26 जनवरी को लाल किले की घटना के बाद कमजोर हुए किसान आंदोलन में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के आंसुओं ने जान फूंकने का काम कर दिया है। गुरुवार रात में वायरल हुई टिकैत की भावुक होने वाली वीडियो के बाद से किसान आंदोलन को न केवल फिर मजबूती मिली है, बल्कि आंदोलन छोड़कर जाने वाले संगठन भी वापसी करने लगे हैं। इसका असर शुक्रवार को मुजफ्फरनगर में हुई भाकियू की महापंचायत में भी देखने को मिला।
राकेश टिकैत के आंसुओं ने फूंकी किसान आंदोलन में जान, महापंचायत में दिखा असर, देखें तस्वीरें
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गुरुवार को गाजीपुर बॉर्डर पर धरना हटाने गए भारी पुलिस बल को देखकर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने वहां से हटने को मना कर दिया था। साथ ही इस कदर भावुक हो गए थे कि उनके आंसू बहने लगे। रोते हुए टिकैत ने किसानों के लिए जान देने की बात कही और जिला प्रशासन के पानी पीने को मना करते हुए गांवों से आने वाले पानी पीने की बात कही। इस वीडियो के वायरल होते ही मेरठ और सहारनपुर मंडल के गांवों में इसकी त्वरित प्रतिक्रिया होने लगी और किसानों ने पानी लेकर गाजीपुर के लिए गुरुवार रात में ही कूच करना शुरू कर दिया।
छुर, पाथौली, दबथुआ, जंगेठी, दौराला, भलसौना, जटपुरा, बहादरपुर, ईकड़ी, रामपुर, रोहटा, जिटौली, घोपला, भदौड़ा, चिंदौड़ी, टप्पा लावड़ आदि गांवों से किसान पानी लेकर शुक्रवार सुबह तक गाजीपुर पहुंच गए। किसानों ने बताया कि टिकैत ने सभी गांवों से ले जाए गए पानी की एक-एक घूंट भरी। किसानों में इस कदर रोष देखा गया कि आसपास के गांवों के किसान रात 12 बजे ही पहुंचना शुरू हो गए थे। धरनास्थल पर उमड़ती भीड़ और मुजफ्फरनगर में महापंचायत के एलान के बाद बाजी पलटती नजर आई। तेजी से बदले घटनाक्रम के बाद पुलिस बल भी रात दो बजे तक वापस हो गया और किसानों की भीड़ शुक्रवार शाम तक पहले से कई गुना हो गई। जिले से जाने वाले किसानों में वरुण सांगवान, सुबोध भदौड़ा, गजेंद्र दबथुआ, सत्यवीर जंगेठी, बबलू जिटौली, मनोज जिटौली, हरेंद्र जानी, विनोद जिटौली, बिल्लू भलसोना, गुड्डू चौधरी, जितेंद्र, सचिन, रब्बू, विनय, विनीत, मोनी, राहुल, टोनी आदि मौजूद रहे।
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बिरादरी ले गई गंगाजल
गंगाजली बिरादरी संगठन प्रमुख मेजर डॉ. हिमांशु सिंह और भारतीय किसान आंदोलन (भाकिआ) के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी आदि अपने साथ गंगाजल लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि टिकैत ने गांवों से पानी मांगा था इसलिए वे उनके लिए गंगाजल लेकर पहुंचे। बिरादरी ने एक माह से आंदोलन स्थल पर स्वास्थ्य शिविर लगा रखा है।
अपने साधनों से पहुंचे
अब तक गाजीपुर धरने में शामिल नहीं होने वाले किसान भी टिकैत की भावुक वीडियो देखकर रोष में आ गए। पहली बार शुक्रवार को बॉर्डर पर इतनी भीड़ देखने को मिली। 26 जनवरी पर ट्रैक्टर परेड में रालोद के जान फूंकने के बाद ही मेरठ से करीब 300 ट्रैक्टर जा सके थे, लेकिन इस घटना के बाद किसान स्वत: ही अपने साधनों से गाजीपुर कूच कर गए।