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पश्चिमी यूपी में ठंड का कहर, टूटा 38 साल का रिकॉर्ड, ये रहे ज्यादा सर्दी के पांच बड़े कारण

Sat, 30 Jan 2021 12:23 PM IST
कपिल kapil मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 30 Jan 2021 12:23 PM IST
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The cold broke the 38 year record in western Uttar Pradesh
ठंड से ठिठुरते दिखे शहरवासी - फोटो : अमर उजाला

इस बार जनवरी में सर्दी ने 38 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। इसका कारण इन ढाई माह में अब तक 20 दफा पश्चिमी विक्षोभ बनना है। कड़ाके की ठंड का असर अभी दो फरवरी तक और तेज रहेगा। शीतलहर तेज होने के साथ घना कोहरा छाएगा।

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मौसम विशेषज्ञ डॉ. यूपी शाही के अनुसार पिछले वर्षों में पूरे सर्दी सीजन में 8 से 10 बार ही पश्चिमी विक्षोभ बना, लेकिन इस बार लगातार नए विक्षोभ बनने से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इस बार सर्दी के साथ कोहरा ज्यादा रहा है, तो शीतलहर का असर भी लगातार बना है। 
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पहले जैसे बोलते थे कि चिल्ला चल रहा है, ऐसे ही सर्दी का असर बना है। फरवरी आने को तैयार है और अभी कोहरा व शीतलहर का असर कम होता नहीं दिख रहा है। 31 जनवरी को फिर से पश्चिमी विक्षोभ बन रहा है। दो फरवरी तक कोहरा और शीतलहर रहेगी। एक फरवरी से दिन में थोड़ी राहत मिल सकती है।
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जनवरी में ये रही सबसे सर्द रात 
तारीख       न्यूनतम 
1                  3 
14              2.8 
26              4.2 
27              2.4 
29              3.1

यह भी पढ़ें: राकेश टिकैत के आंसुओं ने फूंकी किसान आंदोलन में जान, महापंचायत में दिखा असर, देखें तस्वीरें

ज्यादा सर्दी के पांच प्रमुख कारण
- इस बार सबसे ज्यादा पश्चिमी विक्षोभ बन रहे हैं 
- पहाड़ों पर लगातार बर्फबारी हो रही है 
- अलनीनो के चलते ठंड का असर शुरू से बना है 
- पहाड़ों से आने वाली उत्तर पश्चिमी हवाएं ठंड को बढ़ाती हैं 
- पिछले सालों में मजबूत नहीं थे पश्चिमी विक्षोभ 

फसलों का दुश्मन है पाला
मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन. सुभाष के अनुसार कोहरा और पाला के लगातार पड़ने से फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे आलू, सरसों, टमाटर, मिर्च, बैंगन, मटर, चना आदि फसलों को नुकसान पहुंचता है। पाले के प्रभाव से फल मर जाते है और फूल झड़ने लगते हैं। पैदावार कमी हो जाती है और बीमारियां लगती हैं। पाले से फसल को बचाने के लिए हल्की सिंचाई बहुत आवश्यक है। 

एक्यूआई 300 के पार 
कोहरा और धुंध के चलते एक्यूआई फिर से बढ़ गया। शुक्रवार को यह 352 दर्ज किया गया। आगे इसमें गिरावट के आसार हैं।

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