आतंकियों के निशाने पर अब पश्चिमी यूपी युवा हैं, जिन्हें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी खुफिया तरीके से ट्रेनिंग भी दी रही है। यह खुलासा खुफिया एजेंसियों की जांच में सामने आया है। वहीं गुरूवार को देवबंद से दो आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद यह बात और भी पुख्ता हो गई है।
दुनिया भर में तालीम की नगरी के नाम से विख्यात देवबंद को आतंकी कनेक्शन बदनाम कर रहा है। एनआईए, एटीएस द्वारा कोई आतंकी पकड़ा जाता है तो उसका कनेक्शन किसी न किसी रूप में देवबंद से कनेक्शन निकलता रहा है। अब एटीएस ने देवबंद से ही जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी गिरफ्तार किए हैं, जिससे लोग फिर सवाल उठा रहे है कि आखिर देवबंद में बार बार इस तरह की गतिविधियां क्यों सामने आ रही हैं।
देवबंद में दारुल उलूम इस्लामिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र है, जो न केवल हिंदुस्तान बल्कि विदेशों तक विख्यात है। देश दुनिया के युवा यहां आकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। इसके अलावा भी देवबंद में बहुत से मदरसे हैं, जहां से दीनी तालीम दी जाती है।
इस लिहाज से देवबंद को तालीम की नगरी कहा जाने लगा है। गुरूवार को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली और आकिब अहमद मलिक की गिरफ्तारी में भी यह बात उजागर हुई कि वह देवबंद में पढ़ाई के बहाने पहुंचे थे और यहां तालीम की बजाय दहशतगर्दों को तैयार करने में लग गए।
सिर्फ ये ही नहीं अमरोहा से पकड़ा आतंकी मोहम्मद सुहेल हो या 2017 में मुजफ्फरनगर के ग्राम कुटेसरा से आतंकी संगठन अंसारुल्ला बांग्ला का सक्रिय सदस्य अब्दुल्ला अल मामून। कोलकाता पुलिस द्वारा दिल्ली से गिरफ्तार रजाउल रहमान, लखनऊ के चारबाग स्टेशन से एटीएस द्वारा पकड़े गए इमरान, रजीमुद्दीन, मोहम्मद फिरदौस आदि सभी देवबंद में किसी न किसी रूप में रहे थे।
इन दशहतगर्दों ने देवबंद की छवि को खराब कर दिया है। संदिग्धों के पकड़े जाने के कारण देवबंद हर समय एटीएस, एनआइए और खुफिया विभाग के रडार पर रहता है। कई-कई दिन एटीएस की टीम देवबंद में ही डेरा डाले रहती है। छात्रों एवं संदिग्ध मिलने वाले लोगों से पूछताछ करती रहती है। जिससे बाहर से आने वाले लोगों को भी कई बार परेशानी झेलनी पड़ती है।