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पुलिस ने हमें पीटा था... अब नहीं चाहते किसी के खिलाफ कार्रवाई

Tue, 20 May 2025 02:14 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 20 May 2025 02:14 AM IST
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The police had beaten us... now we don't want any action

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मेरठ। लावड़ कस्बे में दो भाइयों के बीच झगड़े के मामले में दबिश के दौरान अनुसूचित जाति की महिलाओं को पीटने के मामले में समझौता हो गया। पीड़ित पक्ष ने सोमवार को एसएसपी कार्यालय में शपथ-पत्र देकर किसी भी कार्रवाई से इन्कार कर दिया। इस मामले में एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने थाना प्रभारी नितिन पांडेय, चौकी प्रभारी इंद्रेश विक्रम सिंह, दरोगा सुमित गुप्ता व पवन सैन और सिपाही वसीम को लाइन हाजिर कर दिया था।
लावड़ कस्बे की राशन वाली गली में सात मई को जमीन को लेकर सुनील और उसके भाई सुशील में विवाद हो गया था। इसके बाद सुनील ने लावड़ चौकी पर तहरीर दी थी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और सुशील को गिरफ्तार कर थाने लाने लगी। आरोप है कि परिवार ने दरोगा अमित कुमार को मारपीट कर घायल कर दिया था। दरोगा से मारपीट की सूचना पर इंचौली थाना प्रभारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि सुशील के परिजनों ने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने परिवार पर लाठी बरसा दीं थीं। महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया।
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इसके बाद पुलिस ने सुशील और उसकी पत्नी कविता और मां रोशनी देवी के अलावा कई अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस का महिलाओं को पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। सुशील की मां रोशनी देवी की ओर से पुलिसकर्मियों के खिलाफ एसएसपी को शिकायती पत्र दिया था। एसएसपी ने पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करते हुए जांच एसपी क्राइम को सौंपी थी। सोमवार को सुशील पक्ष के लोग एसएसपी कार्यालय पहुंचे। रोशनी देवी की ओर से दिए गए शपथ पत्र में कहा गया कि पंचायत व समाज के जिम्मेदार लोगों के समझाने पर अब उनके बीच कोई विवाद शेष नहीं रह गया है। इसलिए कोई कार्रवाई इस मामले में हम नहीं चाहते हैं।
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अखिलेश यादव ने की थी पोस्ट

पुलिस की इस बर्बरता का वीडियो पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करते हुए भाजपा पर निशाना साधा था। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया। सरधना विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ितों के साथ एसएसपी कार्यालय पर धरना दिया था। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी थी। कांग्रेस के अलावा अन्य राजनीतिक दलों के नेता भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे।
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