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दस भूखंडों में छिपा एमडीए के कारनामों का राज
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Mon, 13 Nov 2017 10:36 AM IST
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पत्र।
- फोटो : अमर उजाला
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लोहियानगर के दस भूखंडों में मेरठ विकास प्राधिकरण अधिकारियों के कारनामों का राज छिपा है। सामने आ रहा है कि एमडीए अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर इन प्लॉटों को बेच डाला। मूल आवंटियों को तो पता ही नहीं चला कि उनके प्लॉट के नाम पर बड़ा खेल हो गया है। मामला सामने आने पर कमिश्नर ने जांच कराई। अब उप निबंधक कार्यालय से इनका भूखंडों का रिकॉर्ड तलाशा जा रहा है।
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भूखंडों के नाम पर एमडीए कर्मचारियों द्वारा करोड़ाें की हेराफेरी का मामला सामने आ रहा है। एमडीए कर्मचारियों ने पूरी प्लानिंग के साथ इस कारनामे को अंजाम दिया। ऐसेे भूखंडों की सूची तैयारी की गई, जिनकी किश्तें जमा नहीं हो रही थीं। लंबे समय से किश्त जमा न होने के कारण ऐसे आवंटन निरस्त हो जाने चाहिए थे। लेकिन ऐसा नहीं किया। पुराने आवंटियों को यह ही दर्शा दिया कि उसका प्लॉट निरस्त हो गया है। लेकिन रिकॉर्ड में हेराफेरी कर खुद ही नए आवंटी तैयार कर दिए।
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लोहिया नगर में खास खेल
खासतौर पर लोहियानगर में यह खेल सामने आ रहा है। लोहियानगर योजना में शुरुआत में 625 तथा 900 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर भूखंडों का आवंटन हुआ था। काफी प्लॉट निरस्त हुए। एमडीए कर्मचारियों ने अपनी जेब से ही पचास हजार से चार लाख रुपये तक डाल दिए। दो सौ गज के जिस प्लॉट का रेट आज तीस लाख रुपये है, उसके खाते में चार लाख रुपये डालकर उसका खाता दुरुस्त कर दिया गया।
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कमिश्नर ने की जांच तो मचा हड़कंप
मामले का खुलासा होने पर एमडीए में हड़कंप हैं। आनन फानन में दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। पहले तो एमडीए अधिकारी गुपचुप तौर पर जांच करते रहे। लेकिन अब ऐसे दस प्लॉटों के नंबर सामने आए हैं जो संदिग्ध हैं। इन सभी के एकाउंट अपने यहां चेक किए गए। अब उसके बाद उप निबंधक द्वितीय को इन भूखंडों के विक्रय पत्रों की प्रतिलिपि मांगी गई हैं। संयुक्त सचिव अजय कुमार ने इस बाबत उप निबंधक द्वितीय को भूखंडों की पूरी जानकारी के साथ पत्र प्रेषित किया है।
कॉर्नर प्लाट रहे हैं घोटाले बाजों की पहली पसंद
एमडीए में कॉर्नर के प्लॉट गड़बड़ झाला करने वालों की पहली पसंद रहे हैं। कई प्लॉट ऐसे भी हैं जिनके बदले में प्लॉट देने में भी धांधली हुई है। दरअसल जब आवंटी को प्लॉट पर कब्जा नहीं मिलता तो वह बदले में दूसरे प्लॉट के लिए आवेेदन करता है। नियमों को धता बताकर कई योजनाओं में ऐसे प्लॉट बदलने का खेल बड़े पैमाने पर हुआ है। मानक से बड़े प्लॉट दिए गए हैं। इसके अलावा कई आवंटियों को कोने के प्लॉट दिए गए है। वहां जगह ज्यादा होती है। बहाना यह बनाया गया है कि कॉर्नर का प्लॉट होने से जगह ज्यादा चली गई। लेकिन वास्तव में यह जगह सेटिंग से दी गई। उसी माप के दूसरे प्लॉट योजना में होने के बावजूद कॉर्नर के दोगुने प्लॉट तक दिए गए हैं।
लोहियानगर इन दस प्लाटों पर हैं सवाल
भूखंड संख्या रजिस्ट्री तिथि बही नं पृष्ठ क्रमांक
के - 112 03.08.2016 8394 20 7313/16
के- 200 26.08. 2016 8424 32 8025/16
के- 190 05.09.2016 8437 14 8256/16
के- 138 05.09.2016 8437 16 8258/16
के- 184 05.09.02016 8437 24 8268/16
आई- 272 14.09. 2016 8446 48 8462/16
के- 89 14.09.2016 8447 22 8469/16
के- 195 26.09. 2016 8460 14 8769/16
के- 1442 16.09.2016 8449 14 8526/16
के- 350 ---- --- --- ------
कोट
भूखंडों की बिक्री में गड़बड़ी का खेल उजागर हुआ है। मैने जांच दी है। इस सप्ताह यदि वहां से पूरी रिपोर्ट नहीं आई तो देरी करने वाले अधिकारियों पर भी एक्शन होगा। -डॉ. प्रभात कुमार आयुक्त