महाभारतकालीन नगरी में दर्जनों प्राचीन स्थलों के अवशेष आज भी मौजूद हैं। इनमें से कई ऐसे भी, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। अकबरपुर गढ़ी इच्छाबाद के जंगल में सती आशा देवी ऐसा ही मंदिर है। ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर मध्य गंगनहर किनारे स्थित प्राचीन सती आशा देवी मंदिर लगभग 300 साल पुराना है।
हस्तिनापुर में सती आशा देवी मंदिर, यहां भक्तों की हर मन्नत होती है पूरी, तस्वीरें
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मंदिर के महंत सेवागिरी महाराज ने बताया कि दिल्ली के एक व्यापारी क्षेत्र में व्यापार करने आए थे। स्थानीय लोगों ने लालच वश व्यापारी की हत्या कर दी और शव को कुछ दूर एक खेत में मिट्टी में दबा दिया था। कहा जाता है कि व्यापारी की आत्मा ने दिल्ली में रह रही पत्नी को सपने में बताया कि स्थानीय लोगों ने उसे मारकर खेत में दबा दिया है। इस पर उनकी पत्नी बंजारन आशा देई और उनकी सास गांव अकबरपुर गढ़ी के जंगल में पहुंची। आशा देई ने गाय के गोबर के गोले बनाए और अपनी आध्यात्मिक शक्ति से कहा कि जहां पर उनके पति मौजूद हैं, ये गोले वहीं गिरें। जब उन्होंने गोले उछाले तो वे खेत में उसी स्थान पर गिरे, जहां व्यापारी का शव दबाया गया था।
आशा देई ने लोगों की मदद से पति के शव को निकाला और गंगा की ओर चल पड़ीं। गंगा मां ने उन्हें दर्शन दिए। इसके बाद आशा देई अपने पति के शरीर को गोद में लेकर बैठ गई। तभी वहां अग्नि प्रकट हो गई। आशा देई ने पति के साथ अपने शरीर को भी भस्म कर लिया था। बाद में यहीं पर मंदिर की स्थापना की गई।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव
यदि पर्यटन विभाग और सरकार मंदिर को विकसित करें तो यहां पर्यटक बढ़ सकते हैं। यहां अभी सड़क और सुरक्षा का अभाव है। मंदिर पर एक भी काम प्रशासनिक स्तर पर नहीं कराया गया। कमेटी मंदिर की देखभाल करती है।
दर्जनों विद्यार्थी सरकारी नौकरी में
मान्यता है कि मां से जो भी मन्नत मांगते हैं, वह पूरी होती हैं। छात्र परीक्षा के समय मां की पूजा-अर्चना कर पास होने की प्रार्थना करते हैं। महंत सेवागिरी महाराज ने बताया कि क्षेत्र के दर्जनों छात्र-छात्राएं आज सरकारी विभागों में हैं।
आश्चर्यजनक घटनाएं हुईं
महंत सेवागिरी ने बताया कि माता अपने भक्तों को लगातार दर्शन देकर उनका मार्गदर्शन करती हैं। कई भक्तों के साथ आश्चर्यचकित करने वाली घटनाएं घट चुकी हैं। श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर यहां भंडारे का भी आयोजन करते हैं।
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