एआई बदल रहा है भारतीयों के कार खरीदने का तरीका: गूगल के अध्ययन ने वाहन कंपनियों को दी क्या सलाह?
गूगल और कांतार के एक ताजा अध्ययन के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा कार खरीदने और उसकी रिसर्च करने के तरीके में बड़ा बदलाव ला रही है। जानें अध्ययन ने कंपनियों को क्या सलाह दी।
विस्तार
भारत में कार खरीदने की प्रक्रिया तेजी से बदल रही है और इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका बढ़ रही है। गूगल और कांतार के एक अध्ययन के मुताबिक, भारतीय कार खरीदार अब AI (एआई) की मदद से अलग-अलग मॉडलों की तुलना करने, फीचर्स समझने, वित्तीय विकल्पों और ईएमआई की गणना करने के साथ-साथ कार की कीमत पर बातचीत की तैयारी भी कर रहे हैं।
"ऑटोमोबाइल परचेज जर्नी इन द एज ऑफ एआई" नाम से किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि सर्वे में शामिल 93 प्रतिशत कार खरीदारों ने अपनी रिसर्च के दौरान AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल किया। यह आंकड़ा बताता है कि कार खरीदने के फैसले में AI की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
कार खरीदने से पहले भारतीय AI का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं?
अध्ययन के अनुसार, खरीदार अब केवल सामान्य ऑनलाइन सर्च तक सीमित नहीं हैं। वे अपनी बजट, ड्राइविंग परिस्थितियों और व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से ज्यादा विशिष्ट सवाल पूछ रहे हैं।
AI की मदद से खरीदार उपलब्ध कारों के विकल्प तलाश रहे हैं, जरूरी फीचर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। तकनीकी स्पेसिफिकेशन की तुलना कर रहे हैं और अपनी पसंद की कारों की सूची तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा, वे ईएमआई की गणना और कार खरीदने से पहले कीमत पर बातचीत की रणनीति तैयार करने के लिए भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्या AI दूसरे सूचना स्रोतों की जगह ले रहा है?
अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि AI दूसरे सूचना स्रोतों की जगह लेने के बजाय कार खरीदने की व्यापक रिसर्च प्रक्रिया का हिस्सा बन रहा है।
AI का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों ने अपनी खरीद यात्रा के दौरान औसतन 7.8 सूचना स्रोतों का इस्तेमाल किया। वहीं, सर्वे में शामिल सभी खरीदारों का औसत 6.9 सूचना स्रोत रहा।
खास तौर पर AI चैटबॉट का इस्तेमाल करने वाले 80 प्रतिशत कार खरीदारों ने अपनी सक्रिय रिसर्च के दौरान गूगल सर्च और/या यूट्यूब का भी इस्तेमाल किया।
गूगल इंडिया के निदेशक सिद्धार्थ शेखर ने कंपनी की प्रेस विज्ञप्ति में अध्ययन के निष्कर्षों पर कहा कि भारत में कार खरीदने की प्रक्रिया सोच-समझकर की जाने वाली, रैखिक न होकर अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ने वाली और डिजिटल माध्यमों पर काफी निर्भर है। उन्होंने कहा कि खासकर त्योहारी सीजन से पहले कारों पर विचार करने की प्रक्रिया तेज होती है। जहां खरीदार यूट्यूब पर जानकारी तलाशने के बाद सर्च पर बातचीत के जरिए उसकी पुष्टि करते हैं।
AI के बढ़ते इस्तेमाल से वाहन कंपनियों की मार्केटिंग कैसे बदल सकती है?
अध्ययन के अनुसार, ग्राहकों के खरीदारी से पहले अधिक विस्तृत जानकारी तलाशने के कारण वाहन कंपनियों को अपनी डिजिटल मार्केटिंग रणनीतियों में बदलाव करने की जरूरत है।
रिपोर्ट में वाहन निर्माताओं को केवल सामान्य उत्पाद स्पेसिफिकेशन पर निर्भर रहने के बजाय विस्तृत रिव्यू, व्यावहारिक प्रदर्शन और रोजमर्रा के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है।
उदाहरण के तौर पर, कंपनियां यह दिखा सकती हैं कि किसी कार में चाइल्ड सीट आसानी से फिट होती है या नहीं, घर पर इलेक्ट्रिक वाहन का चार्जर कैसे लगाया जाता है या रोजमर्रा के ट्रैफिक में ADAS और 360-डिग्री कैमरा किस तरह काम करते हैं।
वीडियो और AI आधारित विज्ञापन से कितना फायदा मिल सकता है?
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि वाहन कंपनियां संभावित ग्राहकों तक खरीदारी के अलग-अलग चरणों में पहुंचने के लिए वीडियो विज्ञापन और AI आधारित डिजिटल मार्केटिंग समाधानों को एक साथ इस्तेमाल कर रही हैं।
रिपोर्ट में Hyundai Verna (ह्यूंदै वर्ना) के एक अभियान का उदाहरण दिया गया है। इसमें यूट्यूब और एआई आधारित गूगल विज्ञापन समाधानों को एक साथ इस्तेमाल किया गया। इस अभियान के दौरान मार्च-अप्रैल 2026 में कंपनी की खुदरा बिक्री जनवरी-फरवरी 2026 की तुलना में 30 प्रतिशत बढ़ने की जानकारी दी गई।
इसी अभियान में लीड्स में 35 प्रतिशत वृद्धि और प्रति पूछताछ लागत में 32 प्रतिशत कमी भी दर्ज की गई।
Google-Kantar का यह अध्ययन कैसे किया गया?
गूगल की ओर से कराए गए इस अध्ययन को कांतार ने मई 2026 में किया था। इसके लिए भारत के महानगरों और टियर-1 शहरों में पिछले छह महीनों के दौरान कार खरीदने वाले 1,022 लोगों का ऑनलाइन सर्वेक्षण किया गया।
अध्ययन के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि AI अब कार खरीदने से पहले की रिसर्च प्रक्रिया में एक अतिरिक्त डिजिटल साधन के रूप में तेजी से शामिल हो रहा है। ऐसे में वाहन कंपनियों के लिए ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और रोजमर्रा के इस्तेमाल से जुड़े सवालों पर केंद्रित डिजिटल सामग्री तैयार करना महत्वपूर्ण हो सकता है।