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मानकों पर खरी नहीं उतर रही यहां तैयार की जा रहीं पीपीई किट

Mon, 27 Apr 2020 01:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2020 01:30 AM IST
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The PPE kit was being prepared here not meeting the standards
मानकों पर खरी नहीं उतर रही यहां तैयार की जा रहीं पीपीई किट
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मेरठ। कोरोना योद्धाओं के बचाव का सबसे महत्वपूर्ण हथियार पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) में खामियों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। चीन से आई पीपीई किट में मिली कमियों के अतिरिक्त देश में तैयार की गई पीपीई किट भी मानकों के विपरीत हैं। इसके चलते किट के तमाम दोष सामने आए हैं।
मेरठ में पिछले दिनों पीपीई किट बनाने की फर्जी कंपनी पकड़ी गई। यह गुणवता रहित मानकों के विपरीत किट सप्लाई कर रही थी। ऐसे में किट की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है। वहीं, फर्जी किट बनाने का धंधा खूब फल फूल रहा है। पीपीई के नाम पर अधिकतर इकाइयां रेनकोट बना रही हैं। ये कोविड-19 वार्ड में ड्यूटी करने वाले चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टाफ के पहनने योग्य कतई नहीं हैं।
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बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं
पीपीई किट सिक्स लेयर होती है। हालांकि यहां किट के डिजाइन भी कंपनियों ने अपने अनुसार तय कर लिए हैं। किट सील हीटिंग नहीं की गई हैं। बैक्टीरिया पेनिट्रेशन टेस्ट तो एक या दो फीसदी कंपनियों ने ही कराया है। अन्यथा सभी अपने अनुसार छोटे-बड़े आकार की किट बनाकर बाजार में उतार रही हैं। ये मेडिकल स्टाफ के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं। ये कंपनियां किट के लिए कपड़ा भी अपने अनुसार लगा रही हैं। बाजार में किट बनाने की होड़ में घरों में सिलकर बड़े डीलर को बेची जा रही हैं।
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गंभीरता से नहीं हुई जांच
पीपीई किट बनाने वाली इकाइयों द्वारा मानक का पालन किया जा रहा है या नहीं। इसकी जांच को लेकर प्रशासन द्वारा प्रारंभ से ही गंभीरता नहीं बरती गई। खेल उपकरण, ट्रैक सूट बनाने वाली इकाइयों ने लॉकडाउन में इकाई खोलने की अनुमति लेकर किट बनाना शुरू कर दी हैं। कुछ बड़ी कंपनियां अपने स्तर से सैंपल की जांच कराकर किट बनाने की अनुमति ले आईं। वहीं, जिला उद्योग विभाग सक्रिय हुआ और अपने स्तर से नमूनों की सैंपलिंग कराने का आदेश दिया।
टेस्ट है जरूरी
- पीपीई किट में सबसे अहम सिटरा टेस्ट है। यह कोयंबटूर की लैब में होता है। इसमें कपड़े के अंदर बैक्टीरिया पेनिट्रेशन की जांच होती है। जिससे वायरस पानी व खून के सहारे अंदर न जाए।
- हीट सील टेस्ट होता है। किट में जहां भी सिलाई है उन छेदों को हिटिंग से फिल होना चाहिए। यदि छेद हैं तो वह किट पहनने योग्य नहीं है। इसके साथ वाटर पेनिट्रेशन, किट के अंदर का तापमान। किट की सिलाई। मेटिरियल की गुणवत्ता को भी जांचा जाता है।
- मेडिकल स्टाफ के लिए सिक्स लेयर किट पहनने योग्य मानी गई है। इसमें सिर के बाल से पैर के नाखून और तलवे का ढका हुआ हो। जिसमें व्यक्ति सांस भी केवल मास्क के माध्यम से ले सकता है।
डॉक्टरों को पीपीई किट पहनने की हिदायत
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण से बचाने के लिए पीपीई किट दी जाती है। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के मुताबिक कोरोना वायरस से संक्रमितों का इलाज करने में जुटे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को पीपीई किट पहनने की हिदायत दी गई है। किट में हेड कवर, ग्लव्स, शू कवर, चश्मा, मास्क व कम्पलीट सूट होना चाहिए।

लगातार मिल रही घटिया किट की शिकायत
चीन से मिलीं पर्सनल प्रोटेक्टिव किट्स को मानक पर खरा नहीं उतरने के कारण खारिज कर दिया है। उन्हें वापस चीन भेजा जा रहा है। इस पर देश के विभिन्न हिस्सों में स्वास्थकर्मियों ने प्रदर्शन भी किए। मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की तरफ से भी शिकायत दर्ज कराई गई है।
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