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Meerut News: खुदा की रहमत पाने का सबसे अहम मौका है तीसरा अशरा
Mon, 09 Mar 2026 08:22 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 09 Mar 2026 08:22 PM IST
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रमजान का तीसरा असरा आज से, मस्जिदों में नमाज, तरावीह और कुरआन पाक की तिलावत जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सरूरपुर। रमजान के पवित्र महीने का तीसरा अशरा मंगलवार से शुरू हो रहा है। इस्लाम धर्म में अशरा की बड़ी मान्यता है। रमजान के इस आखिरी चरण में रोजेदार इबादत में ज्यादा से ज्यादा समय बिताकर अल्लाह से मगफिरत और जहन्नम की आग से पनाह मांगते है। मस्जिदों में नमाज, तरावीह और कुरआन पाक की तिलावत का सिलसिला जारी है।
मौलान सदाकात ने बताया कि रमजान का महीना तीन अशरों में तकसीम किया गया है। तीसरा जहन्नम से निजात का होता है। इसमें अल्लाह अपने बंदों को जहन्नम की आग से आजादी अता करता है। इसलिए रोजेदार इन दिनों में खास तौर पर इबादत, तौबा-इस्तिगफार और दुआओं का एहतिमाम करते हैं। इस अशरे में शब-ए-कद्र भी आती है। जिसकी इबादत हजार महीनों की इबादत से बेहतर मानी गई है। इस कारण रोजेदार रातों में भी जागकर नमाज, तिलावत और जिक्र-ओ-अजकार में मशगूल रहते हैं।
तीसरे अशरे में ज्यादा से ज्यादा दुआ, सदका-खैरात और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। साथ ही अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए नेक रास्ते पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। रमजान का आखिरी अशरा इबादत और खुदा की रहमत पाने का सबसे अहम मौका होता है। इसलिए लोग इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा वक्त अल्लाह की इबादत में गुजारते है और अपने गुनाहों की माफी मांगते है।
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सरूरपुर। रमजान के पवित्र महीने का तीसरा अशरा मंगलवार से शुरू हो रहा है। इस्लाम धर्म में अशरा की बड़ी मान्यता है। रमजान के इस आखिरी चरण में रोजेदार इबादत में ज्यादा से ज्यादा समय बिताकर अल्लाह से मगफिरत और जहन्नम की आग से पनाह मांगते है। मस्जिदों में नमाज, तरावीह और कुरआन पाक की तिलावत का सिलसिला जारी है।
मौलान सदाकात ने बताया कि रमजान का महीना तीन अशरों में तकसीम किया गया है। तीसरा जहन्नम से निजात का होता है। इसमें अल्लाह अपने बंदों को जहन्नम की आग से आजादी अता करता है। इसलिए रोजेदार इन दिनों में खास तौर पर इबादत, तौबा-इस्तिगफार और दुआओं का एहतिमाम करते हैं। इस अशरे में शब-ए-कद्र भी आती है। जिसकी इबादत हजार महीनों की इबादत से बेहतर मानी गई है। इस कारण रोजेदार रातों में भी जागकर नमाज, तिलावत और जिक्र-ओ-अजकार में मशगूल रहते हैं।
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तीसरे अशरे में ज्यादा से ज्यादा दुआ, सदका-खैरात और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। साथ ही अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए नेक रास्ते पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। रमजान का आखिरी अशरा इबादत और खुदा की रहमत पाने का सबसे अहम मौका होता है। इसलिए लोग इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा वक्त अल्लाह की इबादत में गुजारते है और अपने गुनाहों की माफी मांगते है।
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