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तकनीक ने बदला स्वरूप, हैंडलूम से पावरलूम पर आए बुनकर

Thu, 07 Aug 2025 12:23 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Aug 2025 12:23 AM IST
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Technology has changed the format, weavers have moved from handloom to powerloom
नहटौर में पावरलूम में कार्य करता बुनकर। संवाद - फोटो : संवाद
नहटौर। बिजनौर जनपद का दिल कहा जाने वाले कस्बा नहटौर कपड़ा उद्योग के लिए जाना जाता है। यहां बने कपड़े की देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी मांग है। इस उद्योग से जुड़े हाजी आफाक, खुर्शीद अहमद, फरमान अंसारी, जैनुल अंसारी, हाजी जमालुद्दीन, हाजी कादिर, आफताब अहमद, असरफ अहमद, नदीम अहमद आदि बताते हैं कि पहले कपड़ा हैंडलूम (हथकरघा) से बुना जाता था। नहटौर के अलावा फुलसंदा, सदरुद्दीननगर, इब्राहिमपुर साधो, सेढी, सेढा, मिलक, बैरमाबाद गढ़ी, लल्लावाला, नन्हेड़ा, नकीबपुर, शेखपुरा लाला, नारायणपुर, बल्लाशेरपुर आदि गांवों में शायद ही बुनकरों का कोई घर ऐसा था, जिसमें हैंडलूम न हो। पुरुषों के साथ महिलाएं भी बुनाई के काम में हाथ बंटाती थीं। इसमें सूती व रेशमी हर तरह के कपड़े की बुनाई होती थी, लेकिन बदलते दौर और तकनीक का विकास होने पर हैंडलूम का स्थान पावरलूम ने ले लिया। आज पावरलूमों से हजारों बुनकरों, मजदूरों को भी रोजगार मिल रहा है। बताया कि नहटौर के हैंडलूमों व पावरलूमों से बुने कपड़े की मांग देश में ही नहीं विदेश में भी है। नहटौर में बुना कपड़ा दुबई, सऊदी अरब, कतर, जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, ईरान आदि तमाम देशों में एक्सपोर्ट होता है, जिससे विदेशी मुद्रा देश में आती है। नहटौर में कपड़े के उत्पादन व व्यापार से ही रौनक है।
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हथकरघा में लगता था ज्यादा समय
हथकरघा से कपड़े की बुनाई करने में अधिक समय लगता था, जिससे कई बार ऑर्डर समय पर पूरा नहीं हो पाता था। समय से पूरा न होने के कारण ऑर्डर कैंसिल भी हो जाता था, जिससे बुनकर को नुकसान होता था।
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- नजाकत अंसारी, बुनकर

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समय के साथ बदलाव जरूरी

समय के साथ बदलाव जरूरी है। इस युग में तकनीक को अपनाना जरूरी है। कल हैंडलूम से बुना जाने वाला कपड़ा अब पावरलूम से बुना जा रहा है। गुणवत्ता व मांग में कोई अंतर नहीं है।
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-खुर्शीद अंसारी, बुनकर

समय और ऊर्जा दोनों की बचत
कपड़ा उत्पादन हमारा पारंपरिक व्यवसाय है। हैंडलूम व पावरलूम की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं है। पावरलूम से समय और ऊर्जा दोनों की बचत होती है। ऑर्डर समय से एक्सपोर्ट हो जाता है।
- दानिश अंसारी, एक्सपोर्टर
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