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Meerut News: मसूरी गांव में एक करोड़ की टंकी हुई जर्जर, 3 साल से बंद
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गंगानगर। एनएच-34 स्थित रजपुरा ब्लॉक के गांव मसूरी में एक करोड़ की लागत से बनी पानी की टंकी तीन साल से बंद है। टंकी न चलने पर ग्रामीणों ने घर-घर सबमर्सिबल लगवा लिए हैं। वहीं ग्राम प्रधान व सचिव का तर्क है कि ग्रामीण टंकी संचालन के लिए मात्र 30 रुपये प्रतिमाह तक का शुल्क नहीं देते हैं। इसके चलते ऑपरेटर की तनख्वाह भी नहीं निकल पाती।
मसूरी में मंदिर के पास पानी की टंकी है, जिसमें दो कमरे, ट्यूबवेल सहित रसोई भी है। जल निगम ने ग्राम पंचायत की भूमि पर इसे तैयार कराया। टंकी परिसर में जाने के लिए रास्ते को खेत में जोत दिया गया। सन 2015 से निर्माण के बाद 2021 तक पानी का सुचारू रूप से संचालन किया गया। ग्रामीण रामवीर, पप्पू, सोनू, श्यामे आदि ने बताया कि तीन साल से पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद है। सभी घरों में कनेक्शन तो हैं, परंतु पानी नहीं आता। कुछ घरों में नल हैं तो कुछ ने सबमर्सिबल लगवा लिए।
ग्राम पंचायत को हैंडओवर नहीं टंकी
ग्राम प्रधान रविंद्र का कहना है कि ग्राम पंचायत को टंकी जल निगम द्वारा हैंडओवर नहीं की गई है। ऑपरेटर का मानदेय ग्राम पंचायत से नहीं दिया जाता है। अगर मानदेय की व्यवस्था प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायत से करा दी जाए तो दोबारा संचालन शुरू हो सकता है। मसूरी ग्राम सचिव डॉ. पवन के मुताबिक ग्राम पंचायत को टंकी हैंडओवर है, जिसके चलते शुल्क रसीद छपवाई हुई हैं। ग्रामीणों द्वारा मात्र 30 रुपये प्रतिमाह का शुल्क तक नहीं दिया जाता। पिछले दिनों जब ऑपरेटर रोहताश ने शुल्क रसीद काटनी शुरू कीं तो आठ हजार की आबादी में उसके तनख्वाह तक के रुपये इकट्ठा नहीं हो सके। बिजली का बिल व मरम्मत कार्य अलग रहे। जिसके चलते उसने भी ऑपरेट करने से इनकार कर दिया।
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मसूरी में मंदिर के पास पानी की टंकी है, जिसमें दो कमरे, ट्यूबवेल सहित रसोई भी है। जल निगम ने ग्राम पंचायत की भूमि पर इसे तैयार कराया। टंकी परिसर में जाने के लिए रास्ते को खेत में जोत दिया गया। सन 2015 से निर्माण के बाद 2021 तक पानी का सुचारू रूप से संचालन किया गया। ग्रामीण रामवीर, पप्पू, सोनू, श्यामे आदि ने बताया कि तीन साल से पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद है। सभी घरों में कनेक्शन तो हैं, परंतु पानी नहीं आता। कुछ घरों में नल हैं तो कुछ ने सबमर्सिबल लगवा लिए।
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ग्राम पंचायत को हैंडओवर नहीं टंकी
ग्राम प्रधान रविंद्र का कहना है कि ग्राम पंचायत को टंकी जल निगम द्वारा हैंडओवर नहीं की गई है। ऑपरेटर का मानदेय ग्राम पंचायत से नहीं दिया जाता है। अगर मानदेय की व्यवस्था प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायत से करा दी जाए तो दोबारा संचालन शुरू हो सकता है। मसूरी ग्राम सचिव डॉ. पवन के मुताबिक ग्राम पंचायत को टंकी हैंडओवर है, जिसके चलते शुल्क रसीद छपवाई हुई हैं। ग्रामीणों द्वारा मात्र 30 रुपये प्रतिमाह का शुल्क तक नहीं दिया जाता। पिछले दिनों जब ऑपरेटर रोहताश ने शुल्क रसीद काटनी शुरू कीं तो आठ हजार की आबादी में उसके तनख्वाह तक के रुपये इकट्ठा नहीं हो सके। बिजली का बिल व मरम्मत कार्य अलग रहे। जिसके चलते उसने भी ऑपरेट करने से इनकार कर दिया।
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