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गुटबाजी खींचतान, जिला महानगर अध्यक्ष के लिए सपा में होगा घमासान
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मेरठ। समाजवादी पार्टी में जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष पद के लिए घमासान शुरू होने वाला है। गुटबाजी और आपसी खींचतान के बीच निष्क्रिय हो चले संगठन को मजबूत करने की कवायद में प्रदेश के जनपदों में जिला और महानगर इकाइयों के साथ प्रकोष्ठ का गठन शुरू हो गया है। मेरठ में जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष पद की दौड़ में 10 से ज्यादा लोग चल रहे हैं। इसी माह जिलाध्यक्ष की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।
करीब चार माह पहले समाजवादी पार्टी हाईकमान ने सभी इकाइयों की कमेटियों को भंग कर दिया था। अब नए सिरे से पदाधिकारी बनाए जा रहे हैं। सोमवार को बागपत, एटा, हापुड़, ललितपुर, हमीरपुर, आंबेडकर नगर, बाराबंकी, देवरिया और बलिया के जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी गई। इनमें मुस्लिम, जाट, प्रजापति, यादव, पाल पर दांव खेला गया है। मेरठ में भी जिलाध्यक्ष पद के लिए दावेदार सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि यहां महानगर में मुस्लिम और जिले में जाट बिरादरी वाले पर दांव खेला जाएगा।
निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह और पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह सपा की जिले की कमान संभालने के लिए प्रयासरत हैं। इनके अलावा अतुल प्रधान या सीमा प्रधान, ओमपाल गुर्जर, ओपी राणा, उदयवीर सिंह, जितेंद्र गुर्जर आदि के नाम जिलाध्यक्ष पद के लिए चर्चाओं में है। इसी तरह महानगर में निवर्तमान जिलाध्यक्ष आदिल चौधरी, पूर्व महानगर अध्यक्ष इसरार सैफी और शहर विधायक रफीक अंसारी आदि के नाम चल रहे हैं। इनके अलावा कुछ नाम ऐसे भी हैं, जिनकी चर्चा तो नहीं हो रही लेकिन वह अंदरखाने पद पाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। अपने-अपने पक्ष में हाईकमान को तर्क दे रहे हैं। वह यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें जिम्मेदारी मिली तो संगठन को गांव और नगर में मोहल्ला स्तर पर मजबूती प्रदान करेंगे। उधर, हाईकमान भी जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर ऐसे सपाई को आसीन करना चाहता है जो सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ खुलकर मोर्चा संभाल सके। सरकार के खिलाफ होने वाले धरना-प्रदर्शनों में पार्टी की ताकत का एहसास करा सके।
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गुटबाजी और आपसी खींचतान हावी
सपाइयों में इन दिनों गुटबाजी और आपसी खींचतान हावी है। एक गुट निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, रफीक अंसारी और आदिल चौधरी आदि हैं तो दूसरी तरफ पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह, गोपाल अग्रवाल और गुलाम मोहम्मद आदि हैं। इनके अलावा अतुल प्रधान और पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर की अपने-अपने रास्ते हैं।
हाईकमान की आंदोलन में भूमिका पर भी नजर
सूत्रों का कहना है कि सपा हाईकमान जातिगत समीकरण के अलावा यह भी देख रही है कि सीएए के विरोध में चल रहे आंदोलन में कौन सपा नेता मुस्लिम आबादी से जुड़ रहा है। कांग्रेस मुस्लिमों को साधने की कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। ऐसे में सपा को और मेहनत करनी होगी। जहां मृतकों के परिजनों को कांग्रेसियों ने एक-एक लाख रुपये दिए, वहीं सपा ने 5-5 लाख रुपये दिए हैं।
संगठन पूरी तरह से मजबूत
पार्टी हाईकमान जिसे भी जो भी जिम्मेदारी देगा, वह स्वीकार होगा। जिले में पार्टी काफी मजबूत है। संगठन पूरी तरह से एक साथ खड़ा हुआ है। - राजपाल सिंह, निवर्तमान जिलाध्यक्ष सपा
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करीब चार माह पहले समाजवादी पार्टी हाईकमान ने सभी इकाइयों की कमेटियों को भंग कर दिया था। अब नए सिरे से पदाधिकारी बनाए जा रहे हैं। सोमवार को बागपत, एटा, हापुड़, ललितपुर, हमीरपुर, आंबेडकर नगर, बाराबंकी, देवरिया और बलिया के जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी गई। इनमें मुस्लिम, जाट, प्रजापति, यादव, पाल पर दांव खेला गया है। मेरठ में भी जिलाध्यक्ष पद के लिए दावेदार सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि यहां महानगर में मुस्लिम और जिले में जाट बिरादरी वाले पर दांव खेला जाएगा।
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निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह और पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह सपा की जिले की कमान संभालने के लिए प्रयासरत हैं। इनके अलावा अतुल प्रधान या सीमा प्रधान, ओमपाल गुर्जर, ओपी राणा, उदयवीर सिंह, जितेंद्र गुर्जर आदि के नाम जिलाध्यक्ष पद के लिए चर्चाओं में है। इसी तरह महानगर में निवर्तमान जिलाध्यक्ष आदिल चौधरी, पूर्व महानगर अध्यक्ष इसरार सैफी और शहर विधायक रफीक अंसारी आदि के नाम चल रहे हैं। इनके अलावा कुछ नाम ऐसे भी हैं, जिनकी चर्चा तो नहीं हो रही लेकिन वह अंदरखाने पद पाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। अपने-अपने पक्ष में हाईकमान को तर्क दे रहे हैं। वह यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें जिम्मेदारी मिली तो संगठन को गांव और नगर में मोहल्ला स्तर पर मजबूती प्रदान करेंगे। उधर, हाईकमान भी जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर ऐसे सपाई को आसीन करना चाहता है जो सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ खुलकर मोर्चा संभाल सके। सरकार के खिलाफ होने वाले धरना-प्रदर्शनों में पार्टी की ताकत का एहसास करा सके।
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गुटबाजी और आपसी खींचतान हावी
सपाइयों में इन दिनों गुटबाजी और आपसी खींचतान हावी है। एक गुट निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, रफीक अंसारी और आदिल चौधरी आदि हैं तो दूसरी तरफ पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह, गोपाल अग्रवाल और गुलाम मोहम्मद आदि हैं। इनके अलावा अतुल प्रधान और पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर की अपने-अपने रास्ते हैं।
हाईकमान की आंदोलन में भूमिका पर भी नजर
सूत्रों का कहना है कि सपा हाईकमान जातिगत समीकरण के अलावा यह भी देख रही है कि सीएए के विरोध में चल रहे आंदोलन में कौन सपा नेता मुस्लिम आबादी से जुड़ रहा है। कांग्रेस मुस्लिमों को साधने की कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। ऐसे में सपा को और मेहनत करनी होगी। जहां मृतकों के परिजनों को कांग्रेसियों ने एक-एक लाख रुपये दिए, वहीं सपा ने 5-5 लाख रुपये दिए हैं।
संगठन पूरी तरह से मजबूत
पार्टी हाईकमान जिसे भी जो भी जिम्मेदारी देगा, वह स्वीकार होगा। जिले में पार्टी काफी मजबूत है। संगठन पूरी तरह से एक साथ खड़ा हुआ है। - राजपाल सिंह, निवर्तमान जिलाध्यक्ष सपा