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योगी सरकार में खूब चल रहा बुलडोजर: पचास हजार के इनामी की संपत्ति कुर्क, शामली में भी हुई बड़ी कार्रवाई
Fri, 25 Mar 2022 12:44 AM IST
कपिल kapil
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
Published by: कपिल kapil
Updated Fri, 25 Mar 2022 12:44 AM IST
सार
योगी सरकार में अपराधियों के घरों पर जमतक बुल़ाजोर चल रहा है। जहां मुजफ्फरनगर में 50 हजार के इनामी की संपत्ति को कुर्क किया तो को वहीं शामली जनपद भी बड़ी कार्रवाई हुई।
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शामली में चलता बुलडोजर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने पर अपराधियों की शामत आ गई है। गुरुवार को मुजफ्फरनगर और शामली जिले में बड़ी कार्रवाई हुई।
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में कोतवाली व मुरादाबाद पुलिस ने किदवईनगर निवासी पचास हजार के इनामी परवेज सैफी पुत्र सईद की संपत्ति कुर्क कर ली। कोतवाली प्रभारी आनंद देव मिश्र ने बताया कि आरोपी के खिलाफ थाना बिलारी मुरादाबाद में वर्ष 2020 में मुकदमा दर्ज हुआ है। इस मामले में वहां की पुलिस ने कोर्ट से आरोपी की संपत्ति कुर्क करने के आदेश प्राप्त किए थे।
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बता दें कि गुरुवार को मुरादाबाद पुलिस कोतवाली आई थी। इसके बाद उनकी टीम मुरादाबाद पुलिस के साथ आरोपी के घर पहुंची और उसकी संपत्ति कुर्क कर सामान कोतवाली ले आई। आरोपी का मकान का कुछ हिस्सा गिराया गया है। आरोपी पर पचास हजार का इनाम था। इस मामले में कार्रवाई की जा रही है।
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शामली में भी चला बुलडोजर
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री पद के रूप में शपथ ग्रहण से एक दिन पहले कैराना में शत्रु संपत्ति की जमीन पर किए जा रहे अनाधिकृत निर्माण को प्रशासन ने बुलडोजर चलवाकर ध्वस्त करा दिया।
सरकार के गठन से पहले ही पुलिस प्रशासन अवैध निर्माण और शत्रु संपत्तियों के खिलाफ सख्त हो गया है। कैराना नगर के रामड़ा रोड पर शत्रु संपत्ति की करीब 13 बीघा जमीन है। पिछले कई दिनों से इस भूमि पर कुछ व्यक्तियों द्वारा अनाधिकृत निर्माण कर कराया जा रहा था। मकान के चारों ओर की दीवार बनाकर मकान पर जल्द ही लिंटर डालने की तैयारी कर दी गई है।
शामली में चलता बुलडोजर
- फोटो : amar ujala
गुरुवार को तहसीलदार प्रियंका जायसवाल, नायब तहसीलदार व राजस्व विभाग की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। जिसके बाद तहसीलदार के निर्देश पर अवैध रूप से बनाए जा रहे मकान पर बुलडोजर चला। इसके साथ ही कुछ दूरी पर कपड़े धोने के लिए बनाए गए एक चबूतरे और एक प्लॉट के चारों ओर बनाई गई ईंटों की चहारदीवारी को भी बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया।
तहसीलदार ने बताया कि यहां पर 13 बीघा शत्रु संपत्ति है। कुछ लोग इस पर अनाधिकृत निर्माण कर रहे थे। जिनको एक दिन पहले थाने में भी बैठाया गया था, लेकिन इसके बावजूद भी निर्माण कार्य जारी था। प्रशासन के संज्ञान में दो-तीन दिन से मामला आया था। वहीं बाकी बचे अनाधिकृत निर्माण को शाम तक हटाने की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही पुलिस को कानूनी कार्रवाई के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।
ये होती हैं शत्रु संपत्ति
बताया गया है कि 1947 में देश विभाजन, 1962 भारत चीन युद्ध व 1965 व 71 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान जो भारतवासी पाकिस्तान या चीन में जाकर बस गए थे और वहां की नागरिकता ले ली थी। ऐसे लोगों की चल-अचल संपत्ति भारत में रह गई थी। उसको भारत सरकार ने शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया था। शत्रु संपत्ति केवल सरकार की ही है।
निर्माण की प्रशासन को नहीं लगी भनक
बताया गया कि शत्रु संपत्ति की जमीन पर पिछले कई दिनों से कुछ व्यक्तियों द्वारा अनाधिकृत निर्माण कराया जा रहा था। हैरत की बात यह है कि प्रशासन को इसकी पहले भनक भी नहीं लगी। मामले में हल्का लेखपाल की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
यह भी पढ़ें: यह भी पढ़ें: रुला देंगी ये तस्वीरें: आखिर मासूम ने किसी का क्या बिगाड़ा था, खौफनाक तरीके से उतारा मौत के घाट, नहीं कांपे हत्यारों के हाथ
किसी के पास नहीं है रजिस्ट्री
राजनीतिक रसूख रखने वाले व्यक्ति ने शत्रु संपत्ति पर प्लाट काटकर जरूरतमंद लोगों को बेच तो दिए थे, लेकिन शत्रु संपत्ति होने के कारण उनकी रजिस्ट्री नहीं हो सकी। जिस कारण किसी भी व्यक्ति के पास रजिस्ट्री के दस्तावेज नहीं मिले, हालांकि कब्जे सभी ने कर रखे हैं।
तहसीलदार ने बताया कि यहां पर 13 बीघा शत्रु संपत्ति है। कुछ लोग इस पर अनाधिकृत निर्माण कर रहे थे। जिनको एक दिन पहले थाने में भी बैठाया गया था, लेकिन इसके बावजूद भी निर्माण कार्य जारी था। प्रशासन के संज्ञान में दो-तीन दिन से मामला आया था। वहीं बाकी बचे अनाधिकृत निर्माण को शाम तक हटाने की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही पुलिस को कानूनी कार्रवाई के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।
ये होती हैं शत्रु संपत्ति
बताया गया है कि 1947 में देश विभाजन, 1962 भारत चीन युद्ध व 1965 व 71 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान जो भारतवासी पाकिस्तान या चीन में जाकर बस गए थे और वहां की नागरिकता ले ली थी। ऐसे लोगों की चल-अचल संपत्ति भारत में रह गई थी। उसको भारत सरकार ने शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया था। शत्रु संपत्ति केवल सरकार की ही है।
निर्माण की प्रशासन को नहीं लगी भनक
बताया गया कि शत्रु संपत्ति की जमीन पर पिछले कई दिनों से कुछ व्यक्तियों द्वारा अनाधिकृत निर्माण कराया जा रहा था। हैरत की बात यह है कि प्रशासन को इसकी पहले भनक भी नहीं लगी। मामले में हल्का लेखपाल की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
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किसी के पास नहीं है रजिस्ट्री
राजनीतिक रसूख रखने वाले व्यक्ति ने शत्रु संपत्ति पर प्लाट काटकर जरूरतमंद लोगों को बेच तो दिए थे, लेकिन शत्रु संपत्ति होने के कारण उनकी रजिस्ट्री नहीं हो सकी। जिस कारण किसी भी व्यक्ति के पास रजिस्ट्री के दस्तावेज नहीं मिले, हालांकि कब्जे सभी ने कर रखे हैं।