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तीन साल हो गए...शुरू नहीं हो सका गंभीर मरीजों का इलाज

Fri, 18 Jul 2025 02:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Jul 2025 02:27 AM IST
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Three years have passed... treatment of serious patients could not be started
जिला अस्पताल में बना ट्रॉमा सेंटर
- जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर तो बना, मगर नहीं मिलीं मशीनें-स्टाफ
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। पीएल शर्मा जिला अस्पताल में गंभीर और सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों के लिए बना 12 बेड का ट्रॉमा सेंटर करीब तीन साल पहले शुरू हो जाना चाहिए था, मगर ऐसा नहीं हो सका। वजह मशीनों का न आना और स्टाफ का न मिलना है।

जनवरी 2022 में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण शुरू हुआ था। निर्देश दिए गए थे कि छह माह के भीतर इसे चालू कराया जाए, लेकिन इसका निर्माण बेहद धीमी गति से हुआ। शुरू होना तो दूर इसे बनने में ही करीब तीन साल लग गए। करीब तीन माह पहले बिल्डिंग को जिला अस्पताल प्रबंधन को हैंडओवर किया गया है। हालांकि मशीनें और स्टाफ अभी भी नहीं आए हैं। कब तक आएंगे, जिला अस्पताल के जिम्मेदारों को यह भी जानकारी नहीं है। ट्रॉमा सेंटर शुरू न होने की वजह से गंभीर मरीजों को एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है।
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हर माह रेफर करने पड़ते हैं 250 से 300 मरीज

मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि जिला अस्पताल से एक्सीडेंट के मरीज जो रेफर होकर आते हैं उनकी संख्या हर माह करीब 250 से 300 रहती है।
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बेहद जरूरी है गोल्डन ऑवर

सिर में गंभीर चोट लगे मरीजों के लिए शुरू का पहला घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर इस समय में मरीज को सही इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचाना आसान हो जाता है, इसीलिए जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर बनाया गया है। इस सेंटर के लिए शासन की ओर से एक करोड़ 30 लाख रुपये का बजट मिला था।


ये मिलेंगी सुविधाएं

सीटी स्कैन
अल्ट्रासाउंड

रक्त की जांच

आईसीयू
सर्जरी
ट्रॉमा सेंटर की बिल्डिंग हमें हैंड ओवर हो गई है। अभी स्टाफ और मशीनें नहीं मिली हैं। शासन को इससे अवगत कराया गया है। कब तक इसे शुरू कराया जाएगा, अभी साफ नहीं है। कोशिश है कि जल्द शुरू हो जाए। - डॉ. सुदेश कुमार, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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