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हस्तिनापुर में खुलेंगे बड़े राज: दूसरे दिन खुदाई हुई तेज, मिली कुछ वस्तुएं और दीवारों के अवशेष

Fri, 18 Feb 2022 01:22 AM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 18 Feb 2022 01:22 AM IST
सार

हस्तिनापुर में ऐतिहासिक टीले पर खुदाई तेज हो गई। वहीं खुदाई ेके दौरान कुछ वस्तुएं और दीवारों के अवशेष मिले हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। 

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The Archaeological Department has intensified the excavation on the mound in Hastinapur
हस्तिनापुर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

ऐतिहासिक महत्व के उल्टा खेड़ा में गुरुवार को दूसरे दिन खुदाई तेज कर दी गई। पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि 20 फीट नीचे गहराई तक खुदाई की जाएगी। इसके बाद ही कई अनसुलझे रहस्य बाहर आने की पूरी संभावना बनी हुई है। इसके लिए एक-दो महीने लगातार खुदाई का क्रम जारी रहेगा। दूसरे दिन यहां कुछ वस्तुएं और दीवारों के अवशेष मिले हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। 

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हस्तिनापुर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 1952 में उत्खनन किया था। अगस्त 2021 में भी यहां काम शुरू हुआ पर बारिश की वजह से बंद हो गया था। बुधवार को यहां फिर से खुदाई शुरू की गई है। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के साथ यहां इतिहास से जुड़े कुछ रिसर्चर भी प्राचीन अवशेषों को तलाशने के लिए लगाए गए हैं। अभी तक हुई खुदाई के दौरान कई प्राचीन दीवारें और अवशेष विभाग की टीम को प्राप्त हुए हैं। 
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वहीं सभी अवशेषों को पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा पानी से धुलाई कर निकाला जा रहा है और उन्हें पैकिंग कर निशान लगाया जा रहा है। यहां से उन्हें जांच के लिए पुरातत्व विभाग की प्रयोगशाला में भेजा जाएगा।  
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रघुनाथ महल और अमृत कूप के पास हुई खुदाई 
गुरुवार को पांडव टीले पर रघुनाथ महल और अमृत कूप के पास खुदाई का कार्य किया गया। प्राचीन रहस्य को जानने के लिए पुरातत्व विभाग की टीम लगातार 60 दिन तक यहां पर खुदाई कार्य करेगी। यहां से निकलने वाले सभी प्राचीन अवशेषों को हस्तिनापुर में बनने वाले नेशनल म्यूजियम में रखा जाएगा। खुदाई के बाद इस टीले को दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।


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उधर, नेचुरल साइंस ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रियंक भारती ने कहा कि उन्हें भी रिसर्च के दौरान प्राचीन काल से जुड़े अवशेष यहां से प्राप्त हुए थे, जिन्हें एएसआई को सौंप दिया गया था। 

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शिक्षाविद रमेश बैठक वालों ने कहा कि खुदाई में मिलने वाले महत्वपूर्ण अवशेषों के अध्ययन से इतिहास के बारे में जानकारी मिलेगी। 

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