लाल डायरी में सपा के ताकतवर मंत्री समेत कई चर्चित नाम शामिल
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सिंचाई विभाग के ठेकेदार अजय कुमार के यहां से आयकर विभाग को मिली डायरी को लेकर सिंचाई विभाग सहित ब्यूरोक्रेसी में भी हड़कंप मचा है। डायरी में दर्ज नाम किस किस को बेनकाब करेगा? इसे लेकर विभाग में चर्चाएं हैं। हाल ये है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी फोन पर बात तक करने से बचते नजर आ रहे हैं।
आयकर विभाग ने शुक्रवार सुबह से शनिवार शाम तक सिंचाई विभाग के बड़े ठेकेदार अजय कुमार के यहां मैराथन छापेमारी की। इस छापेमारी में आयकर विभाग को नगदी और ज्वैलरी के नाम पर तो बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी, लेकिन एक बड़ी सफलता के रूप में डायरी हाथ जरूर लगी है। जिसमें पचास से ज्यादा बड़े नाम दर्ज हैं। इनमें मंत्री, शासन स्तर के अधिकारी, सिंचाई विभाग के कई मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंताओं सहित अधिशासी और उससे निचले स्तर तक के अभियंताओं के नाम दर्ज हैं। इन सभी के नामों पर लेन देन के रूपयों के साथ अन्य खर्च दर्ज हैं। सूत्रों के अनुसार इस डायरी में जो लेनदेन दर्ज है वह बहुत ही बड़ा है। अमर उजाला में रविवार को ‘लाल डायरी’ के बारे में प्रकाशित होने पर सिंचाई विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारियों के साथ कर्मचारी तक बाहर के लोगों से दूर की बात आपस में भी बात करने से कतरा रहे हैं।
विदेश यात्रा जाने वाले भी सूची में
अजय चौधरी की फेसबुक पर उसकी महंगी देश विदेश यात्राओं के फोटो हैं। इसके अलावा घर से भी तमाम फोटो मिले हैं। इन फोटो में सिंचाई विभाग के कई बड़े अभियंता अजय के साथ नजर आ रहे हैं। ऐसे में तय है कि अजय कुमार ने ही इन लोगों को उपकृत करने के लिए विदेश यात्राएं करायी हैं। इन सभी पहलुओं पर आयकर विभाग सिंचाई विभाग में तैनात अभियंताओं के सिंडिकेट को खंगालेगा, ये तय है।
निशाने पर एक और अधीक्षण अभियंता
आयकर विभाग ने ठेकेदार अजय चौधरी के यहां छापेमारी के दौरान सिंचाई विभाग के एक और बड़े मगरमच्छ पर निशाना साध लिया है। मेरठ में तैनात रहा यह अधीक्षण अभियंता अब यमुना खंड में तैनात है। यहां तैनाती के दौरान इसने कई बड़े काम अजय कुमार चौधरी को दिलाये हैं।
बसपा सरकार के दौरान एक अधीक्षण अभियंता मेरठ में तैनात रहा था। इस तैनाती के दौरान अजय चौधरी से अधीक्षण अभियंता के करीबी रिश्ते बन गये थे। सपा सरकार आयी तो इस अधीक्षण अभियंता ने सरकार के एक मंत्री से बेहद करीबी रिश्ते के चलते अपनी तैनाती यमुना खंड में करा ली। चूंकि सपा सरकार में अधिकतर बड़े काम यमुना नदी पर ही हुए, तो यहां पर टेंडर भी सबसे ज्यादा निकले। अजय चौधरी और इस अधीक्षण अभियंता की करीबी यहां पर साफ नजर आयी। मथुरा और शामली में नहर बनाने सहित कई बड़े प्रोजेक्ट इस अधीक्षण अभियंता द्वारा अजय चौधरी को दिलाये गये।
विभागीय सूत्रों के अनुसार छापेमारी में इस अधीक्षण अभियंता पर भी आयकर विभाग की नजर टेढ़ी हो गयी है। क्योंकि यमुना के तमाम टेंडरों में यह अधीक्षण अभियंता शामिल नजर आया। इसके बाद जब इस अधीक्षण अभियंता की आम शोहरत आयकर विभाग ने मालूम की, जिसमें पता चला कि सिंचाई विभाग में बड़े खेल करने वालों में यह अधीक्षण अभियंता मुख्य है। इसके बाद आयकर विभाग ने इसे भी निशाने पर ले लिया है। आयकर विभाग इस अभियंता पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। रिकार्ड खंगाला जा रहा है।
गौरतलब है कि सिंचाई विभाग के धनकुबेर ठेकेदार पर आयकर विभाग ने शिकंजा कस दिया है। शुक्रवार को मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा और मुजफ्फरनगर में आयकर विभाग की 10 टीमों ने ठेकेदार अजय कुमार, उसके परिजनों के आफिसों, आवासों के साथ ही अजय के करीबी रहे सिंचाई विभाग के कई मुख्य अभियंताओं और अभियंताओं के यहां छापेमारी की। अजय कुमार के मूल गांव जमालपुर स्थित आवास और मेरठ के गंगानगर स्थित कोठी पर आयकर विभाग की टीम देर रात तक जमी रही। इस दौरान तमाम दस्तावेज टीम ने अपने कब्जे में लिये। इन आवासों से बड़ी संपत्तियों, नगदी, ज्वैलरी आदि के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को आयकर विभाग की टीम ने अपने कब्जे में लिया है।
