शिक्षक दिवस: जिन्होंने आपको चढ़ना सिखाईं कामयाबी की सीढ़ियां, आइए करें उन गुरुओं का सम्मान
देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं हैं, बस उन्हें जरूरत है तलाशने और तराशने की। मेरठ शहर में भी ऐसी ही प्रतिभाओं को शिक्षकों, कोच ने तराशा तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर रही हैं। वहीं ऐसे भी बच्चे हैं जो आर्थिक तंगी के चलते स्कूल जाने में असमर्थ हैं, लेकिन कई शिक्षकों ने उन्हें निशुल्क पुस्तकें, यूनिफार्म उपलब्ध कराई और शिक्षा दे रहे हैं। साथ ही शहर में कई ऐसे खिलाड़ी है जिन्होंने खेल जगत में नाम रोशन किया। इनकी कामयाबी के पीछे इनके कोच का मुख्य योगदान है। आए आज शिक्षक दिवस पर ऐसे शिक्षकों और कोच का सम्मान करें।
जो न देख पाते, न सुन पाते, उनका थामा हाथ
कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो न सुन पाते हैं न बोल पाते हैं। कुछ बच्चे देख भी नहीं पाते। ऐसे बच्चों को पढ़ना, लिखाना, सिखाना आसान नहीं होता। वहीं, कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो पढ़ लिख सकते हैं, लेकिन उनके पास संसाधन नहीं होते। अपने मेरठ में कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं जो इस नेक काम को कर रहे हैं। शास्त्रीनगर में रहने वाली डॉ. ममता शर्मा मेरठ कॉलेज में राजनीति विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
उनके पति डॉ. सुधीर कुमार मुरादनगर डिग्री कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वर्ष 2014 में डॉ. ममता शर्मा ने जागृति विहार छह में ब्रिलियंट श्रेय एकेडमी की शुरुआत की। स्कूल प्री नर्सरी से पांचवीं तक है। स्कूल में अब सौ के करीब बच्चे हैं। स्कूल में जो बच्चे फीस दे पाने में असमर्थ हैं, उनको निशुल्क शिक्षा दी जाती है। डॉ. ममता शर्मा ने स्कूल की शुरुआत में स्लम और दूसरे इलाकों में जाकर लोगों को जागरूक किया।
दूर कर रहे जीवन से अंधियारा
जागृति विहार सेक्टर छह स्थित ब्रजमोहन स्कूल फॉर द ब्लाइंड में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दूसरे राज्यों के करीब 32 बच्चे पढ़ते हैं। ये सभी दृष्टिहीन हैं। ये बच्चे यहां स्कूल में घर की तरह रहते हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ ही गीता के श्लोक पढ़ाए जाते हैं।
बच्चियों को कत्थक और गाने की प्रैक्टिस कराई जाती है। इसी के चलते यहां पढ़ने वाली बच्ची रितिका को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्मानित कर चुके हैं। स्कूल के प्रधानाचार्य प्रवीण शर्मा इस स्कूल को चैरिटी से चलाते आ रहे हैं। स्कूल में शिक्षा निशुल्क है। नौकरी छोड़ने के बाद प्रवीण शर्मा पत्नी उपासना शर्मा के साथ इस स्कूल को आगे बढ़ाने में जुटे रहते हैं।
करा रहे तैयारी
अम्हैड़ा निवासी एडवोकेट रोबिन सिवाच आठ साल से कोचिंग सेंटर के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे हैं। सुबह व शाम के दो बैचों में लगभग 80 बच्चे पढ़ने आते हैं। कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए निशुल्क ट्यूशन भी देते हैं। सिखैड़ा, अम्हैड़ा, मामेपुर,ललसाना, साधारणपुर, नगला, रजपुरा, ईशापुरम, गंगानगर आदि क्षेत्र से छात्र पढ़ने आते हैं।
शिक्षकों ने दी दिशा
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने मेरठ में ही पढ़ाई की। यहीं पर वे शिक्षक बने और अब लगातार दो कार्यकाल से कुलपति हैं। प्रो. तनेजा की दसवीं से लेकर पीएचडी तक की शिक्षा डीएन कॉलेज से हुई। वे बताते हैं कि जब यहां आए तो बेहद औसत छात्र थे, लेकिन उनके विकास में शिक्षकों का बड़ा योगदान है।
ग्रामीण परिवेश से होने के कारण उनको बहुत से अंग्रेजी अखबारों के बारे में तो यहां की लाइब्रेरी में आकर ही पता चला। पढ़ाई का माहौल बनाने के लिए टॉपर छात्रों के फोटो लगे होते थे ताकि दूसरे छात्रों को भी प्रोत्साहन मिले। कुलपति प्रो. तनेजा कहते हैं कि जो हमें हमारे शिक्षकों ने दिया है, उसको भावी पीढ़ी को देना हमारा कर्तव्य है।
बालिकाओं को देते हैं निशुल्क शिक्षा
विरोध और लोगों के झगड़े के बाद भी अकादमी कायम की। यहां लगभग 3000 बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। यूपी बोर्ड की पढ़ाई के साथ यहां सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, मूर्ति कला, कला और कंप्यूटर की ट्रेनिंग भी बालिकाओं को दी जा रही है। उन्हें एनसीसी के क्षेत्र में अनेकों राष्ट्रीय, राज्य अवार्ड भी मिल चुके हैं। अधिकारियों ने उन्हें ‘वन मैन एनजीओ’ का खिताब दिया है।
हम बात कर रहे हैं डॉ. आईए खान की, जो बालिकाओं का भविष्य संवार रहे हैं। उन्होंने साल 2012 में ‘बालिका साक्षर सशक्त व आत्मनिर्भर बनाओ’ अभियान के तहत शास्त्रीनगर मेरठ में एफर्ट अकादमी फॉर स्लम गर्ल्स प्रारंभ की। इसमें आठवीं कक्षा तक मान्यता भी मिल गई है। इस समय 200 से अधिक बालिकाएं पढ़ रही हैं। डॉ. आईए खान निशुल्क कोचिंग से 30 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को सफल बना चुके हैं।