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12 साल पहले गंगा में डूबा स्कूल, चार साल में बदल गए आठ ठिकाने
Sat, 02 Aug 2025 12:06 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sat, 02 Aug 2025 12:06 AM IST
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चंदक क्षेत्र के गांव फतेहपुर सभाचंद में टिनशेड में चलता परिषदीय स्कूल। संवाद
चंदक/बिजनौर। 12 साल बाद भी फतेहपुर सभाचंद की सरकारी पाठशाला की दशा नहीं बदल सकी। दरअसल साल 2013 में इस स्कूल का भवन गंगा में समा गया, तब से लेकर अब तक यह स्कूल गांव वालों की जगह में चल रहा है। बीते चार साल में स्कूल की जगह आठ बार बदली जा चुकी हैं। फिलहाल सौपाल सिंह के घर के बाहर एक टिनशेड में संचालित स्कूल में छह बालक और सात बालिका पढ़ रहे हैं।
बस्ता लेकर दर दर भटक रहे बच्चे
2013 में गंगा नदी के तेज बहाव में गंगा खादर का गांव फतेहपुर सभाचंद गांव पूरी तरह से गंगा में समा गया था। जिसके बाद सरकार द्वारा गांव के लोगो को दूसरी जगह पर जमीन देकर बसा दिया गया था। सरकार ने ग्रामीणों को तो छत मुहैया करा दी मगर 12 वर्ष बाद भी सरकार गांव के स्कूल के लिए भवन मुहैया नहीं करा पाई।
स्कूल बनने की आस टूटती गई
शिक्षकों ने बताया कि अधिकरियों द्वारा स्कूल भवन जल्द बनवाने की बात कहकर ग्रामीणों के मकानों में स्कूल का संचालन जारी रखा, मगर जैसे-जैस देर होती गई ग्रामीणों ने भी कोई न कोई मजबूरी का हवाला देते हुए अपने मकानों में स्कूल के संचालन से इनकार कर दिया। पिछले चार वर्षों में स्कूल को आठ जगह पर बदला जा चुका है।
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तीन शिक्षक और 13 विद्यार्थी
वर्तमान में गांव निवासी सौपाल सिंह के घर पर कच्ची टीन सेड के अंदर तीन शिक्षक 6 छात्र और 7 छात्राओं को पढ़ा रहे हैं। सौपाल सिंह ने बताया कि पिछले तीन सालों से उन्होंने जगह के साथ अपना निजी शौचालय, बिजली समेत अन्य सुविधाएं स्कूल संचालित करने के लिए दे रखीं हैं। जबकि उनके परिवार का कोई भी बच्चा स्कूल में नहीं पढ़ता।
रसोइया के घर बनता है मिड डे मील
स्कूल भवन नहीं होने के कारण गांव निवासी रसोईया इमलेश अपने घर से ही बच्चों के लिए मिड-डे मील पकाती है। स्कूल प्रधानाध्यापिका रुबी रानी ने बताया के स्कूल भवन न होने के कारण स्कूल को दूसरे गांव जहांगीरपुर में मर्ज कर दिया गया है। हालांकि ग्रामीण स्कूल मर्ज होने का विरोध कर रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि जिस गांव में स्कूल को ले जाया जा रहा है, वह गांव से दो किलोमीटर से भी अधिक दूर है।
स्कूल गंगा में डूब गया था। नए भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया था। बजट मिलते ही स्कूल का निर्माण कराया जाएगा। -प्रभात कुमार, एबीएसए
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बस्ता लेकर दर दर भटक रहे बच्चे
2013 में गंगा नदी के तेज बहाव में गंगा खादर का गांव फतेहपुर सभाचंद गांव पूरी तरह से गंगा में समा गया था। जिसके बाद सरकार द्वारा गांव के लोगो को दूसरी जगह पर जमीन देकर बसा दिया गया था। सरकार ने ग्रामीणों को तो छत मुहैया करा दी मगर 12 वर्ष बाद भी सरकार गांव के स्कूल के लिए भवन मुहैया नहीं करा पाई।
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स्कूल बनने की आस टूटती गई
शिक्षकों ने बताया कि अधिकरियों द्वारा स्कूल भवन जल्द बनवाने की बात कहकर ग्रामीणों के मकानों में स्कूल का संचालन जारी रखा, मगर जैसे-जैस देर होती गई ग्रामीणों ने भी कोई न कोई मजबूरी का हवाला देते हुए अपने मकानों में स्कूल के संचालन से इनकार कर दिया। पिछले चार वर्षों में स्कूल को आठ जगह पर बदला जा चुका है।
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तीन शिक्षक और 13 विद्यार्थी
वर्तमान में गांव निवासी सौपाल सिंह के घर पर कच्ची टीन सेड के अंदर तीन शिक्षक 6 छात्र और 7 छात्राओं को पढ़ा रहे हैं। सौपाल सिंह ने बताया कि पिछले तीन सालों से उन्होंने जगह के साथ अपना निजी शौचालय, बिजली समेत अन्य सुविधाएं स्कूल संचालित करने के लिए दे रखीं हैं। जबकि उनके परिवार का कोई भी बच्चा स्कूल में नहीं पढ़ता।
रसोइया के घर बनता है मिड डे मील
स्कूल भवन नहीं होने के कारण गांव निवासी रसोईया इमलेश अपने घर से ही बच्चों के लिए मिड-डे मील पकाती है। स्कूल प्रधानाध्यापिका रुबी रानी ने बताया के स्कूल भवन न होने के कारण स्कूल को दूसरे गांव जहांगीरपुर में मर्ज कर दिया गया है। हालांकि ग्रामीण स्कूल मर्ज होने का विरोध कर रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि जिस गांव में स्कूल को ले जाया जा रहा है, वह गांव से दो किलोमीटर से भी अधिक दूर है।
स्कूल गंगा में डूब गया था। नए भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया था। बजट मिलते ही स्कूल का निर्माण कराया जाएगा। -प्रभात कुमार, एबीएसए