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Meerut News: सिद्धचक्र विधान से नष्ट हो जाते हैं जन्म जन्मांतर के पाप कर्म
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के नंदीश्वरद्वीप जिनालय में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में पांचवें दिन शांतिधारा करने का सौभाग्य विनोद जैन, चंद्रकिरण जैन को प्राप्त हुआ। क्षेत्र कमेटी के सदस्य व विधान संयोजक विजय कुमार जैन के साथ विधान के सभी पात्रों ने मांडले पर भक्ति भाव के साथ सिद्धों के चरणों में 512 अर्घ्य समर्पित किए। अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य अनिल जैन, अनिता जैन, शोभा जैन, अर्चना जैन, राकेश जैन, रेणू जैन, अंजू जैन, प्रेयांश जैन, अनंतवीर जैन, विजय जैन, राजीव जैन, आशीष जैन आदि श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।
आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने मंगलमय प्रवचन एवं आशीर्वाद द्वारा विधान में शामिल सभी इन्द्रों-इन्द्राणियों के लिए धर्म के मार्ग पर चलकर जीवन को सद्भावना के साथ जीने की भावना व्यक्त की। महाराज ने धर्ममयी भजनों द्वारा विधान को भव्यता प्रदान की। कहा कि विधान को करने से जन्म जन्मांतर के कर्म नष्ट हो जाते हैं। हमें संसार चक्र से बचने के लिए सिद्धों की पूजन भक्ति करनी चाहिए। समस्त क्रियाएं पंडित आशीष जैन शास्त्री व आयुष शास्त्री ने संपन्न कराई।
सायंकालीन सभा में संगीत की मधुर लहरियों के साथ आरती, भक्ति एवं नृत्यों के साथ वातावरण धर्ममयी हो गया। 48 दीपकों से भक्तामर पाठ किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पुरस्कार नीलांजना जैन द्वारा वितरित किए गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, सुनील कुमार जैन, मुकेश जैन, अनिल जैन, राजीव जैन, मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन आदि का पूर्ण सहयोग रहा।
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के नंदीश्वरद्वीप जिनालय में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में पांचवें दिन शांतिधारा करने का सौभाग्य विनोद जैन, चंद्रकिरण जैन को प्राप्त हुआ। क्षेत्र कमेटी के सदस्य व विधान संयोजक विजय कुमार जैन के साथ विधान के सभी पात्रों ने मांडले पर भक्ति भाव के साथ सिद्धों के चरणों में 512 अर्घ्य समर्पित किए। अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य अनिल जैन, अनिता जैन, शोभा जैन, अर्चना जैन, राकेश जैन, रेणू जैन, अंजू जैन, प्रेयांश जैन, अनंतवीर जैन, विजय जैन, राजीव जैन, आशीष जैन आदि श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।
आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने मंगलमय प्रवचन एवं आशीर्वाद द्वारा विधान में शामिल सभी इन्द्रों-इन्द्राणियों के लिए धर्म के मार्ग पर चलकर जीवन को सद्भावना के साथ जीने की भावना व्यक्त की। महाराज ने धर्ममयी भजनों द्वारा विधान को भव्यता प्रदान की। कहा कि विधान को करने से जन्म जन्मांतर के कर्म नष्ट हो जाते हैं। हमें संसार चक्र से बचने के लिए सिद्धों की पूजन भक्ति करनी चाहिए। समस्त क्रियाएं पंडित आशीष जैन शास्त्री व आयुष शास्त्री ने संपन्न कराई।
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सायंकालीन सभा में संगीत की मधुर लहरियों के साथ आरती, भक्ति एवं नृत्यों के साथ वातावरण धर्ममयी हो गया। 48 दीपकों से भक्तामर पाठ किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पुरस्कार नीलांजना जैन द्वारा वितरित किए गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, सुनील कुमार जैन, मुकेश जैन, अनिल जैन, राजीव जैन, मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन आदि का पूर्ण सहयोग रहा।
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