छात्र
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jul 2017 01:54 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मासूमों और युवाओं को नशे की तरफ धकेलने के लिए ड्रग्स माफियाओं ने नया खेल शुरू किया है। टॉफी की पैकिंग में नशे की डोज बेची जा रही है। किसी पैकिंग में महादेव का गोला बताकर भांग मिश्रित गोला बेचा जा रहा है, तो कहीं पर मुनक्का के नाम पर नशा दिया जा रहा है। अहम बात ये है माफिया ने नशे को बेचने के लिए रेलवे स्टेशन से लेकर स्कूलाें के बाहर तक ठिकाने बना लिये हैं।
स्कूली छात्र और युवा लगातार नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए कोर्ट ने भी स्कूल कालेजों के बाहर गुटखा, बीड़ी आदि के साथ तमाम नशीले पदार्थों की बिक्री को प्रतिबंधित कर रखा है।
भांग मिश्रित महादेव का गोला
अमर उजाला टीम ने जब ऐसे ही कुछ नशीले पदार्थों की पड़ताल शुरू की तो पाया गया कि इस वक्त सबसे ज्यादा महादेव का गोला नाम से नशीला खाद्य पदार्थ बिक रहा है। टॉफी जैसी पेकिंग में दो रुपये के इस गोले में भांग मिश्रित होती है, जिससे हलका नशा होता है। सूत्रों के अनुसार यह ऐसा नशा है जो यदि प्रतिदिन खाया जाये तो खाने वाला इसका आदी हो जाता है और भविष्य में इसकी डोज बढ़ाता चला जाता है। नशीले पदार्थों में मुनक्का नाम से भी एक उत्पाद बाजार में उपलब्ध है। इसमें भी नशीला पदार्थ मिला होता है। जिसके खाने नशा होता है। जबकि कुछ चूर्ण की गोलियों की पैकिंग भी नशे के लिए बाजार में हैं। इनके खाने से भी नशा होता है।
विज्ञापन
प्रशासन का नहीं इस तरफ ध्यान
स्कूल कालेजों के बाहर नशे के सामान धड़ल्ले से बिक रहे हैं। प्रशासन का इस तरफ ध्यान नहीं है। नशे का कारोबार करने वालों ने स्कूल, कालेज, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन आदि सभी स्थानों पर अपने ठिकाने बना लिये हैं। यही नहीं कालेजों के आसपास तो सीधे चरस, अफीम और गांजा आदि की बिक्री तक के खुलासे हो चुके हैं। शहर के एक प्रतिष्ठित गर्ल्स स्कूल के बाहर एक ठेला लगाकर नमकीन और चटनी बेचता था। इस चटनी में ड्रग्स का मिश्रण होता था। लगातार कई साल तक यह ठेले वाला छात्राओं को नशे का आदी बनाता रहा। जब पोल खुली तो भाग निकला। पुलिस को अभी तक उसकी तलाश है।
विज्ञापन
स्कूली छात्र और युवा लगातार नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए कोर्ट ने भी स्कूल कालेजों के बाहर गुटखा, बीड़ी आदि के साथ तमाम नशीले पदार्थों की बिक्री को प्रतिबंधित कर रखा है।
विज्ञापन
भांग मिश्रित महादेव का गोला
अमर उजाला टीम ने जब ऐसे ही कुछ नशीले पदार्थों की पड़ताल शुरू की तो पाया गया कि इस वक्त सबसे ज्यादा महादेव का गोला नाम से नशीला खाद्य पदार्थ बिक रहा है। टॉफी जैसी पेकिंग में दो रुपये के इस गोले में भांग मिश्रित होती है, जिससे हलका नशा होता है। सूत्रों के अनुसार यह ऐसा नशा है जो यदि प्रतिदिन खाया जाये तो खाने वाला इसका आदी हो जाता है और भविष्य में इसकी डोज बढ़ाता चला जाता है। नशीले पदार्थों में मुनक्का नाम से भी एक उत्पाद बाजार में उपलब्ध है। इसमें भी नशीला पदार्थ मिला होता है। जिसके खाने नशा होता है। जबकि कुछ चूर्ण की गोलियों की पैकिंग भी नशे के लिए बाजार में हैं। इनके खाने से भी नशा होता है।
विज्ञापन
प्रशासन का नहीं इस तरफ ध्यान
स्कूल कालेजों के बाहर नशे के सामान धड़ल्ले से बिक रहे हैं। प्रशासन का इस तरफ ध्यान नहीं है। नशे का कारोबार करने वालों ने स्कूल, कालेज, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन आदि सभी स्थानों पर अपने ठिकाने बना लिये हैं। यही नहीं कालेजों के आसपास तो सीधे चरस, अफीम और गांजा आदि की बिक्री तक के खुलासे हो चुके हैं। शहर के एक प्रतिष्ठित गर्ल्स स्कूल के बाहर एक ठेला लगाकर नमकीन और चटनी बेचता था। इस चटनी में ड्रग्स का मिश्रण होता था। लगातार कई साल तक यह ठेले वाला छात्राओं को नशे का आदी बनाता रहा। जब पोल खुली तो भाग निकला। पुलिस को अभी तक उसकी तलाश है।