मूल रूप से मुजफ्फरनगर के ग्राम जमालपुर निवासी अजय कुमार सिंचाई विभाग में ठेकेदारी करते हैं। उनकी दो कंपनी अजय कुमार और अजय कंस्ट्रक्शन कंपनियों के साथ ही उनके पिता और दो भाइयों की भी कंस्ट्रक्शन कंपनी है। अजय कुमार इस समय गंगानगर स्थित कृष्णा गार्डन कालोनी स्थित आलीशान कोठी में रहते हैं। नोटबंदी के दौरान अजय कुमार द्वारा शामली में चल रहे निर्माण कार्य स्थल पर करीब 300 करोड़ रुपये की डस्ट व रोडी आदि का स्टॉक किया गया था।
10 टीमें गठित कर छापेमारी की
आयकर विभाग ने तमाम चैनल पर काम करने के बाद शुक्रवार को एक साथ 10 टीमें गठित कर छापेमारी की। जिसमें ग्राम जमालपुर के आवास, मवाना रोड पर गंगानगर थाने के सामने स्थित कार्यालय, कृष्णा गार्डन कालोनी स्थित कोठी, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता सुधीर कुमार शर्मा के बाउंड्री रोड स्थित सरकारी आवास बंगला नं ए-2, मुख्य अभियंता के कार्यालय, अजय कुमार के नोएडा, गाजियाबाद स्थित कार्यालयों के अलावा सिंचाई विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता के आवास व कार्यालय सहित दस जगह छापे मारे।
अजय कुमार की कृष्णा गार्डन स्थित कोठी पर आयकर विभाग की टीम ने सुबह 7.30 बजे छापा मारा। टीम के कुछ अधिकारी आवास पर ही रूक गये और कुछ अधिकारी अजय कुमार को उनके मवाना रोड स्थित कार्यालय ले गये। जहां से टीम ने तमाम दस्तावेज इकट्ठा किया। टीम तमाम दस्तावेज लेकर अजय कुमार के आवास पर आ गयी। इसके बाद रात तक आयकर विभाग के अधिकारियों का अजय कुमार के घर आना जाना लगा रहा। इस दौरान दोपहर को करीब 3.30 बजे भी एक टीम कुछ फाइलें लेकर अजय कुमार के घर में गयी।
जैन के बाद अजय
अजय कुमार के कृष्णा गार्डन कोठी के अलावा जमालपुर स्थित आवास से आयकर विभाग को बड़ी संपत्तियों के कागजात मिलने की बात कही जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इन संपत्तियों की कीमत कई सौ करोड़ है। इसके अलावा बैंक खाते और लॉकर भी आयकर विभाग ने अपने कब्जे में ले लिये हैं। वहीं घर की तलाशी भी हो रही है। जिसमें नगदी के अलावा बैंक खातों में जमा धन के अलावा लॉकर में भी बड़ी मात्रा में नगदी व ज्वैलरी होने की संभावना जताई जा रही है। आयकर विभाग की टीम को छापे में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हाथ लगे हैं। चर्चा है कि इन दस्तावेजों से कई सफेदपोश नेता और वरिष्ठ अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
300 करोड़ की रोड़ी, डस्ट का स्टॉक बना कार्रवाई का आधार
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके जैन के यहां नोटबंदी के बाद जनवरी में आयकर विभाग ने छापा मारा था। जिसमें ईव्ज चौराहा स्थित पीएनबी में उनके लॉकर से 2.67 करोड़ रुपये की नगदी व 30 किलो चांदी की ईंटें बरामद हुई थी। आरके जैन के यहां जब छापा मारा तो अफसरों और ठेकेदारों में अजय चौधरी के नाम को लेकर चर्चा थी। सूत्रों की मानें तो आरके जैन को भी अजय चौधरी पर शक था। इस दौरान जब आयकर विभाग की विजीलेंस टीम ने आरके जैन से पूछताछ की तो उन्होंने अजय चौधरी के भी कारनामों का चिट्ठा खोल दिया। इसके बाद अजय चौधरी आयकर विभाग के निशाने पर आ गया और विजिलेंस टीम ने उसका पूरा रिकार्ड इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
आयकर विभाग ने अजय चौधरी को अधिशासी अभियंता आरके जैन के यहां मारे गये छापे के बाद निशाने पर लिया। इसके बाद अजय चौधरी के खिलाफ लगातार टीम जांच करते हुए साक्ष्य जुटाती रही। जिसमें शामली की साइट पर इकट्ठा किया गया करीब 300 करोड़ की रोडी डस्ट के स्टॉक के साथ इसके बाद हुए लगातार भुगतान के सिलसिलों ने आयकर विभाग के कान खड़े कर दिये। यह स्टॉक ही अजय चौधरी के खिलाफ कार्रवाई का बड़ा आधार बना, जिसमें आयकर विभाग की नजर में कई अभियंताओं सहित नेता और अधिकारी भी आये।
लगातार भुगतान से संदेह हुआ मजबूत
नोट बंदी के बाद अजय चौधरी के कामों का लगातार प्राथमिकता पर भुगतान होने लगा। ऐसे में आयकर विभाग का संदेह और ज्यादा पुख्ता हुआ। वहीं आयकर विभाग को भी यह भी शक हुआ कि कहीं अजय चौधरी के कामों में विभागीय अधिकारियों की तो पार्टनरशिप नहीं है। क्योंकि सिंचाई विभाग के अधिकांश काम अजय चौधरी और उसके करीबियों के पास थे। ऐसे में विभागीय अधिकारियों की हिस्सेदारी के सबूत आयकर विभाग ने जुटाने का प्रयास किया, लेकिन इस संबंध में कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले।
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