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आज भी द्रोपदी के श्राप से मुक्त नहीं हुआ हस्तिनापुर

Sun, 05 Jul 2020 01:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2020 01:09 AM IST
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the hastinapur were not free of draupdi curse till date
हस्तिनापुर स्थित श्री प्राचीन पांडवेश्वर महादेव मंदिर।
हस्तिनापुर। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम स्थगित होते ही कस्बे में द्रोपदी के श्राप की फिर से चर्चा शुरू हो गई। लोगों ने कहा कि आज भी हस्तिनापुर द्रोपदी के श्राप से मुक्त नहीं हुआ है। शुक्रवार के अंक में अमर उजाला में द्रोपदी के श्राप और महात्मा विदुर की भविष्यवाणी की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पांच अप्रैल को हस्तिनापुर से पौधरोपण कार्यक्रम की शुरूआत करनी थी। इसके लिए तैयारी पूरी जोरों से चल रही थी। इससे यहां की जनता में काफी उत्साह था। शनिवार दोपहर को मुख्यमंत्री का कार्यक्रम स्थगित हो गया। इसका पता चलते ही लोगों में मायूसी छा गई। उन्होंने कहा कि लगता है कि हस्तिनापुर आज भी द्रोपदी के श्राप से मुक्त नहीं पाया है। लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व कौरव और पांडवों के बीच हस्तिनापुर में शतरंज का खेल खेला गया था। इसमें कौरवों ने पांडवों को हराकर द्रोपदी को जीत लिया था। इसके बाद भरी सभा में द्रोपदी का चीर हरण किया गया था। इस पर द्रोपदी ने श्राप दिया था कि जहां स्त्री का अपमान होता है वहां हमेशा बदहाली ही रहती है।
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गंगा यात्रा के दौरान भी टला था दौरा
27 जनवरी को गंगा यात्रा में भी योगी आदित्यनाथ के आने की पूरी संभावना थी, लेकिन किन्ही कारणों कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था। इसके बाद अब पौधरोपण से लोगों में क्षेत्र के विकास की उम्मीद जगी थी, लेकिन शनिवार को कार्यक्रम स्थगित होने के बाद फिर से लोगों को मायूसी हाथ लगी।
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